ईरान युद्ध अब एक ऐसे खतरनाक रास्ते पर पहुँच गई है जहाँ आगे क्या होगा, इसका अंदाज़ा लगाना बहुत मुश्किल है। माहौल पल-पल और भी डरावना होता जा रहा है। तेहरान ने साफ़ कह दिया है कि वह अभी भी जंग के मैदान में खड़ा है। साथ ही, दुनिया का सबसे बड़ा तेल का रास्ता, हॉर्मुज जलडमरूमध्य, अब लगभग बंद हो गया है, जिससे पूरी दुनिया में तेल की किल्लत बढ़ सकती है। दुनिया भर के बड़े नेता बातचीत से मामला सुलझाने की कोशिश तो कर रहे हैं, लेकिन इस लड़ाई का बुरा असर अब दूर-दूर तक पहुँच गया है। यूरोप की अर्थव्यवस्था से लेकर भारत में हवाई सफर के महंगे होने तक, हर कोई इसकी चपेट में है।
ईरानी फौज के अधिकारी ने पुष्टि की है कि भले ही ऊपर-ऊपर से शांति की बातें हो रही हैं, लेकिन अंदरूनी तौर पर सेना युद्ध की पूरी तैयारी में है। उनके मुताबिक, देश अभी भी उसी तरह काम कर रहा है जैसे युद्ध के दौरान किया जाता है। फौज की चौकसी और तैयारी इतनी ज्यादा है कि जरा सी भी लापरवाही या गलतफहमी से फिर से बड़ी लड़ाई छिड़ सकती है। माहौल ऐसा है कि एक छोटी सी चिंगारी भी पूरे इलाके में आग लगा सकती है।
इस पूरी लड़ाई की असली जड़ हॉर्मुज की खाड़ी है। यह रास्ता भले ही छोटा हो, लेकिन बहुत कीमती है क्योंकि दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले तेल और गैस का 20 फीसदी हिस्सा यहीं से होकर निकलता है। रास्ता बंद होने की खबर से ही हज़ारों जहाज़ समुद्र में फँस गए हैं। इसका असर यह हुआ है कि पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीज़ल और गैस के दाम अचानक बहुत बढ़ गए हैं। एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि अगर रास्ता खुल भी गया, तो भी खतरा टला नहीं है। समंदर में छिपी बारूदी सुरंगों को साफ करने और जहाजों के बीमा के मसले सुलझाने में काफी वक्त लगेगा, इसलिए सब कुछ पहले जैसा होने में कई महीने लग सकते हैं।

बढ़ते तनाव के बीच खाड़ी देशों के नेता एकता पर ज़ोर दे रहे हैं।
ईरान में युद्ध शुरू हुए दो महीने हो चुके हैं, और अब पहली बार खाड़ी देशों के बड़े नेता एक साथ जेद्दा (सऊदी अरब) में मिल रहे हैं। इस मुश्किल माहौल में हो रही यह मीटिंग इसलिए खास है क्योंकि ये सभी नेता पहली बार आमने-सामने बैठकर चर्चा करेंगे। इस मीटिंग का असली मकसद यह था कि कैसे भी करके इस बंद रास्ते को फिर से खुलवाया जाए और सभी पड़ोसी देश मिलकर एक जैसी योजना पर काम करें।
कतर ने साफ़-साफ़ चेतावनी दी है कि बातचीत के दौरान इस समुद्री रास्ते को सौदेबाजी का साधन नहीं बनाना चाहिए। उसने कहा कि इस रास्ते को बंद करने या खोलने की धमकी देकर अपनी बातें मनवाना गलत है। अधिकारियों को डर है कि कहीं यह लड़ाई बस कुछ समय के लिए न रुक जाए। अगर झगड़े की असली वजह खत्म नहीं हुई, तो ऊपर-ऊपर की शांति के बावजूद मनमुटाव बना रहेगा और आगे चलकर फिर से खून-खराबा शुरू होने का खतरा रहेगा।
