वसंत पंचमी के पावन अवसर पर काशी में भक्तों को दर्शन; अद्भुत दृश्य देखने उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
वसंत पंचमी के पावन अवसर पर काशी के प्रसिद्ध शाहजी मंदिर में शुक्रवार को भक्ति, आस्था और दिव्यता का अद्भुत संगम देखने को मिला। टेढ़े-मेढ़े खंभों के मंदिर के नाम से विख्यात शाहजी मंदिर का वर्ष में केवल दो बार खुलने वाला ऐतिहासिक वसंती कमरा वसंत पंचमी पर भक्तों के दर्शन के लिए खोल दिया गया। जैसे ही प्राचीन वसंती कक्ष के पट खुले, वैसे ही “जय श्रीशाहबिहारी” के जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठा और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
भोर से ही प्रभु दर्शन की आस में सैकड़ों श्रद्धालु मंदिर के बाहर कतारबद्ध नजर आए। सुबह लगभग दस बजे जब वसंती कमरे के द्वार खोले गए, तो भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था। राजशाही झाड़-फानूसों से निकलती रंग-बिरंगी रोशनी, विद्युत प्रकाश की आभा और श्रीजी का अलौकिक श्रृंगार—यह दृश्य भक्तों को भावविभोर कर गया।

झाड़-फानूसों की रोशनी में दमकता वसंती कक्ष
शाहजी मंदिर का वसंती कमरा अपनी भव्यता और ऐतिहासिक महत्व के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। यहां लगे विशाल, प्राचीन झाड़-फानूस जब एक साथ प्रकाशित होते हैं, तो पूरा कक्ष स्वर्णिम और रंगीन प्रकाश से नहाया हुआ प्रतीत होता है। वसंत पंचमी के अवसर पर इन झाड़ों से निकलती रोशनी ने मंदिर के प्राचीन स्थापत्य को और भी जीवंत कर दिया।
सेवायत शाह प्रशांत कुमार ने प्रभु शाहबिहारी का विशेष वसंतकालीन श्रृंगार किया। पुष्पों, वस्त्रों और आभूषणों से सजे श्रीजी के दर्शन कर श्रद्धालु स्वयं को धन्य मानते नजर आए। भक्तों का कहना था कि ऐसा दिव्य दृश्य जीवन में विरले ही देखने को मिलता है।
देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु
पंचमी पर शाहजी मंदिर में केवल स्थानीय श्रद्धालु ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से आए भक्त भी दर्शन के लिए पहुंचे। कई श्रद्धालु तो आधी रात से ही मंदिर परिसर में डटे रहे। मंदिर प्रशासन द्वारा व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे, ताकि दर्शन सुचारू रूप से संपन्न हो सकें।
श्रद्धालुओं ने बताया कि वसंती कमरे में प्रभु के दर्शन करना वर्षों की साधना के समान है। कुछ भक्तों ने इसे अपने जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताया।
शाम को फिर होंगे श्रीजी के दर्शन
मंदिर प्रबंधन की ओर से जानकारी दी गई कि शनिवार को सायं पांच बजे से रात नौ बजे तक एक बार फिर वसंती कमरे में श्रीजी भक्तों को दर्शन देंगे। इसे लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। कई भक्त दोबारा दर्शन के लिए रुकने की योजना बना रहे हैं।
वसंती कमरे का विशेष धार्मिक महत्व
शाहजी मंदिर का वसंती कमरा अत्यंत प्राचीन और विशिष्ट धार्मिक महत्व रखता है। मान्यता है कि प्रभु शाहबिहारी वर्ष में केवल दो बार—वसंत पंचमी और शरद ऋतु के विशेष अवसर पर—इस कक्ष में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी कारण इन दोनों अवसरों पर मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।
वसंत पंचमी पर आस्था का अनुपम उत्सव
पंचमी को ज्ञान, संगीत और आध्यात्मिक चेतना का पर्व माना जाता है। इस दिन पीले वस्त्र, पुष्पों की सजावट और आध्यात्मिक उल्लास हर ओर दिखाई देता है। शाहजी मंदिर में पंचमी का यह आयोजन काशी की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि पंचमी पर वसंती कमरे में श्रीजी के दर्शन मात्र से मन को अद्भुत शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। यही कारण है कि हर वर्ष इस अवसर पर भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ता है।
आस्था, परंपरा और भव्यता का संगम
शाहजी मंदिर का वसंती कक्ष केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि काशी की परंपरा, स्थापत्य कला और आस्था का प्रतीक है। वसंत पंचमी पर खुला यह कक्ष भक्तों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं होता।
इस वर्ष भी वसंत पंचमी पर शाहजी मंदिर का वसंती कमरा श्रद्धा, भव्यता और आध्यात्मिक आनंद का केंद्र बन गया, जहां प्रभु दर्शन कर भक्त भावविभोर होकर लौटे।
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Author: Preeti Dubey
कंटेंट राइटिंग में 9 महीने के अनुभव के साथ, मैं उत्तर प्रदेश, खासकर वाराणसी और चिकित्सा क्षेत्र पर केंद्रित आकर्षक और अच्छी तरह से शोध किए गए समाचार लेख लिखने में माहिर हूँ। मेरे लेखन में सटीकता और पाठक-अनुकूल कहानी कहने का मिश्रण है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि हर लेख स्पष्ट, विश्वसनीय और प्रभावशाली जानकारी प्रदान करे। पत्रकारिता और क्षेत्रीय रिपोर्टिंग के प्रति जुनूनी, मैं पाठकों को स्वास्थ्य सेवा और स्थानीय मामलों से जुड़े नवीनतम अपडेट और घटनाक्रमों से अवगत और जोड़े रखने का प्रयास करती हूँ।










