Mahatma Gandhi Kashi Vidyapith University की रैंकिंग खराब

Mahatma Gandhi Kashi Vidyapith University की रैंकिंग खराब

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Mahatma Gandhi Kashi Vidyapith University की खराब रैंकिंग पर PM Modi हुए आहत, राज्यपाल आनंदीबेन बोलीं — सुविधाएं पूरी, फिर भी ए ग्रेड नहीं मिलना शर्मनाक

Varanasi News : Varanasi की धरती हमेशा से ज्ञान, शिक्षा और संस्कृति का केंद्र रही है। लेकिन इस बार शिक्षा के क्षेत्र से आई खबर ने न सिर्फ शहरवासियों को, बल्कि PM Modi तक को चिंतित कर दिया है। Varanasi के दो प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थान — Mahatma Gandhi Kashi Vidyapith University — राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) की रैंकिंग में ए ग्रेड हासिल करने में विफल रहे हैं।

इस पर PM Modi खुद “आहत” बताए जा रहे हैं। यह बात उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और दोनों विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में आयोजित काशी विद्यापीठ के 47वें दीक्षांत समारोह में कही। उन्होंने मंच से स्पष्ट शब्दों में कहा कि “प्रधानमंत्री ने जब नैक की रिपोर्ट मंगवाई तो ए ग्रेड न मिलने से वे बहुत दुखी हुए। यह उनका संसदीय क्षेत्र है, जहां सारी सुविधाएं दी जा रही हैं, फिर भी प्रदर्शन कमजोर रहना शर्मनाक है।”

Mahatma Gandhi Kashi Vidyapith University की रैंकिंग खराब

सुविधाएं पूरी, लेकिन प्रदर्शन कमजोर

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मंच से दोनों विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को सख्त संदेश देते हुए कहा कि अब सुधार के बिना काम नहीं चलेगा। उन्होंने कहा, “राज्य सरकार और राजभवन से हर सुविधा विश्वविद्यालयों को दी जा रही है — इन्फ्रास्ट्रक्चर, वित्तीय सहायता, स्टाफ की तैनाती — सब कुछ मिल रहा है। इसके बावजूद अगर बी ग्रेड ही मिला है, तो यह समझना होगा कि गलती कहां हो रही है।

राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों की अकादमिक गतिविधियों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “कहीं ऐसा तो नहीं कि छात्र क्लास में नहीं जाते और शिक्षक पढ़ाने में रुचि नहीं लेते? अगर ऐसा है तो यह बहुत गंभीर बात है।

उनके इस बयान ने दीक्षांत समारोह में उपस्थित अधिकारियों और शिक्षकों को सोचने पर मजबूर कर दिया।

हॉस्टलों की स्थिति बेहद खराब

राज्यपाल ने आगे विश्वविद्यालयों के छात्रावासों की दुर्दशा पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि “Mahatma Gandhi Kashi Vidyapith University के हॉस्टलों की स्थिति बेहद खराब है। यहां PM Modi के विकसित भारत की झलक नहीं दिखती। स्वच्छता नहीं है, व्यवस्थाएं बदहाल हैं, और अनुशासन का अभाव है।

उन्होंने जिम और खेल सुविधाओं की हालत को भी “चलने लायक नहीं” बताया। उनके अनुसार, “छात्रों के रहने और खाने की स्थिति चिंताजनक है, और यह तत्काल सुधार की मांग करती है।”

Mahatma Gandhi Kashi Vidyapith University की रैंकिंग खराब

दारू की बोतलें और ड्रग्स तक मिल रहे हैं हॉस्टलों में

अपने संबोधन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कुछ चौंकाने वाले खुलासे भी किए। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालयों के हॉस्टलों में बाहरी लोग रह रहे हैं और वहां शराब की बोतलें तक पाई जा रही हैं। उन्होंने कहा, “मेरे पास तस्वीरें हैं, जहां छात्र खाली बोतलें बाहर फेंकते दिखाई दे रहे हैं। ड्रग्स भी इन हॉस्टलों में पहुंच रही है। यह स्थिति बेहद गंभीर है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मेस संचालक पैसा लेकर भाग गए, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की। उन्होंने समाज कल्याण विभाग के हॉस्टलों में रहने वाले बाहरी लोगों को तुरंत निकालने के निर्देश दिए और कहा कि “जरूरत पड़ी तो पुलिस की मदद से छात्रावास खाली करवाए जाएंगे।”

थर्ड जेंडर को उपाधि मिलना सकारात्मक कदम

राज्यपाल ने जहां एक ओर विश्वविद्यालयों की खामियों पर तीखा प्रहार किया, वहीं उन्होंने दीक्षांत समारोह में थर्ड जेंडर विद्यार्थियों को उपाधियां दिए जाने पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा, “यह सामाजिक समानता और समावेशिता की दिशा में एक सराहनीय कदम है। शिक्षा सबके लिए समान अवसर का माध्यम होनी चाहिए।

काशी की धरती पर ऐसे हालात अस्वीकार्य

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि “काशी विद्यापीठ का नाम महात्मा गांधी के नाम पर है। ऐसे में यहां अनुशासनहीनता, अस्वच्छता और गिरता शैक्षणिक स्तर अस्वीकार्य है। यह प्रधानमंत्री मोदी का संसदीय क्षेत्र है, इसलिए जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।

उन्होंने कुलपतियों और विश्वविद्यालय प्रशासन से कहा कि जल्द से जल्द सुधार के ठोस कदम उठाए जाएं, अन्यथा राजभवन की ओर से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

स्वतंत्र वाणी के उपसंहारिक शब्द

Varanasi के विश्वविद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता और अनुशासन पर उठे ये सवाल निश्चित रूप से चिंताजनक हैं। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के तीखे बयान और प्रधानमंत्री मोदी की नाराजगी से यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि अब उच्च शिक्षा संस्थानों की जवाबदेही तय की जाएगी।

काशी जैसे शहर, जो शिक्षा और संस्कृति की नगरी के रूप में विश्व प्रसिद्ध है, वहां ऐसे हालात निश्चित रूप से अस्वीकार्य हैं। अब देखना यह होगा कि Mahatma Gandhi Kashi Vidyapith University आने वाले महीनों में अपनी छवि सुधारने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।

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Author: kamalkant

कमल कांत सिंह एक उत्साही पत्रकार और लेखक हैं, जिन्हें समाचार और कहानी कहने का गहरा जुनून है। कई वर्षों के अनुभव के साथ, वे सामाजिक मुद्दों, संस्कृति और समसामयिक घटनाओं पर गहन विश्लेषण और आकर्षक लेखन के लिए जाने जाते हैं। कमल का उद्देश्य अपने लेखन के माध्यम से सच्चाई को उजागर करना और पाठकों को प्रेरित करना है। उनकी लेखनी में स्पष्टता, विश्वसनीयता और मानवीय संवेदनाओं का समावेश होता है, जो उन्हें एक विशिष्ट आवाज प्रदान करता है।