भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख बेंचमार्क – निफ्टी और निफ्टी 50
13 मई को भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख बेंचमार्क – निफ्टी और निफ्टी 50 – में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी 1,282 अंक या 1.55 प्रतिशत की गिरावट के साथ 81,148.22 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 346 अंक या 1.39 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,578.35 पर बंद हुआ।
दिन के दौरान निफ्टी 1,386 अंक गिरकर 81,043.69 पर आ गया और निफ्टी 50 377 अंक की गिरावट के साथ 24,547.50 के निचले स्तर पर पहुंच गया।
हालांकि, बाजार में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। पोर्टफोलियो मिडकैप स्कैनर 0.17% और स्मॉलकैप स्टूडियो 0.99% ऊपर बंद हुआ।

सूचीबद्ध कंपनी के कुल शेयर बाजार में ₹432.56 लाख करोड़ का नुकसान हुआ।
तो शेयर बाजार में क्यों आई गिरावट? यहां जानें 5 बड़ी वजहें
1. टैरिफ वॉर की चिंताएं फिर बढ़ीं
एक बार फिर ट्रेड वॉर की आपदा ने बाजार को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने स्टील और एल्युमीनियम पर अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में स्टैंड लिया है। भारत ने बदले में जवाबी शुल्क लगाने का प्रस्ताव दिया है।
इस खबर से चिंता यह है कि अगर भारत और अमेरिका के बीच व्यापार मजबूत और बड़ा होता है, तो इसका भारतीय भागीदारी और निवेश भावना पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
2. घोषणा4% की तेज तेजी के बाद रिकवरी
सोमवार को जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव में थोड़ी बढ़ोतरी हुई थी, तब शेयर 4% की बड़ी माइक्रोकैप पर था। इस तेजी के बाद मंगलवार को बिकवाली की लहर चली।
जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ एडवाइजर स्ट्रैटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार ने कहा, “सोमवार को निफ्टी में तेजी मुख्य रूप से शॉर्ट-कवरेज और हाई नेट वर्थ इंडिविजुअल (एचएनआई) वी स्पेक्ट्रम के अध्ययन के कारण थी। अधिकांश प्रतिभागियों की भागीदारी सीमित रही, जो दर्शाता है कि यह तेजी टिकाऊ नहीं थी।”
इस प्रकार आज की गिरावट को एक सामान्य तकनीकी सुधार माना जा सकता है।
3. अमेरिका-चीन व्यापार समझौता
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और चीन के बीच व्यापार समझौता भी भारतीय शेयर बाजार के लिए चिंता का कारण बन रहा है।
निवेशकों का मानना है कि अगर अमेरिका और चीन के बीच व्यापार समझौता मजबूत होता है, तो वैश्विक निवेशकों का रुख फिर से ‘चीन में निवेश करें, भारत को बेचें’ की दिशा में हो सकता है। इससे भारत से विदेशी संस्थानों का प्रवाह बढ़ सकता है।
वी.के. विजयकुमार ने कहा, “इससे भारत में बिकवाली की लहर आ सकती है, जिससे बाजार दबाव और स्थिरता में रहेगा।”
4. भारत-पाक तनाव अभी खत्म नहीं हुआ है
हालांकि सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान को इस देश को बदनाम करने की चेतावनी दी, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
मोदी के भाषण के तुरंत बाद जम्मू-कश्मीर के सांबा इलाके में ब्लैकआउट रात 10 से 12 बजे तक हो गया, ब्लैकआउट चौथे दिन भी जारी रहा।
इससे संकेत मिलता है कि जमीनी हालात अभी भी नमूने हो सकते हैं और कोई भी नई घटना बाजार को और दबाव में डाल सकती है।
5. नए विश्वविद्यालयों की कमी
बाजार सिद्धांत कहता है कि घरेलू शेयर बाजार में कोई नया लेबल नहीं है, जो इसे ऊपर की ओर खींचता हो।
Q1FY26 की आय में सुधार और भारतीय उद्योगों की खबरें पहले ही बाजार में शामिल (कीमत तय) हो चुकी हैं। ऐसे में अब अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का ध्यान मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों की ओर जा रहा है, जहां उन्हें ज्यादा रिटर्न की उम्मीद है।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि स्ट्रेटमिक स्पेक्ट्रम की यह रणनीति जोखिम भरी हो सकती है, क्योंकि कई बार वे कंपनी की मजबूती और सुधार की गुणवत्ता को हल्के में ले लेते हैं।
विजयकुमार ने कहा, “कोविड के बाद शेयर बाजार में आए कई नए लोगों को अभी भी उचित मूल्यांकन की सही जानकारी नहीं है, जिससे उनके निवेश को भागीदारी और भागीदारी दी जा सके।”
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Author: kamalkant
कमल कांत सिंह एक उत्साही पत्रकार और लेखक हैं, जिन्हें समाचार और कहानी कहने का गहरा जुनून है। कई वर्षों के अनुभव के साथ, वे सामाजिक मुद्दों, संस्कृति और समसामयिक घटनाओं पर गहन विश्लेषण और आकर्षक लेखन के लिए जाने जाते हैं। कमल का उद्देश्य अपने लेखन के माध्यम से सच्चाई को उजागर करना और पाठकों को प्रेरित करना है। उनकी लेखनी में स्पष्टता, विश्वसनीयता और मानवीय संवेदनाओं का समावेश होता है, जो उन्हें एक विशिष्ट आवाज प्रदान करता है।







