भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच तुर्की और अजरबैजान का बहिष्कार, भारतीय पर्यटकों में नाराजगी, बुकिंग में भारी गिरावट
भारत-पाकिस्तान तनाव के चलते भारतीयों में तुर्की और अजरबैजान को लेकर गहरा असंतोष देखने को मिल रहा है। हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले और इसके जवाब में भारत द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद, तुर्की और अजरबैजान ने खुलकर पाकिस्तान का समर्थन किया। इसके बाद से भारत में इन दोनों देशों का बहिष्कार करने की मांग तेजी से बढ़ी है।

भारतीय पर्यटकों ने अब तुर्की और अजरबैजान की यात्रा को टालना शुरू कर दिया है और अन्य देशों की ओर रुख कर रहे हैं। भारत पाकिस्तान तनाव का असर अब अंतरराष्ट्रीय पर्यटन उद्योग पर भी पड़ता नजर आ रहा है।
तुर्की और अजरबैजान ने क्यों बढ़ाई भारत की नाराजगी?
भारत पाकिस्तान तनाव तब और अधिक गहरा गया जब तुर्की और अजरबैजान ने सार्वजनिक रूप से पाकिस्तान का समर्थन किया। पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की मौत के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर में स्थित आतंकवादी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की।
इस घटना के बाद अजरबैजान ने एक आधिकारिक बयान जारी कर पाकिस्तान के पक्ष को सही ठहराया, जबकि तुर्की ने पहलगाम हमले की अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग करते हुए पाकिस्तान की बात का समर्थन किया। तुर्की का यह रुख इसलिए भी चिंताजनक रहा क्योंकि वह पहले भी पाकिस्तान को हथियारों की आपूर्ति कर चुका है।
भारत में तुर्की और अजरबैजान के बहिष्कार की मांग तेज
भारत पाकिस्तान तनाव के बीच अब भारत में तुर्की और अजरबैजान के पर्यटन को लेकर बहिष्कार की लहर चल पड़ी है। प्रमुख ट्रैवल कंपनियों जैसे MakeMyTrip और EaseMyTrip ने बताया कि इन दोनों देशों के लिए बुकिंग में भारी गिरावट आई है।
MakeMyTrip के प्रवक्ता ने बताया, “पिछले एक हफ्ते में तुर्की और अजरबैजान की बुकिंग में 60% की गिरावट आई है और रद्द करने की दर 250% तक बढ़ गई है।”
EaseMyTrip के सीईओ रिकांत पिट्टी ने कहा, “हमने देखा है कि यात्री अब तुर्की और अजरबैजान की जगह जॉर्जिया, सर्बिया, ग्रीस, थाईलैंड और वियतनाम की ओर जा रहे हैं। तुर्की में 22% और अजरबैजान में 30% तक रद्दीकरण हुआ है।”
इससे साफ है कि भारत पाकिस्तान तनाव का सीधा असर अब आम पर्यटकों के फैसलों पर पड़ रहा है।
टूरिज्म इंडस्ट्री ने भी लिया सख्त रुख
भारत की टूरिज्म इंडस्ट्री ने भी तुर्की और अजरबैजान के खिलाफ एकजुटता दिखाई है। EaseMyTrip के संस्थापक और चेयरमैन निशांत पिट्टी ने ‘X’ (पूर्व ट्विटर) पर लिखा:
“पिछले साल 2.87 लाख भारतीयों ने तुर्की की यात्रा की और 2.43 लाख ने अजरबैजान का दौरा किया। जब ये देश भारत के खिलाफ जाकर पाकिस्तान का समर्थन करते हैं, तो क्या हमें इनके पर्यटन को बढ़ावा देना चाहिए?”
Ixigo जैसी ट्रैवल कंपनियों ने भी ऐलान किया है कि वे फिलहाल तुर्की, अजरबैजान और चीन के लिए बुकिंग बंद कर रही हैं। यह स्पष्ट संकेत है कि भारत पाकिस्तान तनाव केवल कूटनीतिक मोर्चे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर व्यापार और पर्यटन जैसे क्षेत्रों तक पहुंच चुका है।
भारतीय पर्यटन जगत की नैतिक भूमिका
भारतीय वाणिज्य मंडल (Indian Chamber of Commerce) की पर्यटन समिति के चेयरमैन सुभाष गोयल ने कहा:
“हम ऐसे पर्यटन के पक्ष में हैं जो देश के मूल्यों के अनुरूप हो। तुर्की और अजरबैजान जैसे देशों द्वारा पाकिस्तान के समर्थन के विरोध में कई संगठनों ने एकजुट होकर बहिष्कार की मांग की है। पर्यटन शांति और सौहार्द का साधन होना चाहिए, न कि भारत विरोधी देशों के समर्थन का।”
यह बयान स्पष्ट करता है कि भारत में अब केवल सरकारी नीतियाँ नहीं, बल्कि आम लोग और व्यावसायिक संगठन भी भारत पाकिस्तान तनाव के मुद्दे पर सजग हो चुके हैं।
भारत-पाकिस्तान तनाव की पृष्ठभूमि: ऑपरेशन सिंदूर
22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए। इसके जवाब में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम से एक बड़ा सैन्य अभियान चलाया। इस अभियान में पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर में स्थित आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया गया।
भारत पाकिस्तान तनाव इस ऑपरेशन के बाद चरम पर पहुंच गया। भारत ने मुज़फ़्फराबाद, कोटली, बहावलपुर जैसे स्थानों पर आतंकियों के ठिकानों पर हमले किए। हालांकि 10 मई को दोनों देशों के बीच एक युद्धविराम की “समझ” बनी, लेकिन तनाव की स्थिति अब भी बनी हुई है।
तुर्की और अजरबैजान की भूमिका पर सवाल
तुर्की और अजरबैजान की भूमिका अब कूटनीतिक सवालों के घेरे में आ गई है। तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआन पहले भी कश्मीर मुद्दे पर कई बार पाकिस्तान का समर्थन कर चुके हैं। वहीं अजरबैजान ने हाल के वर्षों में पाकिस्तान के साथ अपने सैन्य और आर्थिक संबंधों को गहरा किया है।
भारत पाकिस्तान तनाव के इस संवेदनशील दौर में जब भारत आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कदम उठा रहा है, तब इन दोनों देशों का पाकिस्तान के पक्ष में खड़ा होना भारतीय जनमानस को स्वीकार्य नहीं है।
निष्कर्ष: भारतीयों की बदलती सोच
अब यह स्पष्ट है कि भारत के लोग केवल खूबसूरत लोकेशन्स देखकर पर्यटन स्थल नहीं चुनते, बल्कि वे यह भी देखते हैं कि वह देश भारत पाकिस्तान तनाव जैसे मुद्दों पर कहां खड़ा है। तुर्की और अजरबैजान का बहिष्कार यह दिखाता है कि भारत के लोग देश के हितों को सर्वोपरि मानते हैं।
– पर्यटन केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वाभिमान से भी जुड़ा हुआ है। भारत पाकिस्तान तनाव के इस दौर में जब देश की संप्रभुता और सुरक्षा दांव पर है, तब तुर्की और अजरबैजान जैसे देशों के प्रति भारतीयों का रुख स्वाभाविक और सराहनीय है।
यदि आप भी देशभक्ति के साथ यात्रा करना चाहते हैं, तो उन देशों को चुनें जो भारत के मित्र हैं, न कि विरोधी।
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Author: Swatantra Vani
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