Israel-Iran War : मिडिल ईस्ट में टकराव बढ़ रहा है, ग्लोबल रिस्क भी बढ़ रहे हैं, इस टकराव का भारत पर भी असर जरूर पड़ेगा
डिप्लोमेसी से पहला झटका नहीं, बल्कि आसमान में आग लगने से लगा। ईरान पर इज़राइल और अमेरिका के मिलकर किए गए अचानक हमलों के सिर्फ़ 48 घंटों के अंदर, Israel-Iran War अपने हदो को पार कर चूका है और साथ ही बॉर्डर भी , अपने युद्ध के मैदान को और बड़ा कर रहा है, और एक बड़े वैश्विक झगड़े का डर पैदा कर चुका है।
अब ये कोई छेत्रिय लड़ाई नहीं रह गया है । जो एक सैन्य ऑपरेशन के तौर पर प्रारंभ हुआ था, वह अब गठबंधनों को बदल रहा है, धीरे धीरे ग्लोबल तेल की भी सप्लाई चेन खतरे में आ रही है, और भारत में भी इसका असर दिख सकता है।

Israel-Iran War : तेज़ी से बढ़ती टाइमलाइन
घटनाओ का सिलसिला कुछ इस तरह तेज़ी से आगे बढ़ रहा है , इससे देखने वाले बहुत ही ज्यादा हैरान है।
खबर आ रही है कि शुरुआती हमलों में ईरान की ज़रूरी सैन्य और स्ट्रेटेजिक ठिकानो को निशाना बनाया गया, जिसमें तेहरान की यूनिवर्सिटी स्ट्रीट, जोम्हौरी ज़िले के आस पास के इलाके और Islamic Revolutionary Guard Corps. से नज़दीकी ज़ोन शामिल हैं। इज़राइल और अमेरिका के हमलों में ईरान के बड़े अधिकारियों के साथ-साथ ईरान के लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके परिवार के लोगो के भी मारे जाने की खबर है, जिससे देश में राष्ट्रीय शोक मौहौल है।
ईरान का भी जवाब बड़ा और तेज़ हो गया है । ईरान का जवाबी कार्यवाही इसराइल तक सिमित रखने का इरादा नहीं है, तेहरान ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधि बढ़ा दी है और कई क्षेत्रो पर मिसाइलें और ड्रोन दागे। सऊदी अरब, क़तर, संयुक्त अरब एमिरेट्स, बहरीन, कुवैत और ओमान सभी ने एयरपोर्ट, पोर्ट, कमर्शियल ज़ोन और यहाँ तक कि US सैन्य बेस जैसी सेंसिटिव जगहों पर हमलों की जानकारी दी।
दो दिनों के अंदर, Israel-Iran War असल में कई देशों के संकट में बदल गया।
Gulf Nations क्रॉसफ़ायर में फंसे
सभी घटनाओ के बीच सबसे चिंताजनक बातो में एक यह है कि कई Gulf Nations, जो शुरुआती सैन्य गतिविधि में सीधे तौर पर शामिल नहीं थे, परन्तु अब टारगेट बन गए हैं। इससे स्ट्रेटेजिक इक्वेशन पूरी तरह से बदल जाता है।
दशकों से, ये देश डिप्लोमेसी, इकोनॉमिक कोऑपरेशन और सिक्योरिटी पार्टनरशिप के एक नाजुक और संतुलित बैलेंस पर निर्भर रहे हैं। वह बैलेंस अब दबाव में में बदलता दिख रहा है जो की ठीक नहीं है ।
अगर Israel-Iran War जारी रहता है, तो Gulf Nations को अपने सुरक्षा पर फिर विचार करना पड़ सकता है, सैन्य खर्च बढ़ाने और खासकर पश्चिमी ताकतों के साथ अपने सम्बन्धो को मजबूत करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। साथ ही, वे एक बड़ी जियोपॉलिटिकल दुश्मनी में परमानेंट बैटलग्राउंड बनने का रिस्क भी उठाते हैं।
होर्मुज और ग्लोबल इकोनॉमिक शॉकवेव्स
दुनिया भर के देशो की चिंताओं का प्रमुख केंद्र होर्मुज की खाड़ी है, जो दुनिया के सबसे ज़रूरी ऑयल ट्रांज़िट चोकपॉइंट्स है। यहां छोटी-मोटी रुकावटें भी ग्लोबल मार्केट में शॉकवेव्स बना सकती हैं।
एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि इस झेत्र में लम्बे समय तक तनाव रहने से तेज़ की कीमतों पर प्रभाव पड़ने की सम्भावना है। हालांकि तेल निर्यात करने वाले देशों को शॉर्ट टर्म में फ़ायदा हो सकता है, परन्तु लम्बे समय तक ये तनाव रहने पर ये ग्लोबल एनर्जी मार्किट को नुकसान पंहुचा सकता है और इन्वेस्टर्स के लिए एक नई समस्या बन सकता है।
पहले से ही पॉलिसी सर्कल में सवाल उठ रहे हैं कि क्या तेल की बढ़ती कीमतें इस वॉर का एक अवांछित नतीजा हो सकती हैं या एक सोची समझ रणनीति ।
इस बीच, चीन और रूस जैसी बड़ी ताकतें करीब से मामले पर नज़र रखे हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मॉस्को इस मौका का पूरा फायदा उठाना चाहेगा और अपने हतियारो को बेचना चाहेगा और बिना सीधे मिलिट्री दखल के इस इस झेत्र में अपने कदम मजबूत कर सकता है।

