टीएमसी ने सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के लिए अभिषेक बनर्जी को चुना, यूसुफ पठान की जगह मिली अहम जिम्मेदारी
नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने मंगलवार को एक बड़ा राजनीतिक फैसला लेते हुए अपने लोकसभा सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को बहुपक्षीय विदेश दौरे पर जाने वाले संसदीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल करने की घोषणा की। यह कदम तब उठाया गया जब पार्टी ने सोमवार को इसी प्रतिनिधिमंडल से अपने पहले चयनित सदस्य यूसुफ पठान का नाम वापस ले लिया।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी पार्टी का दूसरा सबसे बड़ा चेहरा माने जाते हैं। उनके इस अंतरराष्ट्रीय दौरे में शामिल होने से न सिर्फ राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की स्थिति मजबूत होगी, बल्कि अभिषेक बनर्जी की नेतृत्व क्षमता को भी नया आयाम मिलेगा।
केंद्र से सीधे संपर्क पर जताई आपत्ति, फिर ममता ने खुद सुझाया नाम
टीएमसी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के मुताबिक केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने ममता बनर्जी को फोन कर पार्टी की ओर से प्रतिनिधित्व के लिए किसी सांसद का नाम सुझाने को कहा था। इस पर ममता बनर्जी ने खुद अभिषेक बनर्जी का नाम प्रस्तावित किया। यह घटनाक्रम इस बात को रेखांकित करता है कि केंद्र सरकार अब इस मुद्दे पर सभी प्रमुख दलों की भागीदारी सुनिश्चित करना चाहती है और टीएमसी जैसी बड़ी पार्टियों की प्राथमिकताओं का भी सम्मान कर रही है।
टीएमसी लंबे समय से यह रुख अपनाती रही है कि पार्टी प्रमुख की सिफारिश के बिना पार्टी की ओर से कोई प्रतिनिधित्व नहीं किया जा सकता। ऐसे में पार्टी केंद्र सरकार द्वारा पार्टी से सलाह किए बिना यूसुफ पठान के नाम की घोषणा करने से नाखुश थी।
पार्टी के भीतर उठे सवाल : यूसुफ पठान को क्यों हटाया गया ?
पूर्व भारतीय क्रिकेटर और 2024 के लोकसभा चुनाव में बहरामपुर से कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी को हराकर संसद पहुंचे यूसुफ पठान को पहले इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल किया गया था। लेकिन सोमवार को उनकी नियुक्ति पर सवाल उठे जब यह बात सामने आई कि केंद्र ने टीएमसी के लोकसभा नेता सुदीप बंद्योपाध्याय और राज्यसभा नेता डेरेक ओ ब्रायन से संपर्क किए बिना यूसुफ पठान का नाम फाइनल कर दिया।
टीएमसी के दो वरिष्ठ नेताओं के अनुसार, पार्टी ने इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताई और स्पष्ट किया कि पार्टी नेतृत्व की सहमति के बिना कोई भी सांसद प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा नहीं हो सकता। इस आपत्ति के बाद यूसुफ पठान को प्रतिनिधिमंडल से हटा दिया गया और अभिषेक बनर्जी का नाम फाइनल किया गया।
ऐतिहासिक उदाहरण: जब ममता बनर्जी ने वाजपेयी सरकार से भी टकराव जताया था
यह पहली बार नहीं है जब ममता बनर्जी ने पार्टी नेतृत्व के अधिकारों पर जोर दिया हो। अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल में भी जब प्रधानमंत्री ने सीधे टीएमसी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय को मंत्री पद की शपथ के लिए बुलाया था, तब ममता बनर्जी नाराज हो गई थीं और उन्होंने वाजपेयी को पत्र लिखा था और आखिरकार बंद्योपाध्याय को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया था।
