Bihar Vidhan Sabha Chunav 2025: चुनाव आयोग की तैयारियाँ पूरी, एनडीए-महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर असमंजस
पटना। Bihar Vidhan Sabha Chunav 2025 की घोषणा होने वाली है। चुनाव आयोग (ECI) ने संकेत दिए हैं कि चुनाव की तारीखों की घोषणा 6 अक्टूबर के बाद कभी भी हो सकती है। इस बीच, राज्य की राजनीति गरमा गई है। चुनाव आयोग की टीम चुनावी तैयारियों की समीक्षा के लिए 4 और 5 अक्टूबर को बिहार का दौरा करेगी। इस बीच, एनडीए और महागठबंधन दोनों में सीट बंटवारे को लेकर खींचतान जारी है।
243 सदस्यीय विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर को समाप्त हो रहा है, इसलिए नवंबर में चुनाव होने की उम्मीद है।
चुनाव आयोग की तैयारियाँ
चुनाव आयोग के मुख्य आयुक्त ज्ञानेश कुमार (CEC) चुनावी तैयारियों की समीक्षा के लिए 4 और 5 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से पटना का दौरा करेंगे। अधिकारियों के अनुसार, 3 अक्टूबर को सामान्य, पुलिस और व्यय पर्यवेक्षकों की एक ब्रीफिंग आयोजित की जाएगी।
इसमें सबसे महत्वपूर्ण पहलू विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) है। यह प्रक्रिया दो दशकों के बाद आयोजित की जा रही है और अंतिम मतदाता सूची 30 सितंबर को प्रकाशित की जाएगी। रिपोर्टों के अनुसार, इस सूची में 7.3 करोड़ मतदाता शामिल होंगे, जिनमें लगभग 14 लाख नए नाम जोड़े जाएँगे, जिनमें से लगभग 10 लाख मतदाता पहली बार मतदाता बनेंगे।
हालांकि, विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि आयोग ने लगभग 65 लाख नाम हटा दिए हैं, जिनमें से 43 लाख जीवित नागरिक हैं। विपक्ष का आरोप है कि इससे लाखों लोग अपने मताधिकार से वंचित हो जाएँगे।
इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में भी हो चुकी है और अंतिम बहस 7 अक्टूबर को होगी। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अगर इस प्रक्रिया में कोई अनियमितता पाई जाती है, तो पूरी प्रक्रिया रद्द की जा सकती है।
भाजपा का “मिशन बिहार विजय”
भाजपा ने बिहार चुनाव के लिए एक विशेष रणनीति बनाई है। पार्टी ने विभिन्न संसदीय क्षेत्रों में 45 “विशेष नेताओं” को तैनात किया है। ये नेता बूथ स्तर तक संगठन को मज़बूत करेंगे और प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
गृह मंत्री अमित शाह, बिहार चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान, राज्य प्रभारी विनोद तावड़े और अन्य वरिष्ठ नेता हाल ही में पटना में एक उच्चस्तरीय बैठक में शामिल हुए। अमित शाह ने दावा किया कि इस बार एनडीए 160 से ज़्यादा सीटें जीतेगा और बिहार से “जंगल राज और घुसपैठियों” को खदेड़ देगा।
भाजपा ने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा सहित 45 सदस्यों वाली एक चुनाव प्रचार समिति भी बनाई है।
बसपा का दांव
उत्तर प्रदेश की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) भी बिहार चुनाव में सक्रिय हो गई है। बसपा अपने उम्मीदवारों की घोषणा करने वाली पहली पार्टी बन गई है। पार्टी ने कैमूर ज़िले की तीन सीटों – भभुआ, मोहनिया और रामगढ़ – के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की है।
कांग्रेस और प्रियंका गांधी का आक्रामक रुख
कांग्रेस की ओर से प्रियंका गांधी वाड्रा ने मोतिहारी में एक बड़ी रैली की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी एक सच्चे देशभक्त हैं, जिन्होंने लोगों की समस्याओं को समझने के लिए “4,000 किलोमीटर पैदल यात्रा” की है।
