पहली दिसंबर से बदलेगा Banaras Station का कोड: अब BNRS होगा नया स्टेशन कोड, यात्रियों को मिलेगी बड़ी सहूलियत
Banaras Station : पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल के लिए यह बड़ा अपडेट लेकर आया है। बनारस रेलवे स्टेशन का कोड BSBS बदलकर अब BNRS कर दिया गया है। यह नया कोड 1 दिसंबर से लागू हो जाएगा। कोड में यह बदलाव सिर्फ एक औपचारिक परिवर्तन नहीं है, बल्कि लंबे समय से यात्रियों की ओर से उठाई जा रही परेशानियों का समाधान भी है।
अब तक वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन का कोड BSB और Banaras Station का कोड BSBS होने के कारण दूसरे राज्यों या दूर-दराज के जिलों से टिकट बुक करने वाले यात्रियों में अक्सर भ्रम की स्थिति बन जाती थी। कई बार गलत स्टेशन के लिए रिजर्वेशन हो जाता था या बर्थ कन्फर्म करते समय यात्रियों को दिक्कत होती थी। ऐसे में BNRS कोड यात्रियों के लिए स्पष्टता लाएगा और टिकट बुकिंग प्रक्रिया को और आसान बनाएगा।

नए कोड BNRS से यात्रियों की सुविधा कैसे बढ़ेगी?
IRCTC से ऑनलाइन टिकट बुक करने वाले यात्रियों को अब स्टेशन खोजने में समय नहीं लगेगा। BSBS और BSB जैसे मिलते-जुलते कोड कई लोगों को कंफ्यूज करते थे, खासकर जो पहली बार वाराणसी की यात्रा कर रहे हों। लेकिन BNRS एक बिल्कुल स्पष्ट, अलग और आसानी से याद रखा जाने वाला कोड है।
अब यात्री—
- IRCTC की वेबसाइट पर BNRS खोजकर सीधे बर्थ रिजर्व कर सकेंगे
- नेशनल ट्रेन इन्क्वायरी सिस्टम में स्टेशन को तेजी से पहचान सकेंगे
- रिजर्वेशन काउंटर पर टिकट बनवाते समय भ्रम नहीं रहेगा
पूर्वोत्तर रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि यह परिवर्तन यात्रियों की सुविधा के लिए किया गया है। अब Banaras Station का हर आधिकारिक कार्य इसी नए कोड के आधार पर होगा।
मंडुवाडीह से बनारस: चार भाषाओं में लिखे नाम वाला देश का पहला स्टेशन
आपको जानकर खुशी होगी कि यह स्टेशन सिर्फ कोड बदलने की वजह से चर्चा में नहीं है, बल्कि अपनी पहचान की वजह से भी—
बनारस रेलवे स्टेशन देश का पहला ऐसा स्टेशन है जहां नाम चार भाषाओं में लिखा गया है:
- हिंदी
- अंग्रेजी
- संस्कृत
- उर्दू
स्टेशन को पहले मंडुवाडीह के नाम से जाना जाता था। 15 जुलाई 2021 को इसका नाम आधिकारिक रूप से बदलकर बनारस कर दिया गया। इस बदलाव के बाद स्टेशन के नामपट्टिकाओं पर संस्कृत में “बनारसः” लिखा गया, जो काशी की प्राचीन संस्कृति का खूबसूरत एहसास कराता है।

हाल ही में प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान, Banaras Station के द्वितीय प्रवेश द्वार पर लगी नामपट्टिका को अपडेट किया गया और इसमें उर्दू को भी शामिल किया गया। यह बदलाव वाराणसी की बहुभाषी सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है।
वाराणसी के लिए क्यों जरूरी था कोड बदलना?
अक्सर यात्रियों की ऐसी शिकायतें सामने आती थीं कि—
- टिकट गलत स्टेशन के लिए बन गया
- स्टेशन को पहचानने में दिक्कत हुई
- ऑनलाइन खोजने पर कोड मिलते-जुलते होने के कारण कन्फ्यूजन बढ़ा
इसी को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने कोड बदलने का निर्णय लिया। BNRS एक बेहद सरल, अलग और याद रखने में आसान कोड है, जो सीधे “BANA-RAS” को दर्शाता है।
यात्रियों के लिए जरूरी जानकारी
1 दिसंबर से—
- BSBS कोड पूरी तरह बंद हो जाएगा
- सभी ऑनलाइन और ऑफलाइन टिकट BNRS के आधार पर जारी होंगे
- रेलवे की सभी सूचनाओं, चार्ट, डिस्प्ले बोर्ड और अनाउंसमेंट में BNRS ही दिखेगा
जो यात्री रोजाना बनारस से यात्रा करते हैं या स्वतंत्र वाणी News से जुड़े अपडेट फॉलो करते हैं, वे इस बदलाव को लेकर काफी सकारात्मक हैं क्योंकि इससे रोजमर्रा की दिक्कतें काफी कम होंगी।
स्वतंत्र वाणी के द्वारा निष्कर्ष
Banaras Station का कोड बदलकर BNRS करना रेलवे का एक बड़ा और समझदारी भरा कदम है। इससे न केवल यात्रियों के लिए टिकट रिजर्वेशन आसान होगा, बल्कि स्टेशन की कार्यप्रणाली भी पारदर्शी और व्यवस्थित होगी। वाराणसी की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान से जुड़ा यह स्टेशन अब अपने नए कोड और बहुभाषी नामपट्टिकाओं की वजह से पूरे देश में एक अलग पहचान बना रहा है।
खबरों के लाइव अपडेट और विस्तृत विश्लेषण के लिए स्वतंत्र वाणी पर बने रहें।
Author: Preeti Dubey
कंटेंट राइटिंग में 9 महीने के अनुभव के साथ, मैं उत्तर प्रदेश, खासकर वाराणसी और चिकित्सा क्षेत्र पर केंद्रित आकर्षक और अच्छी तरह से शोध किए गए समाचार लेख लिखने में माहिर हूँ। मेरे लेखन में सटीकता और पाठक-अनुकूल कहानी कहने का मिश्रण है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि हर लेख स्पष्ट, विश्वसनीय और प्रभावशाली जानकारी प्रदान करे। पत्रकारिता और क्षेत्रीय रिपोर्टिंग के प्रति जुनूनी, मैं पाठकों को स्वास्थ्य सेवा और स्थानीय मामलों से जुड़े नवीनतम अपडेट और घटनाक्रमों से अवगत और जोड़े रखने का प्रयास करती हूँ।










