पुणे-दौंड शटल ट्रेन में आग का भयावह दृश्य

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पुणे-दौंड शटल ट्रेन में आग का भयावह दृश्य: यात्रियों में दहशत,जली हुई बीड़ी बनी वजह – 55 वर्षीय यात्री गिरफ्तार

यावत (पुणे): महाराष्ट्र में ट्रेन यात्रियों की सुरक्षा पर एक बार फिर सवाल उठे, जब पुणे-दौंड शटल ट्रेन के शौचालय में अचानक आग लग गई, जिससे यात्रियों में भय की लहर दौड़ गई। इस घटना को अब मीडिया में भी “पुणे शटल ट्रेन में आग” के रूप में वर्णित किया जा रहा है। रेलवे पुलिस और फायर ब्रिगेड की त्वरित कार्रवाई के कारण एक बड़ा हादसा टल गया, लेकिन यह घटना रेलवे सुरक्षा मानकों की समीक्षा का कारण बनी हुई है।

पुणे-दौंड शटल ट्रेन में आग

 

 

 

 

घटना का पूरा क्रम

सोमवार सुबह करीब 8 बजे जब पुणे-दौंड शटल ट्रेन यवत स्टेशन से करीब एक किलोमीटर दूर थी, तो अचानक ट्रेन के शौचालय से धुआं निकलने लगा। जैसे ही यात्रियों ने धुआं देखा, उन्हें संदेह हुआ कि आग जैसी खतरनाक स्थिति पैदा हो रही है। जांच में पता चला कि एक यात्री ने बीड़ी पीकर शौचालय के कूड़ेदान में फेंक दी थी। डस्टबिन में पहले से ही कागज, ताले और अन्य कचरा रखा हुआ था, जिसने आग पकड़ ली। देखते ही देखते शौचालय धुएं से भर गया और आग भड़कने लगी।

यात्रियों में दहशत

धुआं और आग की लपटें देखकर पुणे-दौंड शटल ट्रेन के यात्री घबरा गए। शौचालय का दरवाजा अंदर से बंद होने के कारण एक यात्री अंदर फंस गया था। यात्रियों ने मिलकर शीशा तोड़कर दरवाजा खोला और यात्री को सुरक्षित बाहर निकाला। इस बीच यात्रियों ने पुणे शटल ट्रेन में आग लगने की सूचना रेलवे पुलिस और फायर ब्रिगेड को दी। तकनीकी कर्मचारियों और फायर ब्रिगेड की टीम को आग बुझाने में करीब पांच मिनट लगे। अच्छी बात यह रही कि ट्रेन में ज्यादा भीड़ नहीं थी, इसलिए यात्री सुरक्षित बाहर निकल आए।

संदिग्ध यात्री हिरासत में लिया गया

रेलवे पुलिस का कहना है कि अभी तक मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह घटना जानबूझकर की गई शरारत नहीं बल्कि लापरवाही का नतीजा है। 55 वर्षीय एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है, जो प्रारंभिक तौर पर मानसिक रूप से अस्थिर बताया जा रहा है। रेलवे पुलिस ने उसे यवत स्टेशन पर पकड़ लिया और आगे की पूछताछ के लिए सौंप दिया। यह व्यक्ति मध्य प्रदेश का रहने वाला है और इस पर “पुणे शटल ट्रेन आग” जैसी दुर्घटना को अंजाम देने का आरोप है। रेलवे पुलिस की टीम मामले की गहनता से जांच कर रही है, ताकि घटना में किसी भी तरह की साजिश या लापरवाही के पीछे की सच्चाई सामने आ सके। — यवत स्टेशन पर ट्रेन रुकने का कारण घटना के बाद सुरक्षा कारणों से पुणे-दौंड शटल ट्रेन को करीब 20 मिनट तक यवत स्टेशन पर रोका गया। इस दौरान फायर ब्रिगेड को बुलाया गया और तकनीकी कर्मचारियों ने कोच की तकनीकी जांच की। यवत स्टेशन पर सेना की तरह तैनात फायर कर्मियों ने जल्द ही आग पर काबू पा लिया और कोच को साफ करवाया। रेलवे के एक प्रवक्ता ने कहा, “ट्रेन का शेड्यूल थोड़ा विलंबित था, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई।” उन्होंने यह भी बताया कि अधिकारियों को तुरंत सूचित किया गया और “पुणे शटल ट्रेन आग” की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए फायर ब्रिगेड तीन मिनट के भीतर मौके पर पहुंच गई। —

