शतरुद्र प्रकाश ने की मांग, वाराणसी के नाटीइमली के भरत मिलाप को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए
वाराणसी समाचार : काशी नगरी वाराणसी का इतिहास और संस्कृति हमेशा से दुनिया भर में आकर्षण का केंद्र रही है। इसी सांस्कृतिक विरासत को और मजबूती देने के लिए शहर के वरिष्ठ समाजसेवी शतरुद्र प्रकाश ने एक महत्वपूर्ण मांग उठाई है। उन्होंने कहा है कि नाटीइमली का भरत मिलाप, जो एक पौराणिक और ऐतिहासिक आयोजन है, उसे राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाना चाहिए।
शतरुद्र प्रकाश का मानना है कि यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि भारतीय संस्कृति की गहराई और भाईचारे का प्रतीक भी है। उनका कहना है कि यदि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस स्थल को सुरक्षित रखना है, तो इसके आस-पास हो रहे अवैध निर्माण और बहुमंजिली इमारतों पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए।

सांस्कृतिक धरोहर को बचाने की जरूरत
नाटीइमली का भरत मिलाप हर साल लाखों श्रद्धालुओं और दर्शकों को अपनी ओर खींचता है। रामायण की कथा पर आधारित इस आयोजन में जब राम-लक्ष्मण और भरत-शत्रुघ्न का मिलन होता है, तो लोग भावविभोर हो जाते हैं।
शतरुद्र प्रकाश ने कहा कि यदि आसपास का क्षेत्र बहुमंजिली इमारतों से भर जाएगा, तो सूर्यास्त से पहले होने वाला यह दृश्य धुंधला पड़ जाएगा और इसका मूल स्वरूप खत्म हो जाएगा।
उनका कहना है कि भारत मिलाप का असली आकर्षण इस पारंपरिक “मिलन-मार्ग” (Runway) में है, जहां राम-लक्ष्मण और भरत-शत्रुघ्न दौड़ते हुए एक-दूसरे से गले मिलते हैं। यदि इस मार्ग को सुरक्षित नहीं रखा गया, तो यह अमूल्य परंपरा आने वाले समय में कमजोर हो सकती है।
वाराणसी महायोजना 2031 में शामिल
- शतरुद्र प्रकाश ने बताया कि लंबे प्रयासों के बाद इस स्थल को वाराणसी महायोजना 2031 में शामिल करवाया गया।
- महायोजना 2031 के प्रस्तर 2.4 पृष्ठ 21 पर नाटीइमली भरत मिलाप को सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर क्षेत्र की सूची में 7वें स्थान पर दर्ज किया गया।
- इससे पहले इस सूची में केवल छह धरोहर स्थल शामिल थे।
- जब तक भारत मिलाप को इस सूची में नहीं जोड़ा गया था, तब तक इसे संरक्षित दर्जा नहीं मिला था।
अब महायोजना के तहत यह तय कर दिया गया है कि इस धरोहर को किसी भी तरह मिटाया या हटाया नहीं जा सकता।
सात प्रमुख धरोहर क्षेत्र
महायोजना 2031 में वाराणसी के जिन सात प्रमुख सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर क्षेत्रों को शामिल किया गया है, उनमें हैं:
1. गंगातटीय घाट और मंदिर क्षेत्र।
2. दुर्गा मंदिर, संकटमोचन मंदिर और मानस मंदिर क्षेत्र।
3. कमच्छा-भेलूपुर क्षेत्र।
4. कबीर मठ (लहरतरा) क्षेत्र।
5. सारनाथ क्षेत्र।
6. पंचकोसी यात्रा का क्षेत्र।
7. नाटीइमली (भारत मिलाप)।
इन सात क्षेत्रों को सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहर के रूप में संरक्षित करने का फैसला लिया गया है।

अवैध निर्माण पर चिंता
शतरुद्र प्रकाश ने अपने पत्र में कहा कि अगर नाटीइमली के आसपास बहुमंजिला इमारतें खड़ी होती रहीं, तो यहां का असली स्वरूप धीरे-धीरे खत्म हो जाएगा। उन्होंने जोर दिया कि नगर प्रशासन को तत्काल कदम उठाते हुए इस क्षेत्र में अवैध निर्माण पर रोक लगानी चाहिए।
उन्होंने यह भी बताया कि राम-भारत के मिलन-मार्ग को इंटरलॉकिंग कर मजबूत किया गया है, लेकिन इस पर और काम किए जाने की जरूरत है ताकि यह मार्ग लंबे समय तक सुरक्षित और टिकाऊ रह सके।
यह भी पढ़ें – हम Navratri क्यों मनाते हैं?
भारत मिलाप का महत्व
नाटीइमली का भारत मिलाप केवल वाराणसी ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में आस्था और संस्कृति का प्रतीक है। यह आयोजन भाईचारे, प्रेम और आदर्श पारिवारिक मूल्यों का संदेश देता है। इसमें देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।
शतरुद्र प्रकाश का कहना है कि जब पूरा शहर और हजारों लोग इस आयोजन को देखने के लिए एकत्रित होते हैं, तो यह सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारत की जीवंत सांस्कृतिक पहचान बन जाता है।
नाटीइमली के भरत मिलाप : निष्कर्ष
शतरुद्र प्रकाश की यह मांग न केवल उचित है, बल्कि काशी की सांस्कृतिक धरोहर को बचाने की दिशा में एक अहम कदम है। यदि नाटीइमली के भरत मिलाप को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाता है, तो यह आने वाली पीढ़ियों को भारतीय संस्कृति की अनमोल विरासत से जोड़े रखने का कार्य करेगा।
इस मांग से यह भी स्पष्ट होता है कि काशी जैसे प्राचीन और धार्मिक नगर में धरोहरों की सुरक्षा केवल सरकार या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।
खबरों के लाइव अपडेट और विस्तृत विश्लेषण के लिए स्वतंत्र वाणी पर बने रहें।
Author: kamalkant
कमल कांत सिंह एक उत्साही पत्रकार और लेखक हैं, जिन्हें समाचार और कहानी कहने का गहरा जुनून है। कई वर्षों के अनुभव के साथ, वे सामाजिक मुद्दों, संस्कृति और समसामयिक घटनाओं पर गहन विश्लेषण और आकर्षक लेखन के लिए जाने जाते हैं। कमल का उद्देश्य अपने लेखन के माध्यम से सच्चाई को उजागर करना और पाठकों को प्रेरित करना है। उनकी लेखनी में स्पष्टता, विश्वसनीयता और मानवीय संवेदनाओं का समावेश होता है, जो उन्हें एक विशिष्ट आवाज प्रदान करता है।










