BHU में बिना दर्द, बिना बायोप्सी लिवर की जांच: जल्द शुरू होगी इलास्टोग्राफी तकनीक, अब मिनटों में मिलेगी सटीक रिपोर्ट
काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) अब एक और बड़ी चिकित्सा सुविधा से लैस होने जा रहा है। यहां के गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग में अब लिवर और पाचन तंत्र की बीमारियों की जांच के लिए एक नई अत्याधुनिक तकनीक शुरू की जा रही है, जिसका नाम है ‘लाइनर ईयूएस स्कोप इलास्टोग्राफी’ (Linear EUS Scope Elastography)। यह तकनीक पूरी तरह से बिना दर्द और बिना बायोप्सी के शरीर के अंदर की गंभीर बीमारियों की सटीक जांच करने में सक्षम है।
पहले, मरीजों को लिवर या अन्य अंगों की बीमारी का पता लगाने के लिए बायोप्सी करानी पड़ती थी, जिसमें सुई के जरिए शरीर के ऊतक निकालकर जांच की जाती थी। यह प्रक्रिया न केवल दर्दनाक और जोखिमभरी होती थी, बल्कि रिपोर्ट आने में भी कई दिन लग जाते थे। अब BHU में यह परेशानी खत्म होने जा रही है, क्योंकि इस नई मशीन के जरिए डॉक्टर ऊतकों की कठोरता, रक्त प्रवाह और अंगों की संरचना का अध्ययन केवल कुछ मिनटों में कर सकेंगे।

नई तकनीक से बदल जाएगी जांच की तस्वीर
BHU के आईएमएस निदेशक प्रो. एस. एन. संखवार के अनुसार, “एम्स लाइक सुविधा” के तहत यह आधुनिक मशीन जल्द ही संस्थान में लगाई जा रही है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड सिस्टम का हिस्सा है, जिसमें इलास्टोग्राफी (Elastography) और कलर डॉप्लर (Color Doppler) दोनों फीचर शामिल हैं।
इलास्टोग्राफी तकनीक से डॉक्टर ऊतकों की कठोरता माप सकते हैं। इससे यह निर्धारित किया जा सकता है कि लिवर या अन्य अंगों में फाइब्रोसिस (Fibrosis) या सिरोसिस (Cirrhosis) जैसी गंभीर बीमारियाँ विकसित हो रही हैं या नहीं। जबकि कलर डॉप्लर मोड से अंगों में रक्त प्रवाह की स्थिति का पता लगाया जा सकता है, जो कई बीमारियों के निदान में अहम भूमिका निभाता है।
पहले जहां बायोप्सी के लिए कई दिनों का इंतजार करना पड़ता था, वहीं अब इस तकनीक से रोग की सटीक जानकारी मिनटों में मिल जाएगी। यह मशीन न केवल समय बचाएगी बल्कि मरीजों की पीड़ा और जोखिम दोनों को कम करेगी।
डॉक्टरों के लिए नया युग, मरीजों को बड़ी राहत
BHU के गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि इस मशीन के आने से जांच की सटीकता कई गुना बढ़ जाएगी। अब डॉक्टर एक ही बार में तीन महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त कर सकेंगे –
- ऊतक की संरचना,
- उसकी कठोरता,
- और रक्त प्रवाह की स्थिति।
इससे लिवर और पैंक्रियाज (Pancreas) से जुड़ी बीमारियों जैसे कि फैटी लिवर, हेपेटाइटिस, सिरोसिस, ट्यूमर और पाचन तंत्र की अन्य जटिल समस्याओं का प्रारंभिक चरण में ही पता लगाया जा सकेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, कई बार लिवर में बीमारी का पता तब लगता है जब वह गंभीर अवस्था में पहुँच चुकी होती है। लेकिन इलास्टोग्राफी तकनीक से यह खतरा काफी हद तक कम हो जाएगा क्योंकि यह शुरुआती स्टेज में ही फाइब्रोसिस या सूजन के संकेत पकड़ लेती है।

शोध कार्यों के लिए भी उपयोगी होगी मशीन
BHU न केवल चिकित्सा सेवा का बड़ा केंद्र है, बल्कि अनुसंधान (Research) के क्षेत्र में भी अग्रणी संस्थानों में गिना जाता है। इस नई मशीन की मदद से डॉक्टर और शोधकर्ता अब लिवर और पाचन तंत्र की बीमारियों पर गहन अध्ययन कर सकेंगे।
इससे न केवल मरीजों के इलाज में सुधार होगा बल्कि भविष्य में नई उपचार विधियों और दवाओं के विकास में भी सहायता मिलेगी। आने वाले महीनों में इस तकनीक का औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा, जिसके बाद पूर्वांचल और पूर्वी उत्तर प्रदेश के हजारों मरीजों को इसका लाभ मिलेगा।
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स्वतंत्र वाणी न्यूज़ के अनुसार, मरीजों के लिए बड़ी सौगात
स्वतंत्र वाणी न्यूज़ रिपोर्ट्स के मुताबिक, BHU में यह मशीन लगने के बाद यह पूर्वांचल का पहला ऐसा सरकारी केंद्र होगा, जहां बिना दर्द और बिना बायोप्सी के इतनी उन्नत जांच सुविधा उपलब्ध होगी।
इससे न केवल वाराणसी, मिर्जापुर, सोनभद्र, गाजीपुर और आजमगढ़ के मरीजों को राहत मिलेगी बल्कि बिहार और मध्य प्रदेश से भी मरीज यहां जांच के लिए आ सकेंगे।
BHU प्रशासन का कहना है कि यह सुविधा जल्द ही पूरी तरह से चालू कर दी जाएगी। जैसे ही मशीन का इंस्टॉलेशन और ट्रायल पूरा होगा, लाइनर ईयूएस स्कोप इलास्टोग्राफी आम मरीजों के लिए सुलभ होगी।
स्वतंत्र वाणी के उपसंहारिक शब्द
BHU का यह कदम चिकित्सा क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगा। अब मरीजों को न सुई चुभेगी, न दर्द सहना पड़ेगा — और न ही रिपोर्ट आने में लंबा इंतजार करना होगा।
बिना दर्द, बिना बायोप्सी की जांच से BHU वाराणसी ने चिकित्सा सुविधा के नए युग की शुरुआत कर दी है।
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Author: kamalkant
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