Israel-Iran War: हमला जिसमें Ayatollah Ali Khamenei की मौत हो गई और पूरा मिडिल ईस्ट हिल गया
यह बात है शनिवार सुबह करीब 9:40 AM जब सेंट्रल तेहरान पूरा धुआँ धुआँ हो गया । कुछ ही समय में, दुनिया भर के डिप्लोमैटिक बैकचैनल और सैन्य कमांड रूम में यह बात आग की तरह फैल गयी। और 3 दशकों से ज़्यादा समय तक सुप्रीम लीडर की कमान संभल रहे Ayatollah Ali Khamenei की मौत हो गई। इसके बाद Israel-Iran War की पूरी दिशा ही बदल गयी है और पूरी दुनिया के सामने एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है की अब आगे क्या होगा इस वॉर में।

वह हमला जिसने तस्वीर बदल दिया
US मीडिया रिपोर्ट्स के हिसाब से, यह हमला इज़राइल ने United State से मिली इंटेलिजेंस रिपोर्ट का करके किया । इस हमले का मुख्या टारगेट तेहरान के एक सेक्रेटे कंपाउंड में हो रहे एक हाई प्रोफाइल मीटिंग थी, जिसमें सुप्रीम लीडर, प्रेसिडेंट और नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के ऑफिसर थे ।
1981 में Khamenei पहली बार प्रेसिसडेंट बने थे और उसके पस्चता 1989 में Rohollah Khomeini सुप्रीम लीडर बने, खबर है कि एक हमले में हुए बमबारी में उनकी दुखद मृत्यु हो गयी । कंपाउंड में कई वरिष्ट्र सैन्य अधिकारी भी मौजूद थे।
कुछ रिपोर्ट्स की अनुसार US सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी को शनिवार को Khamenei और टॉप कमांडरों के बीच होने वाली सीक्रेट मीटिंग की जानकारी हो गयी थी। इस गोपनीय मीटिंग की जानकारी को इजराइल के साथ साँझा की, जिससे रात में किये जाने वाले हमले के प्लैन में तेज़ी आई। US सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी द्वारा दिए गए नई जानकारी के बाद फाइटर जेट जो लोकल टाइम के हिसाब से सुबह करीब 6 बजे उड़ान बारी और अगले 2 घंटे में ही अपने टारगेट ईरानी एयरस्पेस में घुस गए ।

US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के अनुसार एडवांस इंटेलिजेंस और बेहतर ट्रैकिंग सिस्टम के आगे ईरानी लीडरशिप के पास पीछे हटने के सिवा कोई रास्ता नई छोड़ा। हालांकि, रिपब्लिकन कांग्रेसी माइक टर्नर ने बाद में कहा कि सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट मार्को रुबियो ने साफ़ किया था कि US ने सीधे तौर पर खामेनेई को टारगेट नहीं किया था।
अलग-अलग बयानों ने Israel-Iran War युद्ध में वाशिंगटन की भूमिका की ग्लोबल जांच को और गहरा कर दिया है।
इंटेलिजेंस ऑपरेशन कैसे शुरू हुआ
ऑपरेशन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि CIA महीनों से Khomeini के गतिविधियों पर नज़र बनाये हुए थी। पिछले साल इज़राइल और ईरान के बीच 11 दिन तक चले छोटे लेकिन हिंसक war के बाद निगरानी और सख्त हो गई।
एनालिस्ट का मानना है कि यह इंटेलिजेंस शायद ईरान के अंदर मौजूद सोर्स, सैटेलाइट मॉनिटरिंग और सिग्नल इंटरसेप्शन का मिला-जुला रूप था। इज़राइल लंबे समय से ईरानी इलाके के अंदर खुफिया नेटवर्क बनाने के लिए बदनाम है। पिछले साल की झड़पों के दौरान, ईरान के अंदर टारगेटेड ऑपरेशन में छह न्यूक्लियर साइंटिस्ट की हत्या कर दी गई थी।
कहा जाता है कि शनिवार की मीटिंग एक दुर्लभ मिलने वाला मौका था। भरी तनाव के बीच ईरान के सभी वरिष्ठ सैन्य अधिकारी एक ही जगह इकठा हुए थे जो की बहुत ही दुर्लभ बात थी। कई एक्सपर्ट अब यह सवाल पूछ रहे हैं कि संभावित हमलों की साफ़ चेतावनी के बावजूद ऐसी मीटिंग एक ऐसी जगह पर क्यों की गई जिसका जिसका अंदाज़ा लगाना बेहद आसान था।
बमबारी के साथ ही, कहा जाता है कि US साइबर कमांड ने ईरान के कुछ हिस्सों में कम्युनिकेशन में रुकावट डाली। US के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने इन कामों को नॉन-काइनेटिक ऑपरेशन बताया, जिन्हें ईरान की रियल टाइम में जवाब देने की क्षमता को कमज़ोर करने और उसे कमज़ोर करने के लिए डिज़ाइन किया गया था।
लीडरशिप की कमी और पॉलिटिकल नतीजे
