BHU में संस्कृति, विज्ञान और परंपरा का संगम

BHU में संस्कृति, विज्ञान और परंपरा का संगम: मालवीय स्मृति पुष्प प्रदर्शनी से लेकर काशी शब्दोत्सव तक, तीन दिनों तक चलेगा ज्ञान और कला का महाकुंभ

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BHU में संस्कृति, विज्ञान और परंपरा का संगम: मालवीय स्मृति पुष्प प्रदर्शनी से लेकर काशी शब्दोत्सव तक, तीन दिनों तक चलेगा ज्ञान और कला का महाकुंभ

Kashi Hindu University (BHU) एक बार फिर अपनी सांस्कृतिक, शैक्षणिक और बौद्धिक विरासत के भव्य आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है। महामना पं. मदन मोहन मालवीय की जयंती के अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में तीन-दिवसीय मालवीय स्मृति पुष्प प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है, जो 25 से 27 दिसंबर तक मालवीय भवन में चलेगा। यह प्रदर्शनी BHU की उद्यान इकाई द्वारा आयोजित की जा रही है, जिसमें प्रकृति, विज्ञान और भारतीय नवाचार की झलक देखने को मिलेगी।

माघ मेले और चंद्रयान की सफलता बनेगी प्रदर्शनी की थीम

इस वर्ष की मालवीय स्मृति पुष्प प्रदर्शनी को खास बनाने के लिए इसकी थीम प्रयागराज के माघ मेले और चंद्रयान मिशन की ऐतिहासिक सफलता पर केंद्रित रखी गई है। प्रदर्शनी में जैविक खेती, दुर्लभ प्रजातियों के पौधे, पत्ती से तैयार खाद और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नवाचार मुख्य आकर्षण होंगे। आयोजकों के अनुसार, इसका उद्देश्य युवाओं और आम लोगों को प्रकृति के प्रति जागरूक करना और आत्मनिर्भर भारत की सोच को आगे बढ़ाना है।

BHU में कला-संस्कृति का महाकुंभ: काशी शब्दोत्सव

BHU में संस्कृति, विज्ञान और परंपरा का संगम: मालवीय स्मृति पुष्प प्रदर्शनी से लेकर काशी शब्दोत्सव तक, तीन दिनों तक चलेगा ज्ञान और कला का महाकुंभ

इसी क्रम में Kashi Hindu University में काशी शब्दोत्सव का आयोजन भी किया जा रहा है, जो कला, साहित्य और भारतीय संस्कृति को समर्पित एक बड़ा मंच बनकर उभरा है। तीन दिनों तक चलने वाले इस समारोह में देश-विदेश से 3000 से अधिक विद्वान, कला प्रेमी, चिकित्सक, आयुर्वेदाचार्य, पर्यावरणविद् और राजनीतिक चिंतक हिस्सा ले रहे हैं। संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. सदाशिव द्विवेदी के अनुसार, इस आयोजन के लिए 2400 से ज्यादा प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है। इनमें युवा शोधार्थियों के साथ-साथ वरिष्ठ प्रोफेसर भी शामिल हैं। छात्रों से 200 रुपये और प्रोफेसरों से 500 रुपये का पंजीकरण शुल्क रखा गया है।

20 से ज्यादा देशों के विद्वान करेंगे मंथन

तीन दिनों तक चलने वाले इस मेले में कुल 10 सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें 20 से अधिक देशों से आए विद्वान अपने विचार साझा करेंगे। इन सत्रों में भारत की सांस्कृतिक परंपरा, वैश्विक कल्याण में भारतीय दर्शन की भूमिका और आधुनिक समाज में कला-साहित्य के योगदान पर गहन चर्चा होगी। आयोजकों का कहना है कि शब्दोत्सव में कला और परंपरा के ऐसे अनोखे रंग देखने को मिलेंगे, जो इससे पहले कभी नहीं देखे गए।

प्रमुख वक्ता और अतिथियों की मौजूदगी

काशी शब्दोत्सव में प्रमुख वक्ताओं में अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील अंबेडकर, अयोध्या के आचार्य मिथिलेश नंदनी शरण और कार्यक्रम के अध्यक्ष BHU के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी शामिल हैं। विद्वानों का मानना है कि यह आयोजन भारतीय संस्कृति को वैश्विक मंच पर मजबूती से प्रस्तुत करने का कार्य करेगा।

राष्ट्रीय पुस्तक प्रदर्शनी और सांस्कृतिक संध्याएं

इस आयोजन के तहत नई दिल्ली के सहयोग से राष्ट्रीय पुस्तक प्रदर्शनी भी लगाई जा रही है, जहां पाठकों को विविध विषयों पर प्रकाशित नई और दुर्लभ पुस्तकों का संग्रह देखने को मिलेगा। इसके साथ ही हर शाम लोक और शास्त्रीय परंपरा को समर्पित सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। नाट्य मंच पर राम की शक्ति पूजा, सत्यवादी हरिश्चंद्र, लोक गायन और मानस प्रसंग जैसे कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे।

विकसित भारत @2047 पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन

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BHU के पत्रकारिता एवं जनसंपर्क विभाग में भी आगामी दिनों में एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। ‘विकसित भारत @2047: शिक्षा, संस्कृति और नवाचार’ विषय पर होने वाले इस सम्मेलन में सशक्त भारत, लैंगिक समानता, सांस्कृतिक विरासत और सुशासन जैसे मुद्दों पर देश-विदेश के विद्वान मंथन करेंगे। इसके लिए पंजीकरण शुल्क 500 से 5000 रुपये तक रखा गया है।

वाराणसी में BHU बना ज्ञान का केंद्र

इन सभी आयोजनों के माध्यम से Kashi Hindu University एक बार फिर यह साबित कर रहा है कि वाराणसी सिर्फ आध्यात्मिक नगरी ही नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कृति और नवाचार का वैश्विक केंद्र भी है। मालवीय स्मृति पुष्प प्रदर्शनी और काशी शब्दोत्सव जैसे आयोजन न केवल महामना के विचारों को जीवंत रखते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय परंपरा से जोड़ने का भी काम करते हैं।

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Rajesh Srivastava
Author: Rajesh Srivastava

राजेश श्रीवास्तव एक अनुभवी और दूरदर्शी एडिटर इन चीफ हैं, जिन्हें पत्रकारिता और संपादन का गहरा अनुभव प्राप्त है। कई वर्षों की सक्रिय भूमिका के साथ, वे समाचारों की गुणवत्ता, निष्पक्षता और प्रामाणिकता बनाए रखने के लिए जाने जाते हैं। राजेश का उद्देश्य संपादकीय नेतृत्व के माध्यम से सच्ची और संतुलित जानकारी पाठकों तक पहुँचाना है। उनके मार्गदर्शन में प्रकाशित सामग्री में स्पष्टता, विश्वसनीयता और सामाजिक जिम्मेदारी का समावेश होता है, जो उन्हें एक प्रभावशाली और विशिष्ट पहचान प्रदान करता है।