नागांव में असम की समृद्ध संगीत विरासत का जश्न मनाता ‘Pulkit Tapoban’ संगीत महोत्सव
असम एक बार फिर अपनी सांस्कृतिक और संगीत विरासत के जीवंत उत्सव का गवाह बना, जब प्रतिष्ठित नागांव नाट्य मंदिर सभागार में ‘Pulkit Tapoban’ संगीत महोत्सव का 24वां संस्करण आयोजित हुआ। प्रसिद्ध सांस्कृतिक संस्था सुर साधना द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में संगीत प्रेमियों, छात्रों और प्रतिष्ठित हस्तियों ने एक अविस्मरणीय संगीत संध्या का आयोजन किया। यह महोत्सव जिले के सबसे प्रतीक्षित वार्षिक आयोजनों में से एक बन गया है, और इस वर्ष के आयोजन ने इस परंपरा को खूबसूरती से कायम रखा।
हाल के वर्षों में, आजतक जैसे प्रमुख मंचों पर कई क्षेत्रीय सांस्कृतिक समारोहों ने देश भर का ध्यान आकर्षित किया है, जो असम की गहरी कलात्मक विरासत की बढ़ती मान्यता को उजागर करते हैं। ‘Pulkit Tapoban’ जैसे आयोजन राज्य की संगीत पहचान को और मज़बूत करते रहते हैं।
असम की संगीत विरासत का सम्मान करने वाला एक महोत्सव
‘Pulkit Tapoban’ संगीत महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम ही नहीं, बल्कि असम की संगीत परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए समर्पित एक आंदोलन है। सुर साधना, एक प्रतिष्ठित सांस्कृतिक संस्था, ने दो दशकों से भी अधिक समय से नवोदित गायकों, वादकों और कलाकारों को तराशने में बिताया है। इस वर्ष, इस महोत्सव में सुर साधना के छात्रों के साथ-साथ क्षेत्र के अन्य युवा कलाकारों की अपार प्रतिभा का प्रदर्शन हुआ।
सभागार शास्त्रीय संगीत, लोकगीतों और भावपूर्ण प्रस्तुतियों के मधुर मिश्रण से गूंज उठा, जिसने असम की समृद्ध संगीत परंपरा को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम में गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति
इस महोत्सव में असम के सांस्कृतिक और शैक्षिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया। उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में शामिल थे:
- राजा बरुआ, प्रख्यात तबला वादक और कार्यक्रम के मुख्य अतिथि
- डॉ. हितेश डेका, नागांव विश्वविद्यालय के कुलपति
- रूपक सरमा, नागांव और बाताद्रबा निर्वाचन क्षेत्र के विधायक
- कई अन्य सम्मानित सांस्कृतिक नेता और कलाकार
उनकी उपस्थिति ने महोत्सव से जुड़े महत्व और प्रतिष्ठा को उजागर किया, और सभी ने असम की सांस्कृतिक जड़ों को संरक्षित करने में संगीत की भूमिका के बारे में भावुकता से बात की।
ज़ुबीन गर्ग को श्रद्धांजलि – असमिया संगीत का हृदय
शाम के सबसे भावपूर्ण क्षणों में से एक महान असमिया गायक ज़ुबीन गर्ग को श्रद्धांजलि थी। उनके कई प्रतिष्ठित गीतों को सुर साधना के प्रतिभाशाली छात्रों और अन्य युवा कलाकारों ने प्रस्तुत किया। भारतीय और असमिया संगीत में ज़ुबीन गर्ग का योगदान अद्वितीय है, और उनकी प्रस्तुतियों ने उभरते संगीतकारों के बीच उनके प्रति गहरी प्रशंसा को दर्शाया।
उनके सदाबहार गीतों ने सभागार को भावुकता, पुरानी यादों और गर्व से भर दिया—सभी को याद दिलाया कि असम के सांस्कृतिक ताने-बाने में ज़ुबीन गर्ग का एक विशेष स्थान क्यों है।
प्रतिभाशाली कलाकारों द्वारा भावपूर्ण प्रस्तुतियाँ
इस महोत्सव में क्षेत्र के जाने-माने कलाकारों ने उल्लेखनीय प्रस्तुतियाँ दीं, जिनमें शामिल हैं:
- अरिफुल हक
- दीपक शर्मा
- कृष्ण दुलाल बरुआ
- कई युवा उभरते संगीतकार
