Varanasi Navratri उत्सव : काजीसराय में सजाया गया भव्य दुर्गा पंडाल, हजारों भक्तों के जुटने की उम्मीद
Varanasi News : शारदीय Navratri के पावन अवसर पर काजीसराय बाजार में दुर्गा पूजा की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। पिछले पंद्रह दिनों से दुर्गा पूजा समिति के सदस्य और स्थानीय लोग मिलकर मंदिर स्वरूप पंडाल का निर्माण कर रहे थे। अब यह पंडाल भक्तों के स्वागत के लिए पूरी तरह से सज-धज कर तैयार है।
सप्तमी तिथि से यहां 9 फीट ऊंची मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। यह प्रतिमा 27 सितंबर से तीन दिनों तक भक्तों के दर्शन के लिए विराजमान रहेगी। दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष विकास पटेल ने बताया कि यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और हर साल भक्त बड़ी श्रद्धा के साथ यहां जुटते हैं।

विशेष पूजन और सांस्कृतिक आयोजन
समिति के सदस्य मनोज विश्वकर्मा, सुरज कन्नौजिया, हवलदार पटेल और विवेक पटेल ने जानकारी दी कि सप्तमी से नवमी तक प्रतिदिन विशेष पूजन-अर्चन, भजन-कीर्तन और भव्य आरती का आयोजन होगा। नवमी के बाद प्रतिमा का विसर्जन काजीसराय गांव के तालाब में किया जाएगा।
मेले जैसा माहौल
पूजा पंडाल के आसपास हर साल की तरह इस बार भी मेले जैसा माहौल होगा। भटौली, गोकुलपुर, सुरवा, सेहमलपुर, गड़वा, बालीपुर, चंदीपट्टी, बिरापट्टी, देवनाथपुर, करोमा और काजीसराय सहित आसपास के गांवों से हजारों की संख्या में लोग यहां मां दुर्गा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
पंडाल के बाहर झूले, खिलौनों, मिठाइयों और फलों की दुकानें सज जाएंगी, जिससे परिवारों के साथ आए लोग खरीदारी और मनोरंजन का आनंद भी ले सकेंगे।

धार्मिक आस्था और सामाजिक मेलजोल का केंद्र
स्थानीय लोगों का कहना है कि काजीसराय का दुर्गा पूजा पंडाल न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि सामाजिक मेलजोल का भी माध्यम है। यहां सभी वर्गों और आयु के लोग एकत्र होकर त्योहार की खुशी साझा करते हैं।
Varanasi News में यह आयोजन हर साल विशेष आकर्षण का केंद्र बनता है और लोगों की आस्था को और मजबूत करता है।
Navratri क्यों मनाई जाती है-
1. धार्मिक कारण
- Navratri देवी दुर्गा की उपासना का पर्व है।
- माना जाता है कि इन नौ दिनों में माता दुर्गा ने महिषासुर नामक राक्षस का वध किया था। इसलिए इसे “असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय” का प्रतीक माना जाता है।
- अलग-अलग दिनों में माता दुर्गा के नौ रूपों (शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री) की पूजा की जाती है।
2. आध्यात्मिक कारण
- यह आत्मशुद्धि और साधना का समय माना जाता है।
- उपवास, ध्यान और भक्ति से मनुष्य अपने भीतर की नकारात्मकताओं को दूर करने की कोशिश करता है।
- इसे शक्ति (ऊर्जा) की साधना भी कहा जाता है, जिससे जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता आती है।
3. सांस्कृतिक कारण
- Navratri पूरे भारत में अलग-अलग तरीकों से मनाई जाती है।
- गुजरात में गरबा और डांडिया खेला जाता है।
- पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के रूप में इसे भव्य तरीके से मनाया जाता है।
- उत्तर भारत में रामलीला और दशहरा के रूप में इसका समापन होता है।
यह पर्व सामाजिक मेलजोल, उत्सव और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखने का अवसर भी है।
संक्षेप में, Navratri शक्ति, भक्ति और संस्कृति का संगम है, जो हमें यह संदेश देती है कि जब तक हम अपने भीतर की नकारात्मकता (अहंकार, क्रोध, आलस्य आदि) को खत्म नहीं करते, तब तक सच्ची विजय संभव नहीं।
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Varanasi और काशी में नवरात्रि के समय कौन-सी खास परंपराएँ निभाई जाती हैं
Varanasi और काशी में Navratri के समय अद्भुत उत्सव और धार्मिक परंपराएँ देखने को मिलती हैं। यहां घर-घर में घटस्थापना की जाती है और नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा होती है। गंगा घाटों पर विशेष आरती और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है। सप्तमी से नवमी तक मंदिरों और पूजा पंडालों में भव्य सजावट होती है। रामलीला का मंचन काशी की Navratri की सबसे बड़ी विशेषता है, जो अयोध्या के रामकथा से जुड़ी परंपरा को जीवित रखती है। अंतिम दिन प्रतिमाओं का गंगा में विसर्जन श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बनता है।
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Author: kamalkant
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