काशी (Varanasi) में नरमुंडों पर बैठकर निकलीं मां चामुंडेश्वरी

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काशी (Varanasi) में नरमुंडों पर बैठकर निकलीं मां चामुंडेश्वरी: काली के तांडव और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की झांकी ने मोह लिया मन

  1. आस्था की नगरी काशी आज भक्ति, शक्ति और संस्कृति के अद्भुत संगम का साक्षी बनी। गोवर्धन पूजा के अवसर पर निकली भव्य शोभायात्रा ने पूरे Varanasi को देवी आराधना के रंग में रंग दिया। शहर की गलियों, घाटों और प्रमुख मार्गों पर हजारों श्रद्धालु उमड़े रहे। ढोल-नगाड़ों की थाप, शंखनाद और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से वातावरण गूंज उठा।
  2. शोभायात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण रही मां चामुंडेश्वरी की झांकी, जो प्रयागराज से विशेष रूप से इस आयोजन के लिए आई थी। देवी का स्वरूप देखकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध रह गए। झांकी में मां चामुंडेश्वरी नरमुंडों पर शांत मुद्रा में विराजमान थीं, जिनके चारों ओर भूत-पिशाच नृत्य करते हुए चल रहे थे। गले में खोपड़ियों की माला और हाथों में त्रिशूल लिए देवी का रौद्र और शांत दोनों रूप एक साथ देखने को मिला। भक्तों ने पुष्पवर्षा कर माता का स्वागत किया और “जय चामुंडेश्वरी माता की” के जयकारों से वातावरण गुंजायमान कर दिया।
  3. शोभायात्रा में काली माता के नौ रौद्र रूपों की झांकी भी निकाली गई। तांडव करते कलाकारों ने मां काली के दिव्य और भयानक स्वरूप को जीवंत कर दिया। उनके नृत्य की लय, डमरू की गूंज और अग्नि की लपटों ने भक्तों को रोमांचित कर दिया। कई जगह बच्चे और महिलाएं काली माता के तांडव से मंत्रमुग्ध होकर देर तक झांकी को निहारते रहे।
  4. शोभायात्रा में वीरता और देशभक्ति की झलक भी देखने को मिली। हरियाणा के प्रसिद्ध क्लब की ओर से प्रस्तुत ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की झांकी ने देशभक्ति की भावना को चरम पर पहुँचा दिया। सेना की वर्दी में सजे कलाकारों ने भारत के सैनिकों के साहस और बलिदान का संदेश दिया। दुश्मनों पर गोलियां बरसाते कलाकारों का दृश्य इतना जीवंत था कि लोगों ने “भारत माता की जय” और “जय हिंद” के नारों से वातावरण गुंजा दिया।
  5. इसी क्रम में आल्हा और ऊदल की झांकी ने वीरता और पराक्रम का परिचय दिया। घोड़े पर सवार दोनों योद्धा अपनी विशाल सेना के साथ आगे बढ़ते दिखाई दिए। उनके साथ चल रही सैनिक टुकड़ी युद्ध के मैदान में विजय का संदेश दे रही थी। यह झांकी भारतीय इतिहास और लोककथाओं की गौरवशाली परंपरा का जीवंत प्रदर्शन थी।
  6. महाभारत के पांच पांडवों — युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल, सहदेव और भीम — की झांकी भी शोभायात्रा में आकर्षण का केंद्र रही। इन झांकियों के माध्यम से धर्म, नीति और पराक्रम का संदेश दिया गया। लोग पांडवों का स्वरूप देखकर भावविभोर हो गए और बच्चों ने उनके साथ तस्वीरें खिंचवाईं।
  7. प्रहलाद घाट के 16 कलाकारों ने इस अवसर पर विशेष नृत्य झांकी प्रस्तुत की। तीन महीनों तक लगातार अभ्यास के बाद इन कलाकारों ने आज अपनी प्रस्तुति से सभी का दिल जीत लिया। पारंपरिक संगीत और नृत्य की लय पर उनकी झांकी ने Varanasi की सांस्कृतिक आत्मा को जीवंत कर दिया। दर्शकों ने खड़े होकर तालियों से उनका स्वागत किया।
  8. शोभायात्रा का शुभारंभ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और जौनपुर की मल्हनी सीट से विधायक लक्की यादव ने किया। दोनों नेताओं ने गोवर्धन पूजा समिति के मंच पर दीप प्रज्वलित कर यात्रा को रवाना किया। मंच पर अजय राय का पारंपरिक भगवा पगड़ी पहनाकर सम्मान किया गया।
  9. Varanasi की गलियां शाम तक श्रद्धालुओं से भरी रहीं। महिलाएं सिर पर पूजा की थाल लेकर माता के दर्शन को निकलती दिखीं। कई स्थानों पर स्थानीय लोगों ने श्रद्धालुओं के लिए पानी, शरबत और प्रसाद का वितरण किया। पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे ताकि आयोजन सुचारू रूप से संपन्न हो सके।
  10. शोभायात्रा के दौरान पूरे शहर में भक्ति और उल्लास का माहौल बना रहा। घाटों पर दीप प्रज्वलित किए गए और मंदिरों में विशेष पूजन-अर्चन हुआ। लोगों ने इसे केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि काशी की परंपरा और संस्कृति का प्रतीक बताया।

मुख्य आकर्षण:

  • नरमुंडों पर विराजमान मां चामुंडेश्वरी की भव्य झांकी
  • काली माता के नौ रौद्र रूप और तांडव नृत्य
  • ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की देशभक्ति झांकी
  • आल्हा-ऊदल की वीरता और युद्ध झलक
  • महाभारत के पांडवों और प्रहलाद घाट के कलाकारों का नृत्य प्रदर्शन

काशी की यह शोभायात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं थी, बल्कि भारत की जीवंत सांस्कृतिक आत्मा का उत्सव थी। यह आयोजन एक बार फिर साबित करता है कि Varanasi केवल आस्था की नगरी नहीं, बल्कि वह भूमि है जहां भक्ति, कला, इतिहास और संस्कृति का संगम होता है।

Rajesh Srivastava
Author: Rajesh Srivastava

राजेश श्रीवास्तव एक अनुभवी और दूरदर्शी एडिटर इन चीफ हैं, जिन्हें पत्रकारिता और संपादन का गहरा अनुभव प्राप्त है। कई वर्षों की सक्रिय भूमिका के साथ, वे समाचारों की गुणवत्ता, निष्पक्षता और प्रामाणिकता बनाए रखने के लिए जाने जाते हैं। राजेश का उद्देश्य संपादकीय नेतृत्व के माध्यम से सच्ची और संतुलित जानकारी पाठकों तक पहुँचाना है। उनके मार्गदर्शन में प्रकाशित सामग्री में स्पष्टता, विश्वसनीयता और सामाजिक जिम्मेदारी का समावेश होता है, जो उन्हें एक प्रभावशाली और विशिष्ट पहचान प्रदान करता है।