Varanasi में चल रही 69वीं राष्ट्रीय विद्यालयीय तीरंदाजी प्रतियोगिता

Varanasi में चल रही 69वीं राष्ट्रीय विद्यालयीय तीरंदाजी प्रतियोगिता

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स्कूली तीरंदाजी प्रतियोगिता में बिहार का दबदबा: आर्यन ने 720 में से 699 अंक हासिल कर जीता स्वर्ण, वैदेही भी चमकी

Varanasi में चल रही 69वीं राष्ट्रीय विद्यालयीय तीरंदाजी प्रतियोगिता (अंडर-14) में गुरुवार का दिन बिहार और सीबीएसई बोर्ड के खिलाड़ियों के नाम रहा। डॉ. भीमराव अंबेडकर क्रीड़ा संकुल, बड़ा लालपुर में आयोजित तीन दिवसीय प्रतियोगिता के दूसरे दिन रिकर्व और इंडियन राउंड में खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन कर दर्शकों का दिल जीत लिया। प्रतियोगिता से जुड़ी ये खबरें आज पूरे शहर में चर्चा का विषय रहीं, जिससे Varanasi सर्किट में खेलों की ऊर्जा और उत्साह और बढ़ गया।

Varanasi में चल रही 69वीं राष्ट्रीय विद्यालयीय तीरंदाजी प्रतियोगिता

रिकर्व राउंड: बिहार के आर्यन कुमार का दबदबा

रिकर्व स्पर्धा के ओवरऑल राउंड में बिहार के प्रतिभाशाली तीरंदाज आर्यन कुमार ने नया इतिहास रचते हुए 720 में से 699 अंक हासिल कर स्वर्ण पदक जीता। उनकी सटीक निशानेबाजी और लगातार प्रदर्शन ने मैदान में मौजूद हर दर्शक को प्रभावित किया। आर्यन ने 72 तीर चलाकर यह स्कोर बनाया, जो इस प्रतियोगिता के सबसे शानदार प्रदर्शनों में से एक माना जा रहा है।

दिल्ली के वंशी ने 698 अंक लेकर रजत पदक पर कब्जा किया, जबकि राजस्थान के विवेक कुमार ने 696 अंक के साथ कांस्य पदक हासिल किया। मुकाबला बेहद कड़ा था, लेकिन आर्यन की शांति, कौशल और एकाग्रता ने उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग खड़ा किया।

बालिका वर्ग: वैदेही ने स्वर्ण जीतकर किया प्रभावित

बालिका वर्ग में सीबीएसई की होनहार तीरंदाज वैदेही ने 696 अंक हासिल कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उनकी प्रदर्शन क्षमता और संयम ने सभी अधिकारियों और दर्शकों को प्रभावित किया। झारखंड की खुशी कुमारी 695 अंक के साथ रजत पदक और महाराष्ट्र की आर. दत्ता ने 677 अंक के साथ कांस्य पदक जीता।

बालिका वर्ग में झारखंड के खिलाड़ियों ने भी बेहतरीन खेल दिखाया। झारखंड की प्रथम, सुनीता और सोयम ने क्रमशः स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीता, जिससे टीम की मजबूती का अंदाजा लगाया जा सकता है।

Varanasi में चल रही 69वीं राष्ट्रीय विद्यालयीय तीरंदाजी प्रतियोगिता

इंडियन राउंड: आयुष कुमार ने जीता स्वर्ण

इंडियन राउंड में भी बिहार का प्रदर्शन शानदार रहा। बिहार के ही आयुष कुमार ने 690 अंक हासिल कर स्वर्ण पदक जीता। उनकी निशानेबाजी और स्थिरता ने प्रतियोगिता को और रोमांचक बना दिया। खिलाड़ियों की इस क्षमता को देखकर आयोजक मंडल ने भी उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

पूरी प्रतियोगिता उत्तर प्रदेश तीरंदाजी संघ के संयुक्त सचिव योगेंद्र राणा और चीफ रेफरी बलराम सिंह यादव की देखरेख में आयोजित की जा रही है। वहीं वरिष्ठ उपाध्यक्ष राम शकल, आईपीएस प्रवीण कुमार, और विपिन सिंह सुबह सत्र के मुख्य और विशिष्ट अतिथि रहे। शाम को हरेंद्र राय और रेखा पटेल ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया।

समापन समारोह में खिलाड़ियों को सम्मानित करेंगे मंत्री अनिल राजभर

सह-आयोजन सचिव डॉ. एके सिंह के अनुसार प्रतियोगिता का समापन शुक्रवार, 21 नवंबर को शाम तीन बजे किया जाएगा। इस अवसर पर यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर खिलाड़ियों को सम्मानित करेंगे। इसके साथ ही ओवरऑल विजेता और उपविजेता टीमों को ट्रॉफी भी प्रदान की जाएगी। समारोह को भव्य और यादगार बनाने की तैयारी पूरी कर ली गई है।

जादूगर ने खिलाड़ियों को बताया एकाग्रता का रहस्य

दूसरे दिन की सबसे अनोखी खासियत यह रही कि स्कूली खेलों की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में एक जादूगर ने खिलाड़ियों से मुलाकात कर उन्हें एकाग्रता का रहस्य समझाया। उन्होंने कहा कि चाहे खेल हो या जीवन का कोई भी क्षेत्र—सफलता का आधार एकाग्रता ही है। अगर मन केंद्रित नहीं होगा, तो सफलता दूर हो जाती है। खिलाड़ी उनके अनुभवों और सुझावों से खासे प्रभावित नजर आए।

Varanasi में खेलों की रौनक

Varanasi में यह प्रतियोगिता न सिर्फ खेल प्रतिभा को मंच दे रही है, बल्कि शहर में खेल संस्कृति को भी मजबूत कर रही है। Varanasi में आज तीरंदाजी प्रतियोगिता की खबरें सबसे अधिक पढ़ी गईं, जिससे साफ है कि दर्शक युवा तीरंदाजों की उपलब्धियों को लेकर काफी उत्साहित हैं।

खबरों के लाइव अपडेट और विस्तृत विश्लेषण के लिए स्वतंत्र वाणी पर बने रहें।

Rajesh Srivastava
Author: Rajesh Srivastava

राजेश श्रीवास्तव एक अनुभवी और दूरदर्शी एडिटर इन चीफ हैं, जिन्हें पत्रकारिता और संपादन का गहरा अनुभव प्राप्त है। कई वर्षों की सक्रिय भूमिका के साथ, वे समाचारों की गुणवत्ता, निष्पक्षता और प्रामाणिकता बनाए रखने के लिए जाने जाते हैं। राजेश का उद्देश्य संपादकीय नेतृत्व के माध्यम से सच्ची और संतुलित जानकारी पाठकों तक पहुँचाना है। उनके मार्गदर्शन में प्रकाशित सामग्री में स्पष्टता, विश्वसनीयता और सामाजिक जिम्मेदारी का समावेश होता है, जो उन्हें एक प्रभावशाली और विशिष्ट पहचान प्रदान करता है।