World Mental Health Day : लाइक के नशे में गुम हो रहे हैं बच्चे

World Mental Health Day : लाइक के नशे में गुम हो रहे हैं बच्चे

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World Mental Health Day : बच्चों में ‘लाइक’ की चाह बन रही नशा, मोबाइल और रील की लत से खो रहे समझने की शक्ति

Varanasi News : World Mental Health Day के मौके पर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। Varanasi में अब बच्चे ड्रग्स नहीं, बल्कि मोबाइल और सोशल मीडिया की रील्स के नशे में डूब रहे हैं। एक “लाइक” पाने की चाह ने बच्चों की मानसिक स्थिति को बुरी तरह प्रभावित करना शुरू कर दिया है। मानसिक अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन ऐसे चार से पांच नए केस सामने आ रहे हैं, जहां 10 से 15 साल के बच्चे इस लत के कारण गुस्से, भूलने और अवसाद जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।

World Mental Health Day : लाइक के नशे में गुम हो रहे हैं बच्चे

बच्चों में बढ़ रही मोबाइल और रील की लत

विशेषज्ञों का कहना है कि जिले में मोबाइल की अत्यधिक लत बच्चों के व्यवहार और सोचने-समझने की शक्ति को कमजोर कर रही है। दिनभर रील देखने वाले बच्चे अब धीरे-धीरे वास्तविक जीवन से कटने लगे हैं। माता-पिता अपने बच्चों के आक्रोशित व्यवहार, चिड़चिड़ापन और ध्यान भटकने की समस्या को लेकर डॉक्टरों के पास पहुंच रहे हैं।

मानसिक अस्पताल के निदेशक डॉ. सीपी मल्ल बताते हैं कि “दवा हर समस्या का समाधान नहीं है। बच्चों में सुधार के लिए काउंसिलिंग ही सबसे प्रभावी तरीका है। अभिभावकों को बच्चों के मोबाइल उपयोग पर नियंत्रण रखना जरूरी है।”

World Mental Health Day : लाइक के नशे में गुम हो रहे हैं बच्चे

Varanasi के तीन केस जो सोचने पर मजबूर करते हैं

केस 1:
सुंदरपुर के 14 वर्षीय किशोर को गुस्सा इतना आता था कि वह किसी भी वस्तु को फेंक देता था। परिजनों ने जब उसे मानसिक अस्पताल ले जाया, तो काउंसिलिंग और दवा के बाद सुधार दिखा।

केस 2:
शिवपुर के एक अधिवक्ता के बेटे को लगातार सिर दर्द और चिड़चिड़ापन था। नेत्र विभाग में जांच के बाद चिकित्सकों ने उसे मानसिक अस्पताल रेफर किया। वहां पता चला कि वह हर दिन कई घंटे मोबाइल पर रील देखता था।

केस 3:
चौबेपुर के एक शिक्षक के बेटे की याददाश्त कमजोर होने लगी थी। परीक्षा में नंबर गिरने लगे और स्कूल से शिकायतें आने लगीं। न्यूरोलॉजिस्ट से काउंसिलिंग के बाद सामने आया कि बच्चा स्कूल से लौटते ही घंटों रील देखता था। चार महीने की दवा और काउंसिलिंग से अब उसकी स्थिति में सुधार है।

विशेषज्ञों की राय

न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अरविंद सिंह का कहना है कि “बच्चों में इस प्रकार की आदत बेहद खतरनाक है। माता-पिता को शुरुआत से ही बच्चों के मोबाइल उपयोग पर निगरानी रखनी चाहिए। हम दवा कम देते हैं और अधिकतर मामलों में काउंसिलिंग से ही सुधार लाते हैं।

वहीं नेत्र विशेषज्ञ डॉ. निवेदिता पाठक के अनुसार, “लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों की रोशनी पर असर पड़ता है। रील देखने की आदत अब बच्चों में विजन कमजोर होने का बड़ा कारण बन गई है।”

अभिभावकों के लिए चेतावनी

मानसिक चिकित्सकों का कहना है कि बच्चों में रील और गेम्स की लत सोचने, समझने और याद रखने की क्षमता को कम कर रही है। माता-पिता को यह समझना होगा कि मोबाइल सिर्फ पढ़ाई या मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरा भी बन सकता है।
डॉ. मल्ल का कहना है — “अगर बच्चे मोबाइल के बिना बेचैन हो जाएं या गुस्सा दिखाएं, तो यह शुरुआती संकेत है कि उन्हें तुरंत काउंसिलिंग की जरूरत है।”

निष्कर्ष

World Mental Health Day के मौके पर यह समझना जरूरी है कि मानसिक स्वास्थ्य केवल वयस्कों का नहीं, बल्कि बच्चों का भी गंभीर मुद्दा है।स्वतंत्र वाणी News के अनुसार, शहर में बढ़ते मोबाइल एडिक्शन के मामले चेतावनी दे रहे हैं — “एक लाइक की चाह” अब मानसिक स्वास्थ्य के लिए उतनी ही खतरनाक हो चुकी है, जितनी कभी ड्रग्स की लत हुआ करती थी।

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Ashish Patel
Author: Ashish Patel

मेरा नाम आशीष पटेल है और मैं पिछले 2 वर्षों से पत्रकारिता और न्यूज़ पोर्टल प्रबंधन के क्षेत्र में सक्रिय हूँ। मेरा फोकस मुख्य रूप से मनोरंजन, राजनीति और प्रौद्योगिकी की ख़बरों पर रहता है। मनोरंजन की दुनिया की हलचल, राजनीति के अहम मुद्दे और तकनीक के नए इनोवेशन — सब कुछ एक ही जगह पर उपलब्ध कराने की मेरी कोशिश रहती है।