इस पृष्ठभूमि में देखा जाए तो ममता की सहमति के बिना केंद्र सरकार द्वारा यूसुफ पठान के नाम की घोषणा एक राजनीतिक भूल साबित हुई, जिसे तुरंत सुधार लिया गया।
अभिषेक बनर्जी की भूमिका और बयान
अभिषेक बनर्जी सोमवार को विदेश मामलों की संसदीय समिति की बैठक में शामिल हुए। बैठक के बाद उन्होंने मीडिया से कहा, “आतंकवाद से लड़ने और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के मुद्दे पर टीएमसी केंद्र सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। लेकिन किस पार्टी से कौन जाएगा, यह तय केंद्र सरकार अकेले नहीं कर सकती। हमें आतंकवाद पीड़ितों के परिवारों को भी भेजना चाहिए, साथ ही प्रतिनिधिमंडल में सेना के अधिकारियों को भी शामिल किया जाना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा, “यह राजनीति करने का समय नहीं है। अगर केंद्र सरकार टीएमसी से प्रतिनिधित्व मांगती है, तो हम निश्चित रूप से सदस्य भेजेंगे।” यह बयान दर्शाता है कि टीएमसी राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर केंद्र सरकार के साथ सहयोग करने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए उचित सम्मान और प्रक्रिया की भी जरूरत है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल: कहां जा रहा है यह प्रतिनिधिमंडल?
यह बहुपक्षीय प्रतिनिधिमंडल इंडोनेशिया, मलेशिया, दक्षिण कोरिया, जापान और सिंगापुर की यात्रा पर जा रहा है। इसका नेतृत्व जनता दल (यूनाइटेड) के नेता संजय झा कर रहे हैं। इस दौरे का उद्देश्य विपक्षी दलों को भारत की विदेश नीति के बारे में बताना और एकता का संदेश देना है। इस प्रतिनिधिमंडल में कई प्रमुख विपक्षी दलों के नेता शामिल हैं और टीएमसी का प्रतिनिधित्व ऐसे नेता को करना चाहिए था, जिसे राजनीतिक अनुभव के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की भी समझ हो। इस संदर्भ में अभिषेक बनर्जी का चयन एक उचित निर्णय माना जा रहा है। राजनीतिक संदेश और अभिषेक की छवि
अभिषेक बनर्जी का चयन न केवल टीएमसी के भीतर बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी एक महत्वपूर्ण संकेत है। एक तरफ यह पार्टी पर ममता बनर्जी की पकड़ को दर्शाता है, वहीं दूसरी तरफ यह अभिषेक की राष्ट्रीय छवि को और मजबूत करेगा। अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक मंचों पर उनकी भागीदारी उन्हें भविष्य में बड़ी भूमिका के लिए तैयार करेगी।
इसके अलावा टीएमसी का यह रुख कि ‘पार्टी का प्रतिनिधि केवल पार्टी के नेता ही तय करेंगे| पार्टी प्रमुख का यह बयान विपक्षी दलों के लिए भी नजीर बन सकता है, खासकर ऐसे समय में जब केंद्र सरकार विपक्ष की भूमिका को सीमित करने की कई बार कोशिश कर चुकी है।
निष्कर्ष :
विदेशी प्रतिनिधिमंडल में अभिषेक बनर्जी को शामिल करना महज एक मनोनयन नहीं है, बल्कि यह उस राजनीतिक समझ का संकेत है जिसका प्रदर्शन ममता बनर्जी की पार्टी सालों से करती आ रही है। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि टीएमसी अपनी राजनीतिक संप्रभुता से समझौता नहीं करेगी, भले ही वह केंद्र सरकार से सहयोग की बात क्यों न कर रही हो।
इस पूरे घटनाक्रम से न सिर्फ अभिषेक बनर्जी बल्कि अभिषेक बनर्जी को भी फायदा होगा।
इससे न सिर्फ अभिषेक बनर्जी को एक नया मंच मिलेगा, बल्कि टीएमसी की राजनीतिक सोच और अनुशासन का भी संदेश जाएगा। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अभिषेक इस दौरे में क्या भूमिका निभाते हैं।
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Author: Swatantra Vani
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