हालांकि सभी देशों की सोच अलग-अलग थी, फिर भी जानकारों का कहना है कि वे सब हैरान कर देने वाली हद तक एक साथ नज़र आए। मुश्किल समय में दिखाई गई यह एकता वाकई काबिले-तारीफ है। कतर और ओमान जैसे देश अब भी चाहते हैं कि मामला बातचीत से सुलझ जाए। लेकिन सऊदी अरब और यूएई, जिनके तेल और गैस प्लांटों पर कई बार हमले हो चुके हैं, अब अपनी सुरक्षा के लिए सख्त और बचावकारी कदम उठाने की योजना बना रहे हैं।
अमेरिका और ईरान नाज़ुक कूटनीतिक विकल्पों पर विचार कर रहे हैं
बातचीत का रास्ता अभी भी खुला है, पर भरोसा बहुत कम है। स्थिति इतनी नाज़ुक है कि ज़रा सी भी चूक इस पूरी कोशिश को नाकाम कर सकती है। अमेरिका ईरान के उस नए प्लान को परख रहा है जिसमें लड़ाई रोकने और समुद्र का रास्ता खोलने की बात कही गई है। हालांकि, ईरान ने इसमें एक पेच फँसाया है कि वह फिलहाल अपने परमाणु कार्यक्रम पर कोई बात नहीं करेगा।
राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया है कि ईरान अंदरूनी तौर पर पूरी तरह टूट चुका है और उसने खुद अमेरिका से यह रास्ता खोलने की विनती की है। ट्रंप का मानना है कि ईरान पर लगाई गई पाबंदियों की वजह से वहां के हालात बेकाबू हो गए हैं और वे अब समझौता करना चाहते हैं। अमेरिका और ईरान की तरफ से कभी हाँ और कभी ना वाली बातें सामने आ रही हैं। इस खींचतान की वजह से अब किसी को समझ नहीं आ रहा कि क्या कोई सच्चा समझौता हो भी पाएगा या नहीं।
मुश्किलें और बढ़ती जा रही हैं क्योंकि ईरान जाने वाले 3000 के करीब कंटेनर पाकिस्तान में ही रुके पड़े हैं। यह दिखाता है कि लड़ाई की वजह से व्यापार करना कितना मुश्किल हो गया है और इसका बुरा असर अब दोनों देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
इज़राइल-लेबनान तनाव बढ़ा
ईरान युद्ध की वजह से अब पूरे इलाके में अशांति फैल गई है। खासकर इज़राइल और लेबनान के बॉर्डर पर फिर से हमले और खून-खराबा शुरू हो गया है। अप्रैल में लड़ाई रोकने का समझौता तो हुआ था, लेकिन वह बहुत कमज़ोर साबित हुआ। इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच लड़ाई अभी भी चल रही है, और तनाव कम होने के बजाय बढ़ता जा रहा है।
वहां के स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मार्च से अब तक हज़ारों लोग मारे जा चुके हैं या घायल हुए हैं। पिछले कुछ दिनों में हुए नए हमलों के बाद नुकसान और भी ज़्यादा बढ़ गया है। इज़रायल के ड्रोन और तोपों ने दक्षिणी लेबनान पर हमला किया है। दूसरी तरफ, हिज़्बुल्लाह का कहना है कि उसने बदला लेने के लिए इज़रायल की सेना के ठिकानों पर रॉकेट और गोलों से हमला किया है।
लेबनान की राजनीति में आज एक बहुत बड़ा बदलाव आया है। लेबनान ने ऐलान किया है कि वह अब इज़राइल से सीधे तौर पर बात करेगा। वे चाहते हैं कि लड़ाई हमेशा के लिए रुक जाए और इज़राइल की फौज उनके देश से पूरी तरह बाहर निकल जाए। हिज़्बुल्लाह का कड़ा प्रतिरोध: वार्ता के प्रस्ताव को ‘बेअसर’ बताते हुए हिज़्बुल्लाह ने चेतावनी दी है कि यह कदम लेबनान में भीषण आंतरिक कलह का कारण बन सकता है।
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Author: Rajesh Srivastava
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