पैरेलल डिप्लोमेसी: आग के बीच बातचीत जारी
चल रहे तनावों के बावजूद, डिप्लोमेटिक कोशिशे पूरी तरह से नाकाम नहीं हुई है। परन्तु अब देखना ये है की ये कोशिश कितनी सफल हुई है ।
जेनेवा में, ओमान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत को ईरानी विदेश मंत्री Seyyed Abbas Araqchi ने बात की और अब तक की सबसे बड़ी बात की है। International Atomic Energy Agency के लीडरशिप की मौजूदगी यह इशारा करती है कि बातचीत में का ये सीधा इशारा है की नुक्लेअर हमले की कोई चिंता नहीं हैं।
ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम से जुड़े जरुरी मुद्दों पर बात करने के लिए टेक्निकल टीमों के Vienna में मिलने की उम्मीद जताई जा रही है । बातचीत के चौथे चरण की भी योजना बनाई जा रही है, जिससे समझ आता है कि दोनों पक्ष बात चीत करके समस्या का हाल निकलने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि, एक महत्वपूर्ण सवाल ये भी है की । क्या ये बातचीत शांति की तरफ में एक कोशिशें थीं, या इन्हें सैन्य गतिविधि के लिए कवर के तौर पर इस्तेमाल किया गया था?
इस सवाल ने अविश्वास को और असंतोष को गहरा कर दिया है और आगे का रास्ता मुश्किल बना दिया है।
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Israel-Iran War का भारत में भी असर: फ्लाइट्स रद्द, यात्री फंसे
Israel-Iran War का असर सिर्फ़ मिडिल ईस्ट तक ही सिमित नहीं है, बल्कि भारत में भी इसका असर देखने को मिल रहा है और ये एक चिंता का भी विषय है।

Gulf Nations में बढ़ती सिक्योरिटी चिंताओं की वजह से वाराणसी के Lal Bahadur Shastri International Airport से Sharjah जाने वाली फ्लाइट्स रद्द कर दी हैं। एयर इंडिया की दो फ्लाइट्स में कुल 332 यात्री प्रभावित हुए।
शाम को निकलने वाली पहेली फ्लाइट में 170 यात्री बोर्डिंग के लिए तैयार थे। कई लोगों ने चेक-इन प्रोसेस पूरा कर लिया था, एयरपोर्ट अथॉरिटी के द्वारा फ्लाइट रद करने की अनाउंसमेंट हो गयी हुई। बाद में रात को 162 यात्री वाली फ्लाइट भी कैंसिल कर दी गई, जिससे यात्री को निराश होना पड़ा और और कुछ यात्री गुस्से से भर गए ।
अधिकारियों ने 28 फरवरी से 4 मार्च तक वाराणसी से Sharjah जाने वाली सभी फ्लाइट्स रद्द कर दी हैं। अधिकारियों ने West Asia में बढ़ते तनाव और सिक्योरिटी रिस्क को इसका मुख्य कारण बताया है।
एयर इंडिया ने यात्रियों के सारे पैसो को रिफंड करने की अनाउंसमेंट की और प्रोसेस भी शुरू कर दिया और पैसेंजर्स को दूसरे इंतज़ाम करने में मदद करने के लिए काम कर रहा है। हालांकि, कई लोगों के लिए इस रुकावट से पहले ही काफी परेशानी और अनिश्चितता हो गई है। अब देखना ये है की भारत को इस वॉर से कितना नुकसान या कितना फायदा होने वाला है ।
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Author: Rajesh Srivastava
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