Makar Sankranti पर बाबा महाश्मशान नाथ का भव्य श्रृंगार, Kashi Vishwanath दरबार में उमड़ी आस्था की भीड़
Varanasi News – Makar Sankranti के पावन पर्व पर Kashi एक बार फिर भक्ति, श्रद्धा और उत्सव के रंग में रंगी नजर आई। गंगा की लहरों से लेकर घाटों, मंदिरों और गलियों तक आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। खासकर मणिकर्णिका घाट स्थित बाबा महाश्मशान नाथ मंदिर में संक्रांति के अवसर पर भव्य श्रृंगार और विशेष पूजन का आयोजन किया गया, जिसने भक्तों को भाव-विभोर कर दिया। वहीं, Kashi Vishwanath धाम में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरे दिन हर-हर महादेव के जयघोष गूंजते रहे।
Makar Sankranti की सुबह जैसे ही हुई, गंगा घाटों पर स्नानार्थियों का सैलाब उमड़ पड़ा। ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालु गंगा स्नान कर पुण्य अर्जित करने में जुट गए। इसी के साथ मणिकर्णिका घाट पर स्थित बाबा महाश्मशान नाथ के दरबार में भी भक्तों की लंबी कतारें लग गईं। आस्था की पतंगें जब आसमान में लहराईं, तो महाश्मशान भी उत्सव के रंग में डूबा नजर आया।
बुधवार को बाबा महाश्मशान नाथ का Makar Sankranti विशेष श्रृंगार किया गया। मंदिर परिसर को सुगंधित पुष्पों, रंग-बिरंगी पतंगों और आकर्षक सजावट से सजाया गया, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठा। सुबह के समय षोडशोपचार विधि से बाबा का पूजन किया गया और इसके बाद महाआरती का आयोजन हुआ। आरती के दौरान घंटा-घड़ियाल और शंखनाद की गूंज से पूरा क्षेत्र शिवमय हो गया।
भक्तों ने बाबा को खिचड़ी, पापड़, दही, अचार, देशी घी, तिल और पट्टी का विशेष भोग अर्पित किया। Makar Sankranti पर खिचड़ी का भोग लगाने की परंपरा Kashi में विशेष महत्व रखती है। मान्यता है कि इस दिन बाबा को खिचड़ी अर्पित करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। भोग अर्पण के बाद श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद के रूप में खिचड़ी वितरित की गई, जिसे पाने के लिए भक्तों में विशेष उत्साह देखा गया।

इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन कर प्रसाद ग्रहण किया और आस्था का रसपान किया। दूर-दराज से आए भक्तों ने बताया कि संक्रांति पर बाबा महाश्मशान नाथ के दर्शन का अलग ही महत्व है। यहां का वातावरण न केवल धार्मिक ऊर्जा से भर देता है, बल्कि आत्मिक शांति का भी अनुभव कराता है।
कार्यक्रम का सफल संयोजन मंदिर समिति के अध्यक्ष चैनु प्रसाद गुप्ता और उपाध्यक्ष संजय गुप्ता के नेतृत्व में किया गया। उनकी देखरेख में पूरे आयोजन को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया गया, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर भी विशेष ध्यान रखा गया। उधर, Kashi Vishwanath धाम में भी संक्रांति पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। गंगा स्नान के बाद भक्त सीधे बाबा Vishwanath के दर्शन के लिए पहुंचे। धाम परिसर में सुबह से ही लंबी कतारें देखने को मिलीं। प्रशासन और मंदिर प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे, जिससे दर्शन व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रही।
संक्रांति का पर्व Kashi में केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और भाईचारे का प्रतीक भी है। इस दिन लोग अपने घरों में खिचड़ी बनाते हैं और एक-दूसरे के साथ बांटते हैं। बाबा महाश्मशान नाथ के दरबार में यह परंपरा और भी व्यापक रूप में देखने को मिली, जहां सभी जाति-वर्ग के लोग एक साथ प्रसाद ग्रहण करते नजर आए। बाबा महाश्मशान नाथ का यह भव्य श्रृंगार और आयोजन Kashi की प्राचीन धार्मिक संस्कृति का अहम हिस्सा है। यह पर्व न केवल भक्तों की आस्था को मजबूत करता है, बल्कि Kashi की सांस्कृतिक धरोहर को भी जीवंत रखता है। संक्रांति पर बाबा का यह श्रृंगार वाराणसी के लिए गर्व का विषय बना रहा।
Makar Sankranti पर बाबा महाश्मशान नाथ का भव्य श्रृंगार और Kashi Vishwanath धाम में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने एक बार फिर साबित कर दिया कि Kashi आस्था, संस्कृति और परंपराओं की जीवंत नगरी है। यह दृश्य न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि स्वतंत्र वाणी News के लिहाज से भी Kashi की आध्यात्मिक पहचान को और मजबूत करता नजर आया।
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Author: Rajesh Srivastava
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