काशी (Varanasi) विश्वनाथ मंदिर की सुरक्षा में बड़ी चूक — गूगल ग्लास कैमरे के साथ अंदर पहुंचा NRI, सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप
Varanasi news – उत्तर प्रदेश के Varanasi में स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर की सुरक्षा में बड़ी लापरवाही सामने आई है। एक NRI (प्रवासी भारतीय) श्रद्धालु गूगल ग्लास कैमरे के साथ मंदिर परिसर के भीतर तक पहुंच गया। हालांकि मुख्य मंदिर के पास सुरक्षाकर्मियों ने उसे रोक लिया, लेकिन यह घटना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
यह मामला तब सामने आया जब वह एनआरआई अपने परिवार के साथ बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचा था। बताया जा रहा है कि प्रवेश द्वार पर सुरक्षा जांच के दौरान उसके पास मौजूद गूगल ग्लास को किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। वह उसी चश्मे को पहने हुए मंदिर में प्रवेश कर गया और अपनी मां की तस्वीर लेते समय सुरक्षाकर्मियों की नज़र उस पर पड़ी।
तुरंत कार्रवाई करते हुए सुरक्षा बलों और एटीएस (एंटी टेरर स्क्वॉड) ने NRI को पकड़ लिया और उससे पूछताछ की। जांच में पाया गया कि वह व्यक्ति किसी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि में शामिल नहीं था और केवल पारिवारिक यात्रा पर आया था। इसके बावजूद, गूगल ग्लास कैमरा लेकर अंदर तक पहुंच जाना सुरक्षा में गंभीर चूक माना जा रहा है।

सुरक्षा में बड़ी लापरवाही, अधिकारियों ने जताई नाराजगी
सूत्रों के अनुसार, घटना के बाद अधिकारियों ने तुरंत बैठक बुलाई और प्रवेश द्वारों पर तैनात सुरक्षा कर्मियों को सख्त चेतावनी दी गई। यह निर्देश दिया गया है कि किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, चाहे वह कैमरा, स्मार्टवॉच या गूगल ग्लास जैसा डिवाइस हो, को मंदिर परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।
काशी विश्वनाथ धाम जैसे अंतरराष्ट्रीय महत्व के धार्मिक स्थल पर इस तरह की लापरवाही को गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि मंदिर प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं और विदेशी पर्यटकों की मेजबानी करता है। यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हाल के वर्षों में करोड़ों रुपये की लागत से सुरक्षा और संरचना को आधुनिक बनाया गया है। इसके बावजूद, गूगल ग्लास जैसी उन्नत तकनीक का अंदर पहुंच जाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंताजनक है।
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क्या है गूगल ग्लास?
गूगल ग्लास (Google Glass) एक स्मार्ट चश्मा है, जिसे Google ने विकसित किया है। यह दिखने में सामान्य चश्मे जैसा होता है, लेकिन इसमें एक छोटा डिस्प्ले, कैमरा, माइक्रोफोन और इंटरनेट कनेक्टिविटी जैसी आधुनिक सुविधाएं होती हैं।
इस चश्मे के ज़रिए उपयोगकर्ता फोटो या वीडियो रिकॉर्ड कर सकता है, संदेश पढ़ सकता है, मैप देख सकता है, या इंटरनेट सर्च कर सकता है — वो भी बिना मोबाइल फोन का इस्तेमाल किए। आंखों के पास लगे प्रिज़्म जैसे स्क्रीन पर सारी जानकारी दिखाई देती है।
इसी वजह से कई देशों में इसे सुरक्षा कारणों से संवेदनशील स्थलों पर प्रतिबंधित किया गया है, क्योंकि यह चश्मा बिना किसी की जानकारी के रिकॉर्डिंग कर सकता है।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबक
यह घटना मंदिर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों दोनों के लिए एक चेतावनी भरी घटना मानी जा रही है। क्योंकि गूगल ग्लास जैसे छोटे गैजेट्स अब आम हो रहे हैं, और सुरक्षा जांच में इन्हें पहचानना चुनौतीपूर्ण है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए स्मार्ट स्कैनिंग सिस्टम, फेस रिकग्निशन कैमरे और AI-आधारित सुरक्षा तकनीक को लागू करना जरूरी है।
मंदिर प्रशासन ने बताया कि अब सभी प्रवेश द्वारों पर जांच प्रणाली को और सख्त किया जाएगा। साथ ही सुरक्षा कर्मियों को आधुनिक तकनीक की पहचान और उपयोग की ट्रेनिंग दी जाएगी।

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श्रद्धालुओं से अपील
काशी विश्वनाथ धाम प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे कोई भी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, कैमरा, या रिकॉर्डिंग डिवाइस लेकर मंदिर परिसर में प्रवेश न करें। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा में सहयोग करना हर श्रद्धालु का दायित्व है, ताकि मंदिर की गरिमा और श्रद्धा का माहौल बना रहे।
स्वतंत्र वाणी के उपसंहारिक शब्द-
यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि तकनीक के बढ़ते दौर में सुरक्षा उपायों को भी उतना ही उन्नत बनाना जरूरी है।
वाराणसी जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र में हर दिन लाखों श्रद्धालु आते हैं, इसलिए मंदिर की सुरक्षा केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है।
काशी विश्वनाथ धाम में गूगल ग्लास के साथ पहुंचा NRI किसी दुर्भावना से नहीं आया था, लेकिन इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि तकनीकी युग में सुरक्षा को अपडेट करना ही समय की मांग है।
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Author: kamalkant
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