दौंड-पुणे शटल सेवा का परिचय

पुणे-दौंड शटल ट्रेन एक डीजल इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (डीईएमयू) ट्रेन है जो प्रतिदिन दौंड और पुणे के बीच लगभग 75 किलोमीटर की दूरी तय करती है। यह ट्रेन रास्ते में सात स्टेशनों से होकर गुजरती है – दौंड कैंट, जंगली, कोंधना, यवत, वदुजा, खडकीश्वर और अंत में पुणे जंक्शन। इस शटल ट्रेन में प्रतिदिन कई सरकारी और निजी क्षेत्र के कर्मचारी, छात्र और व्यवसायी यात्रा करते हैं।

यह सेवा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत रखती है और ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों को सीधे जोड़ती है। ऐसे में “पुणे शटल ट्रेन आग” जैसी घटनाएं न केवल यात्रियों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करती हैं, बल्कि रेल नेटवर्क की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाती हैं।

आग की भयावहता और निवारक उपाय

अगर समय रहते आग बुझाने की कार्रवाई नहीं की गई होती, तो पुणे-दौंड शटल ट्रेन में लगी यह आग पूरे कोच को अपनी चपेट में ले सकती थी। यात्रियों की जान को गंभीर खतरा हो सकता था और बड़ा विस्फोट होने की भी आशंका थी। आग पर काबू पाने के बाद रेलवे प्रशासन ने चेतावनी जारी की है कि:

ट्रेन में धूम्रपान पूरी तरह प्रतिबंधित है। बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू उत्पाद खुले में या कूड़ेदान में न फेंके। कोच में प्रवेश करने से पहले सुनिश्चित करें कि धूम्रपान सामग्री पूरी तरह बुझ गई है। अगर कहीं आग या धुआं दिखे तो तुरंत किनारे हट जाएं और रेलवे पुलिस को सूचित करें।

रेलवे के प्रवक्ता ने कहा, “यात्रियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। ‘पुणे ट्रेन आग’ जैसी घटनाओं से बचने के लिए हम सभी को मिलकर सतर्क रहना होगा।”

विस्तृत जांच जारी है

रेलवे पुलिस मामले की तह तक जाने के लिए अभी भी विस्तृत जांच कर रही है। आरोपी की मानसिक स्थिति और सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है। यात्रियों के बयानों और तकनीकी रिपोर्ट की समीक्षा की जा रही है। प्रारंभिक रिपोर्ट में पाया गया कि ट्रेन के डस्टबिन में कई दिनों का कचरा जमा था, जिससे आग लगना आसान हो गया।

जांच अधिकारी ने कहा, “हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि भविष्य में ‘पुणे-दौंड शटल ट्रेन’ जैसी घटनाओं से बचने के लिए रेलवे सुरक्षा मानकों को और कड़ा किया जाए। यदि कोई तकनीकी चूक पाई जाती है, तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”

निष्कर्ष : सुरक्षा सर्वोपरि है

‘पुणे-दौंड शटल ट्रेन’ में “पुणे ट्रेन आग” की यह घटना जागरूकता का संदेश है कि यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों दोनों को नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। केवल तकनीकी व्यवस्था ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

रेलवे प्रशासन ने आग लगने के तुरंत बाद अपनी तत्परता दिखाई, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि आग जैसे खतरों से निपटने के लिए हर ट्रेन के कोच में बुनियादी अग्निशमन किट उपलब्ध हों, समय-समय पर डस्टबिन साफ किए जाएं और यात्रियों को सुरक्षा दिशा-निर्देशों के बारे में नियमित रूप से जानकारी दी जाए।

इस प्रकार, “पुणे-दौंड शटल ट्रेन” में आग की घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा निर्देशों का पालन किए बिना रेल यात्रा का सुखद अनुभव संभव नहीं है। हम सभी को इस पर मिलकर काम करना होगा ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

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Swatantra Vani
Author: Swatantra Vani

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