‘नरेंद्र-सरेंडर’ टिप्पणी पर शशि थरूर की प्रतिक्रिया : “अगर पाकिस्तान आतंकवाद की भाषा बोलेगा, तो भारत बल की भाषा बोलेगा “

नई दिल्ली/वाशिंगटन
‘नरेंद्र-सरेंडर’ टिप्पणी को लेकर भारतीय राजनीति में नया तूफान खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आह्वान के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर “सरेंडर” करने का आरोप लगाने से भारतीय राजनीति में भूचाल आ गया है। इस पूरे विवाद के बीच अमेरिका में मौजूद कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने संतुलित लेकिन स्पष्ट बयान देकर सार्वजनिक मंच पर पार्टी के भीतर मतभेदों को संभालने की कोशिश की है।
शशि थरूर का बयान: पाकिस्तान के आतंकवाद का जवाब बल से दें
अमेरिका में ऑपरेशन सिंदूर प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे शशि थरूर से एक अमेरिकी पत्रकार ने पूछा कि राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए इस्तेमाल किए गए “नरेंद्र-सरेंडर” शब्द पर उनकी क्या राय है।
शशि थरूर ने पहले मुस्कुराते हुए जवाब दिया और फिर कहा: “जब तक पाकिस्तान आतंकवाद की भाषा बोलता रहेगा, भारत बल की भाषा में जवाब देता रहेगा। हमें किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की जरूरत नहीं है। अगर पाकिस्तान आतंकी ढांचे को खत्म कर दे, तो बातचीत संभव है।”
ऑपरेशन सिंदूर प्रतिनिधिमंडल का यह अमेरिकी दौरा खास तौर पर वैश्विक मंच पर पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ भारत के मजबूत रुख को पेश करने के लिए किया जा रहा है।
अमेरिका की भूमिका और भारत की विदेश नीति
राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप के एक कॉल पर “नरेंद्र-सरेंडर” किया। उन्होंने इसकी तुलना 1971 के युद्ध में इंदिरा गांधी के रवैये से की, जब अमेरिका का सातवां बेड़ा भारत की ओर बढ़ा था, लेकिन भारत अपनी रणनीति से नहीं डिगा।
इस पर शशि थरूर ने कहा : “अगर अमेरिका ने पाकिस्तान को रुकने के लिए कहा और भारत भी तैयार है, तो यह एक अच्छा प्रयास था। लेकिन भारत को अब किसी को यह कहने की जरूरत नहीं पड़ी कि युद्ध बंद करो। जब पाकिस्तान रुकता है, तो भारत रुकता है।”
शशि थरूर ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की विदेश नीति अब आत्मनिर्भर और स्पष्ट है। ऑपरेशन सिंदूर प्रतिनिधिमंडल का लक्ष्य अमेरिका को यह बताना भी है कि भारत अब पाकिस्तानी आतंकवाद के आगे झुकने वाला नहीं है।
राहुल गांधी का आरोप : प्रधानमंत्री ने डोनाल्ड ट्रंप के प्रति दिखाया झुकाव
भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा: “डोनाल्ड ट्रंप ने जब फोन किया तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘नरेंद्र-सरेंडर’। उन्होंने ‘यस सर’ कहकर अमेरिका के प्रति झुकाव दिखाया। 1971 में इंदिरा गांधी ने कहा था कि जो करना है करो, हम पीछे नहीं हटेंगे। कांग्रेस और भाजपा में यही फर्क है।”
राहुल गांधी ने आगे कहा: “इतिहास गवाह है कि भाजपा और आरएसएस का चरित्र हमेशा से सरेंडर का रहा है। जबकि कांग्रेस के नेतृत्व में भारत ने अमेरिका जैसी महाशक्ति से भी टकराव का सामना किया है।”
भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया : राहुल का बयान राष्ट्रविरोधी
भाजपा ने राहुल गांधी की नरेंद्र-सरेंडर टिप्पणी को शर्मनाक बताया और कहा कि इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नहीं बल्कि भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है। भाजपा प्रवक्ताओं ने कहा कि यह बयान विदेश नीति को कमजोर करता है और पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ भारत के दृढ़ रुख को धूमिल करता है।भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस हमेशा से सेना और कूटनीति के मामलों में राजनीति करती रही है और अब भी वही कर रही है।
ऑपरेशन सिंदूर प्रतिनिधिमंडल और शशि थरूर की भूमिका
ऑपरेशन सिंदूर प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे शशि थरूर इस समय अमेरिका में हैं और कई वरिष्ठ सांसदों, रणनीतिक विशेषज्ञों और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात कर रहे हैं। इस प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य अमेरिका और वैश्विक समुदाय के सामने पाकिस्तान आतंकवाद को साबित करना है।
शशि थरूर ने कहा: “हम अमेरिका के राष्ट्रपति और उनके पद का सम्मान करते हैं, लेकिन भारत को किसी की मध्यस्थता की जरूरत नहीं है। हमने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब आतंकवाद के आगे नहीं झुकेगा।” यह बयान भारत द्वारा वर्तमान में अपनाई जा रही विदेश नीति के प्रति आत्मविश्वासपूर्ण दृष्टिकोण को दर्शाता है।
कांग्रेस में मतभेद या रणनीतिक संतुलन?
राहुल गांधी और शशि थरूर के बयानों पर बहस तेज हो गई है कि क्या यह कांग्रेस के भीतर मतभेदों को दर्शाता है या फिर यह रणनीतिक रूप से सुनियोजित दोहरा दृष्टिकोण है। जहां राहुल गांधी सीधे तौर पर सरकार की विदेश नीति पर हमला करते हैं और सवाल उठाते हैं, वहीं शशि थरूर विदेश में संयमित और कूटनीतिक भाषा में भारत का पक्ष मजबूती से रखते हैं।
निष्कर्ष: ‘नरेंद्र-समर्पण’ टिप्पणी के बाद गरमाई राजनीति
राहुल गांधी की “नरेंद्र-समर्पण” टिप्पणी और शशि थरूर की प्रतिक्रियाओं के बाद यह मामला अब सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी नहीं रह गया है, बल्कि यह एक ऐसी बहस बन गई है जो भारत की विदेश नीति, पाकिस्तानी आतंकवाद के खिलाफ रुख और अमेरिका के साथ संबंधों की दिशा तय करती है। ऑपरेशन सिंदूर प्रतिनिधिमंडल का अमेरिका दौरा और उसमें शशि थरूर की भागीदारी यह संकेत देती है कि कांग्रेस अब खुद को आंतरिक राजनीति तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अपनी राय स्पष्ट रूप से व्यक्त कर रही है।
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Author: kamalkant
कमल कांत सिंह एक उत्साही पत्रकार और लेखक हैं, जिन्हें समाचार और कहानी कहने का गहरा जुनून है। कई वर्षों के अनुभव के साथ, वे सामाजिक मुद्दों, संस्कृति और समसामयिक घटनाओं पर गहन विश्लेषण और आकर्षक लेखन के लिए जाने जाते हैं। कमल का उद्देश्य अपने लेखन के माध्यम से सच्चाई को उजागर करना और पाठकों को प्रेरित करना है। उनकी लेखनी में स्पष्टता, विश्वसनीयता और मानवीय संवेदनाओं का समावेश होता है, जो उन्हें एक विशिष्ट आवाज प्रदान करता है।







