‘Kantara Chapter 1’ मूवी रिव्यू: मनोरंजन से भरपूर, शानदार प्रीक्वल
ऋषभ शेट्टी 2022 की सुपरहिट फिल्म ‘Kantara’ के मच अवेटेड प्रीक्वल ‘Kantara Chapter 1’ के साथ एक महत्वाकांक्षी विज़न लेकर लौटे हैं। जहां मूल फिल्म अपनी अनोखी कहानी और रहस्यमयी थीम से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करती है, वहीं यह प्रीक्वल विज़ुअल्स, थीम और इमोशन के मामले में और भी बड़ा है। नतीजा? एक शानदार फिल्म जो कुछ कमियों के बावजूद, एक बेहतरीन सिनेमैटिक अनुभव देती है।

‘Kantara Chapter 1’ अभी सिनेमाघरों में चल रही है और यह एक ऐसी फिल्म है जिसे बड़े पर्दे पर देखना चाहिए – इसके शानदार विज़ुअल्स, शानदार अभिनय और लोककथाओं पर आधारित मिथ-राजनीतिक कहानी के लिए
Kantara Chapter 1 (कन्नड़)
- निर्देशक: ऋषभ शेट्टी
- कलाकार: ऋषभ शेट्टी, रुक्मिणी वसंत, राकेश पुजारी, जयराम, गुलशन देवैया
- समय: 168 मिनट
- शैली: एक्शन | ड्रामा | पौराणिक कथा
- अभी चल रही है: भारत भर के सिनेमाघरों में
कहानी: जहां मिथक, शक्ति और भूमि टकराते हैं
‘Kantara’ के पवित्र जंगलों में सेट यह फिल्म बर्मे (ऋषभ शेट्टी द्वारा अभिनीत) की कहानी है, जो एक हाशिये पर रहने वाले आदिवासी समूह का सदस्य है और जो शाही अत्याचार से अपने लोगों की रक्षा के लिए आगे आता है। जब कादंबा राजवंश पवित्र ‘ईश्वरान हुथोटा’ (भगवान का बगीचा) पर कब्ज़ा करने की कोशिश करता है, तो बर्मे का सत्ता के खिलाफ विद्रोह तय हो जाता है।
पहली फिल्म में जहां एक लालची जमींदार ने भूमि पर कब्ज़ा करने की कोशिश की थी, वहीं ‘Kantara Chapter 1’ में यह शाही अहंकार का मामला है। राजा जयराम को दैवीय शक्तियों द्वारा रोक दिया जाता है, लेकिन उसका गुस्सैल बेटा, प्रिंस कुलशेखर (गुलशन देवैया) फिर से तनाव पैदा कर देता है। बर्मे, जो अजीब है लेकिन साहसी है, प्रतिरोध का प्रतीक बन जाता है।
अभिनय और तकनीकी उत्कृष्टता
ऋषभ शेट्टी:
ऋषभ का अभिनय शानदार है। वह दैवीय शक्ति और जमीनी सोच को बेहतरीन तरीके से दिखाते हैं। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस, खासकर दैवीय शक्ति वाले दृश्यों में, मंत्रमुग्ध कर देने वाली है।

रुक्मिणी वसंत:
‘सप्त सागरदाचे एल्लौ’ के बाद अपना सबसे दमदार अभिनय देने वाली रुक्मिणी संवादों के बेहतरीन उच्चारण और भावुकता से सभी को प्रभावित करती हैं। अरविंद कश्यप की सिनेमेटोग्राफी
दृश्य-प्रभाव के मामले में, ‘Kantara Chapter 1’ एक शानदार फिल्म है। कश्यप के कैमरे ने जंगल की रहस्यमयी दुनिया और युद्ध व परंपरा की भव्यता को जीवंत कर दिया है।
बी. अजनीश लोकनाथ का संगीत:
संगीत भी फिल्म की एक बड़ी खासियत है। ‘ब्रह्मकलश’ और ‘रेबेल’ जैसे गाने सिर्फ बैकग्राउंड म्यूजिक नहीं हैं, बल्कि वे भावनाओं और रोमांच से कहानी को और बेहतर बनाते हैं।
अच्छाइयाँ और कमियाँ
क्या अच्छा है:
- बड़ी स्केल और शानदार दृश्य
- तुलनडू लोककथा से प्रेरित असली दुनिया
- शानदार एक्शन सीक्वेंस (खासकर रथ वाला सीन!)
- कपड़ों, रीति-रिवाजों और परिवेश से सांस्कृतिक गहराई
- मुख्य कलाकारों का बेहतरीन अभिनय
क्या और बेहतर हो सकता था:
- पहले भाग में कहानी की गति और जुड़ाव की कम
- गंभीर दृश्यों में हास्य की कोशिश से भावनात्मक प्रभाव कम हुआ
- भावनाओं पर भव्यता हावी हो गई
- सभी एक्शन सीन कहानी को आगे नहीं बढ़ाते
इन कमियों के बावजूद, फिल्म दूसरे भाग में रफ्तार पकड़ती है और दमदार अंत के साथ एक बेहतरीन प्रीक्वल साबित होती है।
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अंतिम फैसला: क्या आपको ‘Kantara Chapter 1’ देखनी चाहिए?
ज़रूर – खासकर अगर आप जड़ों से जुड़ी कहानियों, सांस्कृतिक महाकाव्य और शानदार सिनेमा के शौकीन हैं। ‘Kantara Chapter 1’ में पहली फिल्म जैसी गहरी भावनाएँ भले ही न हों, लेकिन यह अपने स्केल, महत्वाकांक्षा और शानदार अभिनय से उसे पूरा करती है।

ऋषभ शेट्टी का विज़न शानदार है, और उन्होंने एक बार फिर साबित किया है कि वे सिर्फ एक फिल्ममेकर नहीं, बल्कि एक कहानीकार हैं जो अपनी धरती और लोगों की आत्मा को समझते हैं।
‘कांतारा चैप्टर 1’ क्यों खास है?
यह फिल्म सिर्फ एक कहानी नहीं सुनाती, बल्कि यह दैवों (पवित्र आत्माओं) की उत्पत्ति का पता लगाने की कोशिश करती है और तुलनडू की लोककथा, रीति-रिवाजों और स्थानीय संस्कृति को सम्मान देती है। भले ही इसकी भावनात्मक गहराई थोड़ी कम हो, लेकिन रिसर्च, संस्कृति के प्रति सम्मान और सिनेमा के प्रति जुनून इसमें साफ दिखता है।
मूल फिल्म के प्रशंसकों और नए दर्शकों के लिए, ‘Kantara Chapter 1’ भारतीय सिनेमा के आधुनिक पौराणिक शैली में एक ज़रूरी फिल्म है।
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Author: Ashish Patel
मेरा नाम आशीष पटेल है और मैं पिछले 2 वर्षों से पत्रकारिता और न्यूज़ पोर्टल प्रबंधन के क्षेत्र में सक्रिय हूँ। मेरा फोकस मुख्य रूप से मनोरंजन, राजनीति और प्रौद्योगिकी की ख़बरों पर रहता है। मनोरंजन की दुनिया की हलचल, राजनीति के अहम मुद्दे और तकनीक के नए इनोवेशन — सब कुछ एक ही जगह पर उपलब्ध कराने की मेरी कोशिश रहती है।