उन्होंने बिहार की महिलाओं से अपील की कि वे सरकार की सहायता (रोज़गार योजना के तहत ₹7,500 करोड़ का पैकेज) स्वीकार करें, लेकिन उन पार्टियों को वोट दें जो वास्तव में लोगों के कल्याण की परवाह करती हैं।
महागठबंधन और एनडीए में सीट बंटवारे का संकट
इस बार, दोनों गठबंधनों के लिए सीट बंटवारा सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
एनडीए में स्थिति: भाजपा और जेडीयू लगभग 100-100 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती हैं। हालाँकि, लोजपा (रालोसपा) 45 सीटों, भाजपा 15-20 सीटों और रालोसपा 12 सीटों की मांग कर रही है। छोटे दलों की मांगों को संतुलित करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।
महागठबंधन में अंदरूनी कलह: राजद 140 सीटें, कांग्रेस 70, वीआईपी 60, भाकपा 40, भाकपा 24 और माकपा 11 सीटें चाहती है। रालोजपा और झामुमो भी हिस्सेदारी चाहते हैं। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाने पर सहमति नहीं बन पा रही है। कांग्रेस का कहना है कि चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद का फैसला होगा।
स्थानीय स्तर पर टिकट विवाद बढ़ा रहे हैं मुश्किलें
सीटों के बंटवारे के साथ-साथ स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं का असंतोष भी दोनों गठबंधनों की मुश्किलें बढ़ा रहा है।
- सूर्यगढ़ा (लखीसराय): जदयू नेता सुरेंद्र महतो ने अधिवेशन में स्थानीय उम्मीदवार को ही टिकट देने की मांग की। इस पर मंच पर बहस और हंगामा हुआ। मंत्रियों और राज्य के अधिकारियों ने बीच-बचाव की कोशिश की।
- कटिहार (कांग्रेस विधायक शकील अहमद खान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन): उनके खिलाफ नारे लगाए गए और काले झंडे दिखाए गए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उन्हें बाहरी नहीं, बल्कि स्थानीय उम्मीदवार चाहिए।
इस तरह के घटनाक्रमों से पता चलता है कि टिकट वितरण के दौरान गठबंधनों में बगावत की आशंका हो सकती है।
चुनावी समीकरण और संभावनाएँ
- एनडीए अमित शाह की रणनीति और बूथ स्तर की ताकत पर निर्भर है।
- महागठबंधन तेजस्वी यादव की लोकप्रियता और कांग्रेस के साथ उनके गठबंधन पर निर्भर है।
- साथ ही, प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी भी तीसरे मोर्चे के रूप में प्रचार कर रही है और जनता के लिए एक “नया विकल्प”।
निष्कर्ष
- बिहार में यह चुनाव कांटे का मुकाबला साबित हो सकता है।
- एक तरफ भाजपा और एनडीए हैं, जो सत्ता में वापसी का दावा कर रहे हैं।
- दूसरी तरफ महागठबंधन है, जो बदलाव का नारा बुलंद कर रहा है।
- जन सुराज जैसी पार्टियाँ भी जनता को एक विकल्प देने का दावा कर रही हैं।
चुनाव आयोग की तैयारियाँ लगभग पूरी हो चुकी हैं, और 30 सितंबर को अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद तस्वीर और साफ़ हो जाएगी। चुनाव आयोग की टीम 4-5 अक्टूबर को बिहार में रहेगी, और 6 अक्टूबर के बाद कभी भी तारीखों का ऐलान हो सकता है।
इस समय बिहार की राजनीति में सबसे बड़ी चुनौती सीटों के बंटवारे की है। मुद्दा टिकट बंटवारे का है, जो तय करेगा कि एनडीए और महागठबंधन जनता के सामने खुद को कितनी मजबूती से पेश करते हैं।
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Author: Rajesh Srivastava
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