रविवार को, ईरानी अधिकारियों ने एक टेम्परोअरी 3 मेंबर वाली लीडरशिप काउंसिल की घोषणा की, जिसमें प्रेसिडेंट Masoud Pezeshkian, चीफ जस्टिस Gholam-Hossein Mohseni-Ejei और गार्डियन काउंसिल के मेंबर Alireza Arafi शामिल हैं।
इस अंतरिम बॉडी के लिए सबसे बड़ी चुनौती अंदरूनी स्थिरता बनाए रखना है। Khamenei की लीडरशिप 3 दशकों से ज़्यादा समय तक रही, जिसने ईरान के पॉलिटिकल सिद्धांत, विदेश नीति और सुरक्षा रणनीति को आकार दिया। उनकी मौत से संवैधानिक और वैचारिक दोनों तरह का खालीपन पैदा हो गया है।
देश में, ईरान को हाल के सालों में महंगाई, बेरोज़गारी और चुनाव में हेरफेर के आरोपों को लेकर विरोध प्रदर्शनों की लहरों का सामना करना पड़ा है। कई प्रदर्शनों को बलपूर्वक दबा दिया गया। सेंट्रल अथॉरिटी के जाने के बाद, फिर से अशांति का खतरा काफी बढ़ गया है।
आम ईरानियों के लिए, Israel-Iran War की अब बहुत बड़ी निजी कीमत चुकानी पड़ रही है। परिवार अपनों के लिए दुख मना रहे हैं। आर्थिक चिंता बढ़ रही है। खबर है कि नेशनल करेंसी पर फिर से दबाव आया है, और बिज़नेस को लंबे समय तक अस्थिरता का डर है।
ग्लोबल रिएक्शन और स्ट्रेटेजिक कैलकुलेशन
इंटरनेशनल रिएक्शन बहुत तेज़ रहा है। यूरोपियन सरकारों ने तनाव कम करने की अपील की है और साथ में ही सभी पहलुओं पर फिर से विचार करने का प्रस्ताव दिया। खाड़ी देश, जो पहले से ही लड़ाई में फंसने से डर रहे हैं, अपनी सिक्योरिटी पोजीशन को फिर से देख रहे हैं।
US डिफेंस सेक्रेटरी Pete Hegseth ने स्ट्राइक का बचाव करते हुए कहा कि ईरान के न्यूक्लियर और मिसाइल लक्ष्यों को कमज़ोर करने के लिए ये ज़रूरी थे। प्रेसिडेंट ट्रंप ने कहा कि ऑपरेशन तब तक जारी रहेंगे जब तक मिडिल ईस्ट में शांति नहीं आ जाती।
सिक्योरिटी एनालिस्ट चेतावनी देते हैं कि सिर कलम करने वाले स्ट्राइक से शायद ही कभी जल्दी स्टेबिलिटी आती है। इसके बजाय, वे बिखरे हुए कमांड स्ट्रक्चर और अप्रत्याशित जवाबी कार्रवाई को ट्रिगर कर सकते हैं। Khamenei की हत्या इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के अंदर कट्टरपंथियों को हिम्मत दे सकती है जो समझौते को कमज़ोरी मानते हैं।
Israel-Iran War की खास घटनाओं की टाइमलाइन
शनिवार सुबह 6:00 बजे
खबर है कि इज़राइली फाइटर जेट इज़राइल के बेस से निकले।
शनिवार सुबह 9:40 बजे तेहरान टाइम
हाई लेवल मीटिंग के दौरान सेंट्रल तेहरान कंपाउंड पर एयर स्ट्राइक हुए। खामेनेई और सीनियर मिलिट्री लीडर मारे गए।
शनिवार दोपहर
ईरान के कई शहरों में फॉलो-अप स्ट्राइक की खबर है।
रविवार
ईरान ने अंतरिम लीडरशिप काउंसिल की घोषणा की। हताहतों की संख्या में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई।
सोमवार
ईरान के जवाबी मिसाइल हमलों ने खाड़ी देशों में इज़राइल और US से जुड़ी जगहों को निशाना बनाया।
Israel-Iran War : आगे क्या होगा
Israel-Iran War एक नए और उतार-चढ़ाव वाले दौर में आ गया है। एक मौजूदा सुप्रीम लीडर की हत्या न सिर्फ़ ईरान के लिए बल्कि पूरे इलाके के लिए एक बड़ा झटका है।
एक्सपर्ट्स के बीच अब तीन हालात पर चर्चा हो रही है। पहला, खाड़ी देशों और शायद NATO के लोगों को शामिल करते हुए एक बड़े इलाके के युद्ध में तेज़ी से बढ़ना। दूसरा, पूरी तरह हमला किए बिना ताकत को कम करने के लिए कंट्रोल्ड लेकिन लगातार हमले। तीसरा, ईरान के अंदर राजनीतिक उथल-पुथल जो उसकी विदेश नीति के रुख को बदल देगी।
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Author: Rajesh Srivastava
राजेश श्रीवास्तव एक अनुभवी और दूरदर्शी एडिटर इन चीफ हैं, जिन्हें पत्रकारिता और संपादन का गहरा अनुभव प्राप्त है। कई वर्षों की सक्रिय भूमिका के साथ, वे समाचारों की गुणवत्ता, निष्पक्षता और प्रामाणिकता बनाए रखने के लिए जाने जाते हैं। राजेश का उद्देश्य संपादकीय नेतृत्व के माध्यम से सच्ची और संतुलित जानकारी पाठकों तक पहुँचाना है। उनके मार्गदर्शन में प्रकाशित सामग्री में स्पष्टता, विश्वसनीयता और सामाजिक जिम्मेदारी का समावेश होता है, जो उन्हें एक प्रभावशाली और विशिष्ट पहचान प्रदान करता है।