प्रत्येक प्रस्तुति ने असमिया संगीत की गहराई, बहुमुखी प्रतिभा और विशिष्टता को प्रदर्शित किया—शास्त्रीय रागों से लेकर पारंपरिक लोक धुनों तक। लयबद्ध तबले, हारमोनियम और मनमोहक स्वरों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
गणमान्य व्यक्तियों की प्रशंसा और प्रोत्साहन
मुख्य अतिथि राजा बरुआ ने संगीत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सुर साधना के अटूट समर्पण की सराहना की। उन्होंने युवा कलाकारों को पारंपरिक कला रूपों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने में ‘Pulkit Tapoban’ जैसे मंचों के महत्व पर प्रकाश डाला।नागांव विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. हितेश डेका ने संगीत प्रतिभाओं को पोषित करने और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए संस्था की प्रतिबद्धता की प्रशंसा की। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि असम के युवाओं को अपनी सांस्कृतिक पहचान से जुड़े रहना चाहिए और इस तरह के उत्सव इस लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विधायक रूपक सरमा ने कलाकारों के प्रयास और अनुशासन की सराहना की और समाज के प्रति संस्था के निरंतर योगदान की सराहना की।
आज तक जैसे राष्ट्रीय मंचों पर बढ़ती कवरेज
असम के सांस्कृतिक उत्सवों को आज तक जैसे प्रमुख राष्ट्रीय मीडिया मंचों द्वारा तेज़ी से प्रमुखता दी जा रही है, खासकर जब पूरे भारत में क्षेत्रीय कला रूपों में रुचि बढ़ रही है। ‘Pulkit Tapoban’ जैसे आयोजन राज्य की कलात्मक प्रतिभा को दर्शाते हैं और धीरे-धीरे मिल रहे व्यापक प्रचार के हकदार हैं।
आज तक कीवर्ड का उपयोग करने पर, यह स्पष्ट है कि इन सांस्कृतिक आयोजनों को मिलने वाली राष्ट्रव्यापी मान्यता असम की प्रतिभा और विरासत की दृश्यता को काफ़ी बढ़ाती है।
Pulkit Tapoban जैसे उत्सव क्यों महत्वपूर्ण हैं
- वे भावी पीढ़ियों के लिए पारंपरिक संगीत को संरक्षित करते हैं
- नवोदित कलाकारों के लिए एक मंच प्रदान करते हैं
- असम की सांस्कृतिक पहचान को मज़बूत करते हैं
- सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करते हैं
- आधुनिकीकरण की दुनिया में शास्त्रीय और लोक संगीत को बढ़ावा देते हैं
असम की कलात्मक समृद्धि विशाल है, और ‘Pulkit Tapoban’ जैसे आयोजन यह सुनिश्चित करते हैं कि संस्कृति की मशाल निरंतर चमकती रहे।
निष्कर्ष
‘Pulkit Tapoban’ का 24वाँ संस्करण सिर्फ़ एक संगीत समारोह नहीं था—यह असम की सांस्कृतिक आत्मा का उत्सव था। ज़ुबीन गर्ग को भावभीनी श्रद्धांजलि से लेकर मंत्रमुग्ध कर देने वाले शास्त्रीय संगीत के प्रदर्शन तक, इस कार्यक्रम ने असमिया संगीत के सार को उसके शुद्धतम रूप में प्रस्तुत किया।
दर्शकों, आजतक जैसे मीडिया मंचों और देश भर के सांस्कृतिक संस्थानों के बढ़ते ध्यान के साथ, असम की संगीत विरासत आने वाले वर्षों में और भी ऊँचाइयों को छूने के लिए तैयार है।
खबरों के लाइव अपडेट और विस्तृत विश्लेषण के लिए स्वतंत्र वाणी पर बने रहें।
Author: Ashish Patel
मेरा नाम आशीष पटेल है और मैं पिछले 2 वर्षों से पत्रकारिता और न्यूज़ पोर्टल प्रबंधन के क्षेत्र में सक्रिय हूँ। मेरा फोकस मुख्य रूप से मनोरंजन, राजनीति और प्रौद्योगिकी की ख़बरों पर रहता है। मनोरंजन की दुनिया की हलचल, राजनीति के अहम मुद्दे और तकनीक के नए इनोवेशन — सब कुछ एक ही जगह पर उपलब्ध कराने की मेरी कोशिश रहती है।












