Supreme Court में Chief Justice B.R. Gavai पर जूता फेंकने की घटना से देश में हड़कंप

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Supreme Court में Chief Justice B.R. Gavai पर जूता फेंकने की घटना से देश में हड़कंप,पीएम मोदी ने की फोन — आरोपी वकील राकेश किशोर निलंबित

Supreme Court परिसर में सोमवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई जब एक वकील ने Chief Justice B.R. Gavai पर जूता फेंकने का प्रयास किया। यह अप्रत्याशित घटना उस समय हुई जब अदालत नियमित मामलों की सुनवाई कर रही थी। हालाँकि, जूता बेंच तक नहीं पहुँचा और सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को पकड़ लिया।

Chief Justice B.R. Gavai ने पूरी घटना के दौरान संयम और धैर्य का परिचय दिया। उन्होंने कहा, “ऐसी घटनाओं का मुझ पर कोई असर नहीं पड़ता। कृपया सुनवाई जारी रखें।”

उनके शांत और संयमित व्यवहार की व्यापक रूप से प्रशंसा हो रही है।

Supreme Court में Chief Justice B.R. Gavai पर जूता फेंकने की घटना से देश में हड़कंप

घटना का पूरा विवरण

यह घटना सोमवार सुबह लगभग 11:35 बजे सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर 1 में हुई। एक व्यक्ति, जिसकी बाद में पहचान वकील राकेश किशोर के रूप में हुई, अचानक आगे बढ़ा, अपना जूता उतारा और Chief Justice B.R. Gavai पर फेंकने की कोशिश की। हालाँकि, जूता पीठ तक नहीं पहुँचा और सुरक्षाकर्मियों ने उसे तुरंत पकड़ लिया।

जब उसे अदालत कक्ष से बाहर ले जाया गया, तो वह चिल्लाया, “हम सनातन का अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे!”

रिपोर्टों के अनुसार, आरोपी के पास सुप्रीम कोर्ट का प्रॉक्सिमिटी कार्ड था, जो केवल वकीलों और उनके सहायकों को जारी किया जाता है। सुरक्षा एजेंसियाँ फिलहाल आरोपी से पूछताछ कर रही हैं।

पृष्ठभूमि: भगवान विष्णु पर टिप्पणी पर विवाद

यह हमला कुछ दिन पहले खजुराहो के जावरी मंदिर में भगवान विष्णु की एक खंडित मूर्ति की पुनर्स्थापना की मांग वाली एक याचिका पर Chief Justice B.R. Gavai की टिप्पणियों को लेकर उठे विवाद के बाद हुआ।

Chief Justice B.R. Gavai ने याचिका खारिज करते हुए कहा, “यह प्रचार-हित याचिका है। अगर आप भगवान विष्णु के भक्त हैं, तो उनसे कुछ करने के लिए कहें, उनसे प्रार्थना करें।”

उनकी टिप्पणियों ने सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा कर दिया, कुछ समूहों ने इसे “आस्था का अपमान” बताया।

हालांकि, B.R. Gavai ने बाद में स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणियों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा, “मुझे बताया गया कि मेरे बयान को सोशल मीडिया पर गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है। मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूँ।”

अदालत में संयम, वरिष्ठ वकीलों की प्रतिक्रिया

घटना के दौरान अदालत में मौजूद एक वकील ने बताया कि B.R. Gavai पूरी तरह से शांत और गंभीर रहे। उन्होंने बार-बार ज़ोर देकर कहा कि सुनवाई बिना किसी रुकावट के जारी रहे।

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा, “हमें हर दिन सोशल मीडिया पर आलोचना का सामना करना पड़ता है। यह एक अनियंत्रित घोड़ा बन गया है जिसे नियंत्रित करना मुश्किल है।”

इस बीच, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी सोशल मीडिया के प्रभाव पर टिप्पणी की:

 “पहले, हर क्रिया की एक समान प्रतिक्रिया होती थी, लेकिन अब हर क्रिया की सोशल मीडिया पर असंगत प्रतिक्रिया होती है।”

Supreme Court में Chief Justice B.R. Gavai पर जूता फेंकने की घटना से देश में हड़कंप

प्रधानमंत्री मोदी का बयान: “इस घटना ने हर भारतीय को क्रोधित कर दिया है।”

