Varanasi News : पूर्वांचल को बड़ी राहत, मंडलीय चिकित्सालय में 20 करोड़ की लागत से स्थापित होगी एमआरआई यूनिट
Varanasi : पूर्वांचल की जनता के लिए बड़ी राहत की खबर आई है। छह साल से जिस एमआरआई यूनिट का इंतजार किया जा रहा था, वह अब आखिरकार शुरू होने जा रही है। वाराणसी के मंडलीय चिकित्सालय (कबीरचौरा) में 20 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक एमआरआई मशीन स्थापित की जा रही है। इससे गरीब और मध्यमवर्गीय मरीजों को एक रुपये के पर्चे पर किफायती दरों पर जांच सुविधा उपलब्ध होगी।

छह साल का इंतजार हुआ खत्म
Varanasi मंडल में अब तक सरकारी अस्पतालों में एमआरआई जांच की कोई व्यवस्था नहीं थी। मरीजों को मजबूरन या तो बीएचयू जाना पड़ता था, जहां महीनों की वेटिंग रहती है, या फिर निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता था, जहां 15 से 20 हजार रुपये तक का खर्च उठाना पड़ता है। गरीब मरीजों के लिए यह खर्च लगभग असंभव था।
2018 में पं. दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में एमआरआई यूनिट शुरू करने की कवायद हुई थी। भवन निर्माण पर लगभग 96.81 लाख रुपये खर्च भी किए गए थे। लेकिन योजना धरातल पर नहीं उतर सकी। अब मेडिकल कॉलेज बनाने की योजना के चलते पुराने भवन को ही ध्वस्त करने की तैयारी है।
ऐसे में मंडलीय चिकित्सालय कबीरचौरा में एमआरआई यूनिट की स्थापना से न केवल वाराणसी बल्कि पूरे पूर्वांचल की जनता को सीधी राहत मिलेगी।
20 करोड़ की लागत से बनेगी यूनिट
अधिकारियों ने बताया कि यह एमआरआई मशीन तीन टेक्सला का लेटेस्ट मॉडल होगा। इसका प्रस्ताव 22 सितंबर को सीएसआर फंड से पारित कर दिया गया है। मशीन की स्थापना और संचालन की जिम्मेदारी एचएलएल कंपनी को दिए जाने पर विचार चल रहा है।
मंडलीय चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बृजेश कुमार ने बताया कि सीडीओ हिमांशु नागपाल और सीएमओ डॉ. संदीप चौधरी से सहमति के बाद इसे शुरू करने का निर्णय लिया गया है। उनका कहना है कि “पूर्वांचल के हजारों मरीजों को अब दूर-दराज अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा। यह सुविधा आमजन के लिए सुलभ और किफायती होगी।”
बीएचयू में बढ़ती वेटिंग और मरीजों की परेशानी
अगर Varanasi की बात करें तो अब तक बीएचयू ही एकमात्र सरकारी विकल्प था जहां एमआरआई जांच होती थी। लेकिन वहां मरीजों की भारी भीड़ और सीमित क्षमता के चलते कई-कई महीनों तक इंतजार करना पड़ता था। जिन मरीजों को तुरंत जांच की जरूरत होती, वे मजबूरी में निजी अस्पतालों का रुख करते थे।
इस वजह से कई बार इलाज में देरी होती और मरीजों की हालत और बिगड़ जाती थी। मंडलीय चिकित्सालय में एमआरआई मशीन लगने के बाद यह समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी।

राजनीतिक और प्रशासनिक पहल का नतीजा
इस प्रोजेक्ट को लेकर लंबे समय से जनप्रतिनिधि और मीडिया लगातार आवाज उठा रहे थे। 9 दिसंबर 2024 को उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने मंडलीय चिकित्सालय का निरीक्षण किया था। इसके बाद 17 अप्रैल 2025 को एनएचएम की एमडी और चिकित्सा स्वास्थ्य सचिव डॉ. पिंकी जोवेल ने इसे प्राथमिकता से शुरू करने का आश्वासन दिया था।
इसी के बाद से प्रशासन ने तेजी दिखाई और अब मशीन स्थापना की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
गरीब जनता को सीधा फायदा
एमआरआई यूनिट के शुरू होने से गरीब जनता को सीधा फायदा मिलेगा। जहां निजी अस्पतालों में इस जांच के लिए 15-20 हजार रुपये तक वसूले जाते हैं, वहीं अब सरकारी अस्पताल में यह सुविधा सिर्फ एक रुपये के पर्चे पर उपलब्ध होगी।
यह पहल स्वास्थ्य सेवाओं को जनता तक पहुँचाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। खासकर ग्रामीण इलाकों से वाराणसी आने वाले मरीजों के लिए यह राहत भरी खबर है।
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निष्कर्ष
पूर्वांचल की जनता के लिए यह किसी तोहफे से कम नहीं है। लंबे समय से जिस सुविधा का इंतजार था, वह अब धरातल पर उतर रही है। Varanasi में यह खबर फिलहाल चर्चा का सबसे बड़ा विषय है।
एमआरआई यूनिट का संचालन शुरू होने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। गरीब और मध्यम वर्ग के मरीज अब महंगी जांचों के बोझ से बच सकेंगे और उन्हें समय पर इलाज मिल सकेगा।
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Author: kamalkant
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