Dalmandi Choudikaran: भवन तोड़ने पहुंची टीम का विरोध

Dalmandi Choudikaran: भवन तोड़ने पहुंची टीम का विरोध, हिजाब पहनी महिलाओं का धरना; कहासुनी के बाद लौटी प्रशासनिक टीम

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Dalmandi Choudikaran: भवन तोड़ने पहुंची टीम का विरोध, हिजाब पहनी महिलाओं का धरना; कहासुनी के बाद लौटी प्रशासनिक टीम

Varanasi में चल रही Dalmandi Choudikaran परियोजना एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। मंगलवार को वीडीए (विकास प्राधिकरण) और पीडब्ल्यूडी की संयुक्त टीम अवैध घोषित किए गए भवनों को गिराने पहुँची, लेकिन दुकानदारों और स्थानीय लोगों के जबरदस्त विरोध के कारण कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी। खास बात यह रही कि विरोध में हिजाब पहने महिलाओं और बच्चों ने भी सड़क पर उतरकर धरना दिया, जिसके चलते प्रशासन को कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए वापस लौटना पड़ा।

तीन दिन की नोटिस अवधि खत्म, टीम पहुंची ध्वस्तीकरण करने

मंगलवार दोपहर करीब 1 बजे वीडीए, पीडब्ल्यूडी और पुलिस की टीम Dalmandi स्थित तीन मंजिला भवन के मालिक नदीम अनवर के आवास पर पहुंची। इस भवन में कुल 14 दुकानें चलती हैं। प्रशासन पहले ही भवन खाली करने के लिए 3 दिन का नोटिस दे चुका था, जिसकी अवधि सोमवार को समाप्त हो गई थी। अधिकारियों ने भवन को अवैध बताते हुए तोड़ने की प्रक्रिया शुरू करनी चाही, लेकिन मकान मालिक और दुकानदारों ने इसका कड़ा विरोध किया। दुकानदारों ने अदालत का आदेश दिखाते हुए दावा किया कि उनके पास स्टे ऑर्डर है और जब तक अदालत का निर्णय नहीं आता, किसी भी प्रकार की ध्वस्तीकरण कार्रवाई नहीं की जा सकती।

इस दौरान एडीएम सिटी आलोक वर्मा, वीडीए सचिव वेद प्रकाश मिश्रा और पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता केके सिंह के साथ दुकानदारों की लंबी बहस चली। दुकानदारों का कहना था कि अचानक दुकानों को तोड़ देने से उनका रोजगार खत्म हो जाएगा और प्रशासन कोई विकल्प नहीं दे रहा।

दूसरे भवन पर भी विरोध, महिलाएं और बच्चे भी सड़कों पर उतरे

Dalmandi Choudikaran: भवन तोड़ने पहुंची टीम का विरोध, हिजाब पहनी महिलाओं का धरना; कहासुनी के बाद लौटी प्रशासनिक टीम

पहले स्थान पर विरोध के बाद टीम उस्मान के छह मंजिला भवन की तरफ बढ़ी। यह भवन भी Dalmandi Choudikaran योजना में ध्वस्तीकरण के लिए चिन्हित किया गया है और इसमें 15 दुकानें हैं। लेकिन यहां पहुंचते ही टीम को और भी अधिक विरोध का सामना करना पड़ा। हिजाब पहने महिलाओं ने बच्चों के साथ मिलकर सड़क पर ही धरना दे दिया। महिलाएं रोती हुई दिखीं और उन्होंने कहा कि बिना मुआवजा दिए घर और दुकानें तोड़ना सीधा उत्पीड़न है। महिलाओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने पुनर्वास या वैकल्पिक व्यवस्था की कोई स्पष्ट योजना नहीं बताई। स्थिति को बिगड़ता देख प्रशासनिक टीम को वापस लौटना पड़ा।

पूरी मार्केट बंद, युवकों की नारेबाजी

प्रशासन के लौटने के बाद भी तनाव कम नहीं हुआ। Dalmandi के बाजार में दुकानदारों ने अपनी दुकानों को बंद कर दिया और कई युवक नारेबाजी करते नजर आए। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक उचित मुआवजा और पुनर्वास योजना की घोषणा नहीं होती, वे कार्रवाई का विरोध जारी रखेंगे।

महिलाओं का धरना जारी, ध्वस्तीकरण को ‘अत्याचार’ बताया

अधिकारियों के जाने के बाद भी हिजाब पहने महिलाएं धरने पर बैठी रहीं। उनका कहना है कि Dalmandi Choudikaran के नाम पर प्रशासन उनके घरों और दुकानों को बिना किसी उचित योजना के गिराने की कोशिश कर रहा है। महिलाओं ने इसे “अत्याचार” बताते हुए कहा :

“हमारे छोटे-छोटे बच्चे हैं। बिना मुआवजे के हम कहां जाएंगे? हमारी रोजी-रोटी यही है।”

महिलाओं ने यह भी कहा कि Dalmandi में पीढ़ियों से बसे परिवारों को उखाड़कर सड़क Choudikaran करना समाधान नहीं है। अगर सरकार सच में विकास चाहती है, तो पहले प्रभावित लोगों का पुनर्वास सुनिश्चित करना चाहिए।

Dalmandi Choudikaran को लेकर बढ़ा विवाद

इस पूरे घटनाक्रम के बाद Dalmandi Choudikaran परियोजना को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकार विकास के नाम पर बिना संवाद और योजना के कार्रवाई करना चाहती है। दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि सड़क Choudikaran शहर के सुचारू यातायात के लिए आवश्यक है, और अवैध निर्माणों पर कार्रवाई जारी रहेगी। हालांकि मंगलवार की घटनाओं के बाद साफ है कि बिना संवाद और समाधान के ध्वस्तीकरण करना संभव नहीं होगा। महिलाओं और दुकानदारों के विरोध ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि Dalmandi Choudikaran केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं का भी मुद्दा है।

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Preeti Dubey
Author: Preeti Dubey

कंटेंट राइटिंग में 9 महीने के अनुभव के साथ, मैं उत्तर प्रदेश, खासकर वाराणसी और चिकित्सा क्षेत्र पर केंद्रित आकर्षक और अच्छी तरह से शोध किए गए समाचार लेख लिखने में माहिर हूँ। मेरे लेखन में सटीकता और पाठक-अनुकूल कहानी कहने का मिश्रण है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि हर लेख स्पष्ट, विश्वसनीय और प्रभावशाली जानकारी प्रदान करे। पत्रकारिता और क्षेत्रीय रिपोर्टिंग के प्रति जुनूनी, मैं पाठकों को स्वास्थ्य सेवा और स्थानीय मामलों से जुड़े नवीनतम अपडेट और घटनाक्रमों से अवगत और जोड़े रखने का प्रयास करती हूँ।