इस घटना के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Chief Justice B.R. Gavai को व्यक्तिगत रूप से फ़ोन करके उनका हालचाल पूछा और उनकी शांत प्रतिक्रिया की सराहना की।

प्रधानमंत्री मोदी ने ट्विटर पर लिखा:

 “मैंने भारत के Chief Justice, न्यायमूर्ति B.R. Gavai जी से बात की। सर्वोच्च न्यायालय परिसर में उन पर हुए हमले ने हर भारतीय को क्रोधित कर दिया है। हमारे समाज में ऐसी निंदनीय घटनाओं के लिए कोई जगह नहीं है। गवई जी ने जिस संयम और शांतिपूर्ण तरीके से प्रतिक्रिया व्यक्त की, वह न्याय और संविधान के मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”

प्रधानमंत्री के इस बयान को न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गरिमा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।

विपक्षी दलों और वरिष्ठ वकीलों ने की निंदा

प्रधानमंत्री मोदी के बयान के बाद, विपक्षी नेताओं ने भी हमले की कड़ी निंदा की।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और सोनिया गांधी ने कहा, “यह केवल मुख्य न्यायाधीश पर हमला नहीं है, बल्कि न्यायपालिका की गरिमा पर हमला है।”

वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा, “यह एक वैचारिक हमला है जिसकी सर्वोच्च न्यायालय के सभी न्यायाधीशों को एक स्वर में निंदा करनी चाहिए। न्यायपालिका पर किसी भी प्रकार का दबाव लोकतंत्र के लिए हानिकारक है।”

बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने की कड़ी कार्रवाई – आरोपी वकील निलंबित

घटना के तुरंत बाद, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने आरोपी वकील राकेश किशोर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा द्वारा जारी आदेश में कहा गया है, “आपका आचरण अधिवक्ता अधिनियम और न्यायालय की गरिमा के विपरीत है। इसलिए, आपको तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।”

निलंबन आदेश के अनुसार, राकेश किशोर अब किसी भी अदालत, न्यायाधिकरण या न्यायिक प्राधिकरण के समक्ष उपस्थित नहीं हो सकेंगे। दिल्ली बार काउंसिल को सभी अदालतों और बार एसोसिएशनों को इसकी सूचना देने का निर्देश दिया गया है।

आरोपी को 48 घंटे के भीतर यह प्रमाणित करने का भी आदेश दिया गया है कि वह किसी भी अदालत में पेश नहीं हो रहा है। बीसीआई ने कहा कि यह निलंबन अंतरिम है और आरोपी को 15 दिनों के भीतर जवाब देने को कहा गया है कि निलंबन को स्थायी क्यों न कर दिया जाए।

जांच और आगे की कार्रवाई

  1. Supreme Court के सुरक्षा विभाग ने मामले की विस्तृत जाँच शुरू कर दी है। प्रारंभिक रिपोर्टों से पता चला है कि आरोपी 2009 से दिल्ली बार काउंसिल में पंजीकृत अधिवक्ता है।
  2. जाँच एजेंसियाँ यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस हमले के पीछे कोई संगठनात्मक प्रेरणा या षडयंत्र तो नहीं था।

निष्कर्ष: न्यायपालिका पर हमला या असहिष्णुता, क्या संकेत है?

Chief Justice B.R. Gavai पर जूता फेंकने की इस घटना ने देश की न्यायिक व्यवस्था की गरिमा पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। हालाँकि, बी.आर. गवई की शांत और दृढ़ प्रतिक्रिया ने न केवल न्यायालय की गरिमा को बचाया, बल्कि पूरे देश को यह कड़ा संदेश भी दिया कि न्याय के मंदिर में हिंसा का कोई स्थान नहीं है।

  1. प्रधानमंत्री मोदी सहित पूरे राजनीतिक वर्ग ने इस घटना की निंदा की है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि भारत में न्यायपालिका की प्रतिष्ठा सर्वोपरि है।
  2. बार काउंसिल की त्वरित कार्रवाई और Supreme Court की संयमित प्रतिक्रिया दर्शाती है कि देश की न्यायिक व्यवस्था हर परिस्थिति में संविधान और कानून के शासन के प्रति अडिग रहेगी।
  3. यह घटना एक सबक भी है—असहमति हो सकती है, लेकिन उसे व्यक्त करने का तरीका गरिमापूर्ण और संवैधानिक होना चाहिए।

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Author: Rajesh