काशी Vishwanath Dham में शिवगर्जना की गूंज: ढोल-नगाड़ों, वैदिक परंपरा और भक्ति से सराबोर हुआ धाम
काशी Vishwanath Dham में रविवार की सुबह भक्ति, परंपरा और आध्यात्मिक ऊर्जा का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने हर श्रद्धालु को मंत्रमुग्ध कर दिया। ढोल-नगाड़ों की ताल, मंत्रों की अनुगूंज और भगवाधारी युवाओं द्वारा बजाए जा रहे डमरू ने पूरे परिसर को शिवमय बना दिया। “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंजता धाम मानो शिवतत्व को साकार कर रहा था। यह पूरा आयोजन भारतवर्ष के मूर्धन्य वैदिक विद्वान प्रातःस्मरणीय सम्राट श्रीकृष्णशास्री गोडशे गुरुजी के जन्मशताब्दी वर्ष को समर्पित था।
पहली बार काशी में शुक्ल यजुर्वेद माध्यंदिन शाखा का एकाकी दंडक्रम पारायण
अहिल्या नगर, महाराष्ट्र की श्रुतिस्मृति ज्ञान मंदिर वेद पाठशाला द्वारा 14 अक्टूबर 2025 से 30 नवम्बर तक एक विशेष वैदिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। राम घाट स्थित प्रसिद्ध श्रीवल्लभराम शालिग्राम सांगवेद विद्यालय में पद्मश्री परमपूज्य गणेश्वरशास्री द्राविड़ गुरुजी और विश्वेश्वर शास्री द्राविड़ के सान्निध्य में यह आयोजन सम्पन्न हुआ। मुख्य आकर्षण रहा—वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे घनपाठी का एकाकी दंडक्रम पारायण।
केवल 19 वर्ष की आयु में इस अत्यंत कठिन शुक्ल यजुर्वेद माध्यंदिन शाखा का दंडक्रम पारायण पूरा किया गया, जो काशी के धार्मिक इतिहास में पहली बार हुआ। उनके पिता वेदमूर्ति महेश चंद्रकांत रेखे द्वारा स्थापित वेदपाठशाला की तपःपूर्ति वर्ष स्मृति में यह अनूठी साधना सम्पन्न हुई, जो गुरु-शिष्य परंपरा के अनुपम समर्पण का प्रतीक बनी।
दंडक्रम — सबसे कठिन वैदिक विधि
वैदिक मौखिक परंपरा में आठ विकृतियों में ‘दंडक्रम’ को सबसे कठिन और संगठित माना जाता है। इस विधि में वेद मंत्रों का अनुलोम-विलोम क्रम, विशेष स्वर-विन्यास और शुद्ध उच्चारण के साथ पाठ किया जाता है, ताकि वेदवाणी की अक्षुण्णता बनी रहे। पूरी प्रक्रिया अत्यंत जटिल, तपःसाधना और गहन अभ्यास से पूर्ण होती है। कई वैदिक विद्वानों ने इसे काशी और देश दोनों के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया। समापन दिवस पर सांस्कृतिक महोत्सव: शिवगर्जना की धुनों पर थिरका धाम
आयोजन के अंतिम दिन काशी Vishwanath Dham में एक भव्य सांस्कृतिक-संगीतमय उत्सव का आयोजन किया गया। नागपुर की “शिवगर्जना बहुउद्देशीय संस्था, ढोल-ताशा व ध्वज पथक” के 70 सदस्यीय दल ने अपनी विशेष प्रस्तुति “शिवांजलि” से अद्भुत वातावरण निर्मित कर दिया। जैसे ही ढोल-ताशों की गूंज धाम में फैलनी शुरू हुई, परिसर शिवनाद से भर उठा। श्रद्धालुओं ने कहा कि यह अनुभव ऐसा था जैसे स्वयं भगवान शिव की उपस्थिति का स्पर्श मिल रहा हो। कई लोग सहज ही ताल पर थिरकने लगे।
छोटे कलाकारों ने जीता दिल
- इस दल की खास बात यह रही कि बड़े कलाकारों के साथ-साथ छोटे बच्चे भी पूरी निपुणता के साथ ढोल-ताशा बजाते नजर आए।
- इन बच्चों के उत्साह, लय और ऊर्जा ने पूरा माहौल जीवंत कर दिया।
- श्रद्धालुओं ने इसे परंपरा, अनुशासन और भक्ति का अद्वितीय संगम बताया।
श्रद्धालुओं में रोमांच—जयघोषों से गूंजा धाम
प्रत्येक ताल पर चारों ओर से “हर-हर महादेव” के गगनभेदी उद्घोष सुनाई दे रहे थे।
श्रद्धालुओं ने इस प्रस्तुति को दिव्य अनुभव बताते हुए कहा:
“ऐसा लगा जैसे शिवभक्ति हृदय में उतर रही हो।”
कुछ श्रद्धालु तो भावविभोर होकर आंखों में आंसू लिए प्रस्तुति देखते रहे।
सीईओ विश्व भूषण मिश्र बोले—‘यह केवल सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं, भक्ति का माध्यम है’
काशी Vishwanath Dham के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्र ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा :
“नागपुर से आए शिवगर्जना संस्था के कलाकारों ने आज धाम में अद्भुत माहौल निर्मित किया। ढोल-ताशा की यह प्रस्तुति केवल सांस्कृतिक नहीं, बल्कि श्रद्धा और भक्ति का सशक्त माध्यम है। छोटे बच्चों की अनुशासनपूर्ण सहभागिता प्रेरणादायक है। ऐसे आयोजन काशी की आध्यात्मिक पहचान को और व्यापक बनाते हैं।”
उन्होंने कहा कि वर्ष 2025, शुक्ल यजुर्वेद माध्यंदिन शाखा के महान् आचार्य स्व. श्रीकृष्णशास्त्री गोडशे गुरुजी का जन्मशताब्दी वर्ष है, इसलिए यह आयोजन ऐतिहासिक, शैक्षिक तथा सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
काशी Vishwanath Dham—आध्यात्मिक ऊर्जा से उजला एक ऐतिहासिक क्षण
- रविवार का यह दिन काशी Vishwanath Dham के लिए केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि एक ऐसा ऐतिहासिक क्षण बन गया, जिसमें भक्ति, परंपरा, वैदिक ज्ञान और संगीत का दुर्लभ संगम देखने को मिला।
- ढोल-नगाड़ों की थाप, युवा भगवाधारी साधकों का जोश और मंत्रोच्चार की पवित्रता ने धाम को ऐसी आध्यात्मिक आभा से भर दिया, जिसकी स्मृति श्रद्धालुओं के मन में लंबे समय तक बस गई।
- काशी Vishwanath Dham की यह शिवगर्जना आने वाले वर्षों तक काशी की सांस्कृतिक-धार्मिक चेतना में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में याद की जाएगी।
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Author: Preeti Dubey
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