Chhath Puja 2025 : पूरे भारत में तैयारियाँ और उत्सवी माहौल

Chhath Puja 2025 : पूरे भारत में तैयारियाँ और उत्सवी माहौल

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Chhath Puja 2025: पूरे भारत में तैयारियाँ और उत्सवी माहौल

Chhath Puja 2025 का शुभ पर्व नज़दीक आते ही पूरे भारत में श्रद्धा और उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है। बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, दिल्ली और नेपाल के तराई क्षेत्रों में इस समय घाटों की साफ-सफाई, सजावट और पूजा की तैयारियाँ ज़ोरों पर हैं। यह पवित्र पर्व 25 अक्टूबर से 28 अक्टूबर 2025 तक पूरे चार दिनों तक मनाया जाएगा। सूर्य देव और छठी मैया की उपासना के लिए लाखों श्रद्धालु इस पर्व का इंतजार पूरे वर्ष करते हैं।

Chhath Puja 2025: पूरे भारत में तैयारियाँ और उत्सवी माहौल

Chhath Puja क्या है?

Chhath Puja हिंदू धर्म का एक सबसे प्राचीन और पवित्र पर्व है, जो सूर्य देव (सूर्य भगवान) और छठी मैया (माता षष्ठी देवी) को समर्पित है। यह पर्व न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक और प्राकृतिक दृष्टि से भी बेहद विशेष माना जाता है।

Chhath Puja का आरंभ प्राचीन काल में तब हुआ जब मनुष्य ने सूर्य देव को जीवन और ऊर्जा का स्रोत मानकर उनके प्रति आभार व्यक्त करने की परंपरा शुरू की। आज भी यह परंपरा वैसी ही श्रद्धा और नियमों के साथ निभाई जाती है।

मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, नेपाल, दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में छठ पूजा का माहौल अद्भुत होता है। घरों, घाटों और नदियों के किनारे भजन, गीत और पूजा के स्वर गूंजते रहते हैं।

Chhath Puja 2025 : पूरे भारत में तैयारियाँ और उत्सवी माहौल

Chhath Puja क्यों मनाई जाती है?

Chhath Puja के पीछे दो प्रमुख मान्यताएँ मानी जाती हैं — धार्मिक और वैज्ञानिक।

1. धार्मिक मान्यता:

सूर्य देव की उपासना: सूर्य देव को जीवन, ऊर्जा, और स्वास्थ्य का प्रतीक माना गया है। श्रद्धालु मानते हैं कि सूर्य की आराधना करने से परिवार में सुख, समृद्धि, और संतान सुख प्राप्त होता है।

2. छठी मैया की पूजा:

छठी मैया को संतान की रक्षक देवी माना जाता है। महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु, स्वास्थ्य और परिवार की भलाई के लिए छठ का कठोर व्रत रखती हैं।

3. पौराणिक कथाएँ:

रामायण में: माता सीता ने अयोध्या लौटने के बाद कार्तिक शुक्ल षष्ठी को सूर्य देव की पूजा की थी।

महाभारत में: कुंती और द्रौपदी ने सूर्य देव की उपासना कर संतान प्राप्ति और समृद्धि की कामना की थी।

इन सभी मान्यताओं के कारण छठ पूजा को न केवल एक पर्व, बल्कि श्रद्धा, आस्था और संकल्प का प्रतीक माना जाता है।

वैज्ञानिक दृष्टि से छठ पूजा का महत्व

Chhath Puja के नियमों और विधियों में वैज्ञानिक तर्क भी निहित हैं। सूर्य की किरणों में मौजूद अल्ट्रावायलेट और इन्फ्रारेड ऊर्जा शरीर को शक्ति देती है और विटामिन D का प्राकृतिक स्रोत बनती है। सूर्यास्त और सूर्योदय के समय जल में खड़े होकर अर्घ्य देने से मन और शरीर दोनों को शांति मिलती है, जिससे तनाव कम होता है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

Chhath Puja के चार पवित्र दिन

1. पहला दिन – नहाय खाय:
व्रती इस दिन पवित्र नदी में स्नान कर शुद्ध भोजन ग्रहण करते हैं। घर में साफ-सफाई की जाती है और भोजन में केवल सात्विक सामग्री का प्रयोग होता है।

2. दूसरा दिन – खरना:
इस दिन व्रती पूरा दिन निर्जला उपवास रखते हैं और शाम को गुड़ की खीर, रोटी और केला का प्रसाद बनाकर पूजा करते हैं। इसके बाद ही उपवास का मुख्य भाग शुरू होता है।

3. तीसरा दिन – संध्या अर्घ्य:
व्रती नदी या तालाब के किनारे जाकर डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। घाटों पर दीप, फूल और भजनों का सुंदर संगम देखने को मिलता है। पूरा वातावरण दिव्यता से भर जाता है।

4. चौथा दिन – उषा अर्घ्य:
अगले दिन सुबह-सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। यह क्षण सबसे भावनात्मक होता है क्योंकि व्रती सूर्य देव और छठी मैया से अपने परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं। इसके बाद व्रती पारण (फलाहार) करते हैं और व्रत संपन्न होता है।

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Chhath Puja का सांस्कृतिक महत्व

Chhath Puja केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति, परिवार और समाज के प्रति आभार व्यक्त करने का त्योहार है। इस दिन न कोई मूर्ति पूजा होती है, न ही कोई आडंबर — बस सूर्य, जल और वायु जैसी प्राकृतिक शक्तियों के प्रति श्रद्धा और सम्मान होता है। यह पर्व सामूहिकता और एकता का भी प्रतीक है, क्योंकि हर जाति, वर्ग और समुदाय के लोग एक साथ घाटों पर पूजा करते हैं।

स्वतंत्र वाणी के उपसंहारिक शब्द

Chhath Puja 2025 पूरे भारत में श्रद्धा, भक्ति और पर्यावरणीय चेतना का संदेश लेकर आ रही है। जहां एक ओर महिलाएं संतान की लंबी आयु की कामना करेंगी, वहीं दूसरी ओर पूरा समाज प्रकृति और सूर्य देव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करेगा।

Chhath Puja हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति वही है जो शुद्धता, संयम और कृतज्ञता के भाव से की जाए। इस वर्ष भी जब घाटों पर ‘कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए…’ जैसे पारंपरिक गीत गूंजेंगे, तो पूरा भारत छठ मैया के जयघोष में एकजुट होगा।

खबरों के लाइव अपडेट और विस्तृत विश्लेषण के लिए स्वतंत्र वाणी पर बने रहें।

Ashish Patel
Author: Ashish Patel

मेरा नाम आशीष पटेल है और मैं पिछले 2 वर्षों से पत्रकारिता और न्यूज़ पोर्टल प्रबंधन के क्षेत्र में सक्रिय हूँ। मेरा फोकस मुख्य रूप से मनोरंजन, राजनीति और प्रौद्योगिकी की ख़बरों पर रहता है। मनोरंजन की दुनिया की हलचल, राजनीति के अहम मुद्दे और तकनीक के नए इनोवेशन — सब कुछ एक ही जगह पर उपलब्ध कराने की मेरी कोशिश रहती है।