Dal Mandi Choudikaran: व्यापारियों की मांग—बेनियाबाग में बसा दो, प्रशासन ने सुझाया लोहता-मोहनसराय; टकराव के आसार तेज
Varanasi के Dal Mandi Choudikaran को लेकर प्रशासन और व्यापारियों के बीच विवाद कम होने का नाम नहीं ले रहा। गुरुवार को दालमंडी के कुछ प्रमुख व्यापारी नेताओं ने सर्किट हाउस में प्रशासन और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों से मुलाकात की। बैठक का उद्देश्य था—चौड़ीकरण के दौरान प्रभावित दुकानदारों के पुनर्वास की उचित व्यवस्था। लेकिन बातचीत के बाद भी न तो व्यापारी राज़ी हुए और न ही प्रशासन अपनी योजना बदलने को तैयार दिखा। इस वजह से दालमंडी का यह मुद्दा अब और गर्माता जा रहा है।
बेनियाबाग में मार्केट की मांग पर अड़े व्यापारी
बैठक में व्यापारियों ने साफ कहा कि उनकी दुकानें तोड़ने से पहले उन्हें व्यवस्थित रूप से नई दुकानें दी जाएं। जिनकी दुकानें पहले ही टूट चुकी हैं या आने वाले दिनों में टूटने वाली हैं, उनके सामने रोज़गार का संकट खड़ा हो गया है।व्यापारियों की मुख्य मांग है कि बेनियाबाग में नया मार्केट बनाकर उन्हें वहीं दुकानें आवंटित की जाएं, क्योंकि दालमंडी के अधिकांश ग्राहकों का दायरा शहर के भीतरी हिस्सों तक सीमित है। यदि उन्हें शहर से बाहर भेज दिया गया, तो उनका कारोबार पूरी तरह प्रभावित हो जाएगा।
व्यापारी मोहम्मद फैसल ने बताया कि अधिकारियों के साथ लंबी बैठक के दौरान सभी समस्याएं विस्तार से रखी गईं। “हमने साफ कहा कि दालमंडी से दूर जाकर व्यापार करना हमारे लिए संभव नहीं। ग्राहक वहां तक नहीं पहुंचेंगे और हमारा कारोबार खत्म हो जाएगा।”
प्रशासन का जवाब—लोहता और मोहनसराय में तैयार हैं दुकानें
प्रशासन की ओर से बैठक में बताया गया कि लोहता और मोहनसराय क्षेत्र में मार्केट तैयार किए जा रहे हैं, जहां प्रभावित दुकानदारों को दुकानें दी जा सकती हैं।हालांकि यह प्रस्ताव व्यापारियों को रास नहीं आया। दुकानदारों का कहना है कि दोनों स्थान शहरी सीमा से बाहर हैं और वहां बसने से व्यापार को भारी नुकसान होगा।
दुकानदार नजमी सुल्तान ने कहा, “हमने डीएम साहब से साफ कहा कि हम शहर के बाहर नहीं जाएंगे। ग्राहकों तक पहुंचना मुश्किल हो जाएगा। दालमंडी के पास ही हमें बसाया जाना चाहिए।”
व्यापारी कायनात वारसी ने भी यही बात दोहराई कि दालमंडी की जगह शहर के बीचोंबीच है, इसलिए पुनर्वास भी नजदीकी इलाके में होना चाहिए।
ध्वस्तीकरण रोकने की भी रखी मांग
व्यापारियों ने प्रशासन से यह भी मांग की कि जब तक उन्हें उचित विकल्प नहीं मिल जाता, तब तक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रोक दी जाए।उन्होंने कहा कि बिना पुनर्वास किए दुकानों को तोड़ना निंदनीय है और इससे हजारों लोगों की रोज़ी-रोटी प्रभावित हो रही है। “पहले हमें बसाया जाए, फिर चाहे जितना चौड़ीकरण कर लीजिए,” व्यापारियों की यही मांग रही।
35 दुकानों पर लगे लाल निशान, बढ़ी चिंता
स्वतंत्र वाणी News की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को पीडब्ल्यूडी की टीम फोर्स के साथ दालमंडी पहुंची और दुकानों की नापी की। कुल 35 दुकानों पर लाल निशान लगाए गए, जिसके बाद व्यापारियों की बेचैनी और बढ़ गई।टीम ने एक भवन के दस्तावेज भी सत्यापन के लिए कैंप कार्यालय में जमा कराए।इसी दौरान पीडब्ल्यूडी और वीडीए के अधिकारी चौक से नई सड़क तक मुनादी भी करते रहे, ताकि जिन लोगों के मामलों पर कोर्ट का स्टे है, वे समय रहते अपने दस्तावेज दिखा सकें। कई दुकान मालिक कोर्ट के आदेश लेकर मौके पर पहुंचे और अधिकारियों को कागजात दिखाते नजर आए।
चौड़ीकरण तय—लेकिन पुनर्वास पर टकराव जारी
अधिकारियों ने बैठक में यह स्पष्ट कर दिया कि दालमंडी का चौड़ीकरण हर हाल में होगा और जिन भवनों को पहले ही चिह्नित किया जा चुका है, उन्हें तोड़ा जाएगा।लेकिन व्यापारी यह कहकर अड़े हुए हैं कि जब तक उन्हें दालमंडी के आसपास पुनर्वास नहीं मिलता, वे कोई भी प्रस्ताव स्वीकार नहीं करेंगे।
अभी समाधान दूर—तनाव बढ़ने की आशंका
दालमंडी Varanasi का एक प्रमुख व्यापारिक इलाका है, जहां वर्षों से सैकड़ों दुकानें चल रही हैं। चौड़ीकरण परियोजना शहर के विकास के लिए अहम मानी जा रही है, लेकिन व्यापारियों का डर भी जायज़ है कि नई जगह जाने से उनका व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित होगा।प्रशासन और व्यापारियों के बीच यह टकराव अभी खत्म होने के आसार नहीं दिख रहे। दोनों पक्षों के अपने तर्क हैं और समाधान तभी निकलेगा जब पुनर्वास का मुद्दा संवेदनशीलता के साथ सुलझाया जाएगा।
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Author: Preeti Dubey
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