‘उत्तर-दक्षिण संगम का उदाहरण है Kashi’ — उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन बोले

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‘उत्तर-दक्षिण संगम का उदाहरण है Kashi’ — उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन बोले, “तमिलनाडु के लोग भक्ति ही नहीं, ज्ञान के लिए भी आते हैं काशी

Varanasi News : Kashi एक बार फिर उत्तर और दक्षिण भारत के सांस्कृतिक संगम का साक्षी बना, जब भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने शुक्रवार को श्रीकाशी विश्वनाथ धाम परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि काशी उत्तर और दक्षिण भारत के बीच आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ज्ञान का अद्भुत सेतु है।

उन्होंने कहा, “तमिलनाडु से लोग यहां केवल भक्ति के लिए ही नहीं, बल्कि ज्ञान प्राप्त करने भी आते हैं। महाकवि सुब्रह्मण्य भारती इसका जीवंत उदाहरण हैं, जिन्होंने काशी को अपनी कर्मभूमि बना लिया था।

राधाकृष्णन ने Kashi के प्राचीन गौरव, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक महत्ता पर विस्तृत चर्चा करते हुए कहा कि काशी सदियों से ज्ञान और भक्ति दोनों का केंद्र रही है। यह शहर न केवल सनातन संस्कृति का प्रतीक है, बल्कि उत्तर-दक्षिण भारत के भावनात्मक एकत्व का सशक्त उदाहरण भी है।

‘उत्तर-दक्षिण संगम का उदाहरण है Kashi’ — उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन बोले

धर्मशाला का लोकार्पण — “धर्म की जीत का प्रतीक”

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने श्रीकाशी नाट्टुकोट्टई नगर क्षेत्रम् प्रबंधन सोसाइटी द्वारा निर्मित विशाल धर्मशाला का लोकार्पण किया। यह धर्मशाला वाराणसी के सिगरा क्षेत्र में 62,000 वर्गफीट भूमि पर बनी है, जिसे वर्ष 2022 में योगी सरकार के निर्देश पर अतिक्रमण से मुक्त कराया गया था।

उन्होंने कहा, “यह धर्मशाला इस बात की साक्षी है कि धर्म पर संकट कुछ समय के लिए आ सकता है, लेकिन वह कभी पराजित नहीं होता। आज यह भूमि धर्म की जीत का प्रतीक बन चुकी है।

करीब 60 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 10 मंजिला इस धर्मशाला में 140 कमरे हैं, जो तमिलनाडु से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए समर्पित होंगे।

“2000 में गंगा स्नान के बाद बन गया शाकाहारी”

कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने अपने जीवन का एक रोचक प्रसंग भी साझा किया। उन्होंने कहा, “वर्ष 2000 में जब पहली बार काशी आया था और गंगा में स्नान किया, उसी दिन से मैंने शाकाहारी जीवन अपना लिया। इस नगरी की पवित्रता और ऊर्जा ने मेरे जीवन को बदल दिया।

उन्होंने बताया कि 2014 में जब वे लोकसभा चुनाव के दौरान दोबारा Kashi आए थे, तब और आज की काशी में “जमीन-आसमान का अंतर” है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा करते हुए कहा कि दोनों कर्मयोगियों ने काशी को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई है।

राधाकृष्णन ने कहा, “आज जहां भी जाते हैं, ‘हर-हर महादेव’ और ‘गंगा मैया की जय’ का जयघोष सुनाई देता है। यह परिवर्तन आस्था और विकास के संगम से संभव हुआ है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा — “गंगा से लेकर कावेरी तक एक आत्मा”

इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि आज भारत विश्व में निवेश का सबसे आकर्षक केंद्र बन चुका है, और देश में सबसे बेहतर राज्य उत्तर प्रदेश है।

योगी ने उत्तर-दक्षिण संबंधों पर कहा, “गंगा तट से लेकर कावेरी तट तक एक ही आत्मा बसती है। भगवान श्रीराम ने रामेश्वर ज्योतिर्लिंग की स्थापना की थी, और आदि शंकराचार्य ने इसी परंपरा को आगे बढ़ाया। काशी में उन्हें आत्मज्ञान प्राप्त हुआ, और उन्होंने पूरे विश्व को आत्मबोध का संदेश दिया।

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देवी अन्नपूर्णा की मूर्ति की वापसी पर उपराष्ट्रपति की सराहना

लोकार्पण समारोह के बाद उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर और मां अन्नपूर्णा के दर्शन-पूजन भी किया। उन्होंने मंदिर परिसर में देवी अन्नपूर्णा की मूर्ति की वापसी को ऐतिहासिक घटना बताया। यह मूर्ति एक सदी से अधिक पहले चोरी हो गई थी, जिसे प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से कनाडा से वापस लाया गया।

उन्होंने कहा कि यह केवल मूर्ति की वापसी नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक अस्मिता की पुनर्स्थापना है।

तमिलनाडु और काशी का अटूट रिश्ता

उपराष्ट्रपति ने तमिल समाज की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि जहां भी श्रीकाशी नाट्टुकोट्टई समुदाय कार्य करता है, वहां विकास और सद्भावना का वातावरण बनता है। काशी और तमिलनाडु के बीच यह संबंध केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और शैक्षणिक साझेदारी का भी प्रतीक है।

उन्होंने कहा, “Kashi का महत्व इस बात में है कि यह केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि विचार और विवेक का केंद्र भी है। यहां आने वाला हर व्यक्ति कुछ न कुछ सीखकर लौटता है।

स्वतंत्र वाणी के उपसंहारिक शब्द

Kashi आज भी अपने प्राचीन वैभव, अध्यात्म और आधुनिक विकास के संगम से पूरे देश को दिशा दे रही है। उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विचारों ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि Varanasi केवल उत्तर भारत का नहीं, बल्कि पूरे भारत का सांस्कृतिक हृदय है।

स्वतंत्र वाणी News के लिए, यह आयोजन उत्तर-दक्षिण भारत के एकत्व, परंपरा और प्रगति की नई मिसाल पेश करता है — जहां भक्ति, ज्ञान और विकास एक साथ प्रवाहित हो रहे हैं, ठीक वैसे ही जैसे गंगा का पावन प्रवाह।

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Author: kamalkant

कमल कांत सिंह एक उत्साही पत्रकार और लेखक हैं, जिन्हें समाचार और कहानी कहने का गहरा जुनून है। कई वर्षों के अनुभव के साथ, वे सामाजिक मुद्दों, संस्कृति और समसामयिक घटनाओं पर गहन विश्लेषण और आकर्षक लेखन के लिए जाने जाते हैं। कमल का उद्देश्य अपने लेखन के माध्यम से सच्चाई को उजागर करना और पाठकों को प्रेरित करना है। उनकी लेखनी में स्पष्टता, विश्वसनीयता और मानवीय संवेदनाओं का समावेश होता है, जो उन्हें एक विशिष्ट आवाज प्रदान करता है।