Varanasi के रामनगर में विश्व प्रसिद्ध रामलीला की भोर की आरती में श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब

Varanasi के रामनगर में विश्व प्रसिद्ध रामलीला की भोर की आरती में श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

Varanasi के रामनगर में विश्व प्रसिद्ध रामलीला की भोर की आरती में श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब, राम दरबार के दर्शन को जुटे हजारों भक्त

Varanasi News : Varanasi की पवित्र धरती पर सोमवार की सुबह भक्ति, आस्था और परंपरा का संगम देखने को मिला। रामनगर की ऐतिहासिक धरती पर आयोजित विश्व प्रसिद्ध रामनगर रामलीला की भोर की आरती में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। जब प्रभु श्रीराम, माता सीता, भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न और भक्त हनुमान के स्वरूपों ने लीला स्थल पर दर्शन दिए, तो हर ओर “हर हर महादेव” और “जय श्रीराम” के जयकारों से आसमान गूंज उठा।

चार बजे से ही श्रद्धालु समूहों में रामनगर दुर्ग से लेकर अयोध्या मैदान तक उमड़ने लगे थे। सूर्योदय से पहले ही पूरा क्षेत्र भक्तों से उमड़ पड़ा था। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी के चेहरों पर भक्ति की चमक थी। यह दृश्य मानो अयोध्या की धरती को काशी में उतार लाया हो।

Varanasi के रामनगर में विश्व प्रसिद्ध रामलीला की भोर की आरती में श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब

भक्तिमय हुआ पूरा रामनगर

रामनगर की गलियों में सोमवार की सुबह का नजारा किसी दिव्य पर्व से कम नहीं था। महिलाएं सिर पर चुनरियां ओढ़े, पुरुष पारंपरिक परिधान में आरती देखने को दौड़ते हुए जा रहे थे। किला स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। घंटों तक “बजरंगबली की जय” और “जय श्रीराम” की ध्वनि वातावरण में गूंजती रही।

आरती शुरू होते ही जब माता कौशल्या ने अयोध्या के सिंहासन पर विराजमान प्रभु श्रीराम और माता सीता की आरती उतारी, तो वहां उपस्थित हर भक्त की आंखें श्रद्धा से नम हो गईं। चारों ओर दीपों की रौशनी और शंखनाद के बीच पूरा अयोध्या मैदान राममय हो उठा।

भोर की आरती समाप्त होते ही श्रद्धालु मंच पर चढ़े कमल के फूलों को प्रसाद स्वरूप लेने के लिए उमड़ पड़े। कोई फूलों को माथे से लगा रहा था तो कोई अपनी झोली में भरकर घर ले जा रहा था। यह दृश्य आस्था के उस अनोखे प्रवाह को दिखा रहा था जो पीढ़ियों से काशी की पहचान रहा है।

5:37 बजे भोर की आरती से नहाया रामनगर

सुबह 5 बजकर 37 मिनट पर जब सूर्यदेव ने अपनी सुनहरी किरणें धरती पर बिखेरीं, तब आरती का शुभारंभ हुआ। अयोध्या के सिंहासन पर विराजमान श्रीराम के चारों ओर माता कौशल्या, सीता जी, भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न और भक्त हनुमान के स्वरूपों की भव्य झांकी देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया।

काशीराज परिवार के अनंत नारायण सिंह अपने दरबारियों के साथ पारंपरिक शाही वस्त्रों में दुर्ग से अयोध्या मैदान तक पैदल पहुंचे। वहां उन्होंने अपने पूर्वजों की परंपरा के अनुसार राम राज्याभिषेक की आरती में भाग लिया। उनके साथ मौजूद राजपरिवार के सदस्य और दरबारी भी श्रद्धा से सर झुकाए आरती में शामिल हुए। यह दृश्य काशी की उस परंपरा का जीवंत प्रमाण था जो सदियों से निरंतर चली आ रही है।

यह भी पढ़ें – Chief Minister Yogi Adityanath दो दिवसीय कार्यक्रम के लिए वाराणसी जाएँगे

रंग-बिरंगी रोशनी में नहाया अयोध्या मैदान

देर रात से ही लीलाप्रेमी श्रद्धालु अयोध्या मैदान और आसपास की इमारतों पर अपनी जगह जमा चुके थे। जैसे-जैसे भोर करीब आती गई, रंग-बिरंगी महताबियों और लाल-श्वेत रोशनी से सजा मैदान किसी दैवी नगरी की भांति चमकने लगा। आरती के समय की यह झांकी इतनी अद्भुत थी कि लोग अपने मोबाइल और कैमरे में हर पल को कैद करने लगे।

Varanasi के रामनगर में विश्व प्रसिद्ध रामलीला की भोर की आरती में श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब

आरती समाप्त होते ही भक्तों ने मंच से उतरे स्वरूपों का दर्शन किया। इस दौरान बजरंगबली श्रीराम को कंधे पर उठाए और अन्य भक्त सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न के स्वरूपों को लेकर नगर भ्रमण के लिए निकले। पूरा मार्ग “जय श्रीराम” और “हर हर महादेव” के उद्घोष से गूंजता रहा। बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सभी भक्तिमय नृत्य करते हुए इस शोभायात्रा में शामिल हुए। ऐसा लगा मानो काशी के रामनगर की धरती पर अयोध्या स्वयं उतर आई हो।

निष्कर्ष: आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम

रामनगर की रामलीला की भोर की आरती केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि काशी की प्राचीन संस्कृति, परंपरा और लोकभावना का प्रतीक है। यहां की आरती में न कोई निमंत्रण होता है, न कोई सीमा — श्रद्धालु स्वयं भक्ति के भाव से खिंचे चले आते हैं।

हर वर्ष हजारों की संख्या में लोग इस ऐतिहासिक परंपरा को देखने पहुंचते हैं। इस बार भी Varanasi की इस अनोखी भोर आरती ने पूरे देश को संदेश दिया — “जहां राम हैं, वहीं अयोध्या है।”

काशी की यह आरती न केवल धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक है बल्कि यह बताती है कि आधुनिक युग में भी हमारी परंपराएं जीवित हैं, और वाराणसी की यह रामलीला आज भी विश्व के कोने-कोने में भारतीय संस्कृति का गौरव बढ़ा रही है।

खबरों के लाइव अपडेट और विस्तृत विश्लेषण के लिए स्वतंत्र वाणी पर बने रहें।

kamalkant
Author: kamalkant

कमल कांत सिंह एक उत्साही पत्रकार और लेखक हैं, जिन्हें समाचार और कहानी कहने का गहरा जुनून है। कई वर्षों के अनुभव के साथ, वे सामाजिक मुद्दों, संस्कृति और समसामयिक घटनाओं पर गहन विश्लेषण और आकर्षक लेखन के लिए जाने जाते हैं। कमल का उद्देश्य अपने लेखन के माध्यम से सच्चाई को उजागर करना और पाठकों को प्रेरित करना है। उनकी लेखनी में स्पष्टता, विश्वसनीयता और मानवीय संवेदनाओं का समावेश होता है, जो उन्हें एक विशिष्ट आवाज प्रदान करता है।