New Year का तोहफा : नमो घाट पर अब सुबह भी होगी गंगा आरती

New Year का तोहफा: नमो घाट पर अब सुबह भी होगी गंगा आरती, काशी में धार्मिक पर्यटन को मिलेगा नया आयाम

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New Year का तोहफा: नमो घाट पर अब सुबह भी होगी गंगा आरती, काशी में धार्मिक पर्यटन को मिलेगा नया आयाम

New Year के मौके पर काशीवासियों और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक सुखद खबर है। अब दशाश्वमेध घाट और अस्सी घाट की तर्ज पर namo ghaat पर भी सुबह की गंगा आरती शुरू होने जा रही है। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने इस दिशा में निर्णय लेते हुए जनवरी से नमो घाट पर प्रातःकालीन गंगा आरती कराने की व्यवस्था की है। इससे न केवल श्रद्धालुओं की आस्था को नया स्वरूप मिलेगा, बल्कि काशी के धार्मिक पर्यटन को भी और मजबूती मिलेगी।

New Year से होगी नई शुरुआत

नमो घाट पर सुबह की गंगा आरती की शुरुआत को New Year का खास तोहफा माना जा रहा है। मंदिर न्यास की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, इस सप्ताह से सुबह की आरती का अभ्यास भी शुरू करा दिया गया है, ताकि नियमित आरती में किसी प्रकार की कमी न रहे। अब तक नमो घाट पर केवल सायंकालीन गंगा आरती होती थी, लेकिन सुबह की आरती शुरू होने से श्रद्धालुओं को मां गंगा की आराधना का एक और अवसर मिलेगा।

श्रद्धालुओं और पर्यटकों की बढ़ेगी संख्या

New Year का तोहफा: नमो घाट पर अब सुबह भी होगी गंगा आरती, काशी में धार्मिक पर्यटन को मिलेगा नया आयाम

विशेषज्ञों का मानना है कि namo ghaat पर सुबह की गंगा आरती शुरू होने से यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। सुबह के समय गंगा के शांत वातावरण में होने वाली आरती का आध्यात्मिक अनुभव अलग ही होता है। खासकर वे श्रद्धालु, जो दशाश्वमेध घाट या अस्सी घाट की भीड़ से बचना चाहते हैं, उनके लिए नमो घाट एक बेहतर विकल्प बनकर उभरेगा।

पहले से मिल रहा अच्छा प्रतिसाद

गौरतलब है कि अक्टूबर माह में नमो घाट पर गंगा आरती की शुरुआत की गई थी। इसके बाद से ही यहां श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में प्रतिदिन करीब ढाई से तीन हजार श्रद्धालु गंगा आरती में शामिल हो रहे हैं। देव दीपावली के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यहां की गंगा आरती में शामिल होना, इस घाट की महत्ता को और बढ़ाता है।

दशाश्वमेध और अस्सी घाट की तर्ज पर व्यवस्था

अब जब namo ghaat पर सुबह और शाम दोनों समय गंगा आरती होगी, तो यह घाट भी काशी के प्रमुख आरती स्थलों की सूची में शामिल हो जाएगा। दशाश्वमेध घाट पर होने वाली भव्य आरती और अस्सी घाट की सुबह की आरती पहले से ही अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुकी हैं। नमो घाट पर भी इसी तरह की व्यवस्थाएं की जा रही हैं, ताकि श्रद्धालुओं को सुव्यवस्थित और भव्य आरती का अनुभव मिल सके।

धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

New Year का तोहफा: नमो घाट पर अब सुबह भी होगी गंगा आरती, काशी में धार्मिक पर्यटन को मिलेगा नया आयाम

नमो घाट पर सुबह की गंगा आरती शुरू होने से धार्मिक पर्यटन को निश्चित रूप से बढ़ावा मिलेगा। वाराणसी पहले से ही देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों में शामिल है। ऐसे में एक और घाट पर नियमित सुबह-शाम आरती होने से पर्यटकों के ठहरने की अवधि भी बढ़ सकती है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था, नाविकों, पुजारियों और आसपास के व्यवसायों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

अंतरराष्ट्रीय पहचान को मिलेगी मजबूती

माना जा रहा है कि इस घाट पर गंगा आरती की दोनों समय की शुरुआत से इसकी पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी। आधुनिक सुविधाओं और सुंदर घाट संरचना के कारण घाट पहले से ही आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। अब आध्यात्मिक गतिविधियों के विस्तार से यह घाट विदेशी पर्यटकों के लिए भी खास आकर्षण बनेगा।

श्रद्धालुओं में उत्साह

नमो घाट पर सुबह की गंगा आरती शुरू होने की खबर से श्रद्धालुओं में खास उत्साह है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह के समय मां गंगा की आरती देखने और उसमें शामिल होने का अनुभव अत्यंत शांति और ऊर्जा से भर देने वाला होता है। New Year में यह व्यवस्था शुरू होना, काशीवासियों के लिए किसी सौगात से कम नहीं है। कुल मिलाकर, New Year पर सुबह की गंगा आरती की शुरुआत काशी के धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन परिदृश्य को एक नई दिशा देगी। यह पहल न केवल आस्था को मजबूत करेगी, बल्कि वाराणसी को एक बार फिर आध्यात्मिक राजधानी के रूप में वैश्विक मानचित्र पर और सशक्त बनाएगी।

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Rajesh Srivastava
Author: Rajesh Srivastava

राजेश श्रीवास्तव एक अनुभवी और दूरदर्शी एडिटर इन चीफ हैं, जिन्हें पत्रकारिता और संपादन का गहरा अनुभव प्राप्त है। कई वर्षों की सक्रिय भूमिका के साथ, वे समाचारों की गुणवत्ता, निष्पक्षता और प्रामाणिकता बनाए रखने के लिए जाने जाते हैं। राजेश का उद्देश्य संपादकीय नेतृत्व के माध्यम से सच्ची और संतुलित जानकारी पाठकों तक पहुँचाना है। उनके मार्गदर्शन में प्रकाशित सामग्री में स्पष्टता, विश्वसनीयता और सामाजिक जिम्मेदारी का समावेश होता है, जो उन्हें एक प्रभावशाली और विशिष्ट पहचान प्रदान करता है।