Varanasi में Vijayadashami 2025 : परंपरा, आस्था और सांस्कृतिक उत्सव की अनोखी झलक
Varanasi : Vijayadashami (दशहरा) भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इसे असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। हर साल नवरात्रि के समापन पर आने वाला यह पर्व धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। Varanasi जैसी धार्मिक नगरी में Vijayadashami का रंग और भी खास होता है, जहां रामलीला, रावण दहन और मां दुर्गा की पूजा पूरे शहर को आस्था से सराबोर कर देती है।

Vijayadashami का पौराणिक महत्व
भगवान राम और रावण की कथा:
रामायण के अनुसार, रावण द्वारा माता सीता का हरण किए जाने के बाद भगवान श्रीराम ने लंका पर चढ़ाई की और नौ दिनों तक युद्ध लड़ा। दशमी के दिन उन्होंने रावण का वध कर धर्म और सत्य की स्थापना की। यही कारण है कि इस दिन पूरे देश में रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले जलाए जाते हैं।
मां दुर्गा और महिषासुर की कथा:
एक अन्य मान्यता के अनुसार, मां दुर्गा ने नवरात्र के नौ दिनों तक महिषासुर राक्षस से युद्ध किया और दशमी को उसका वध कर देवताओं और मानवों को आतंक से मुक्त कराया। इसीलिए Vijayadashami को महिषासुर मर्दिनी दिवस भी कहा जाता है।

वाराणसी में Vijayadashami की विशेषताएं
1. रामलीला और रावण दहन:
Varanasi की रामनगर रामलीला विश्वप्रसिद्ध है, जो 200 साल से भी अधिक पुरानी परंपरा है। Vijayadashami पर यहां रावण वध का मंचन होता है और हजारों श्रद्धालु इस आयोजन के साक्षी बनते हैं।
2. मां दुर्गा का विसर्जन:
नवरात्रि के नौ दिनों तक काशी के मंदिरों और पंडालों में मां दुर्गा की भव्य पूजा होती है। दशमी के दिन गंगा घाटों पर प्रतिमाओं का विसर्जन कर देवी को विदाई दी जाती है।
3. धार्मिक अनुष्ठान:
इस दिन काशी में लोग शस्त्र पूजन करते हैं और “सीमा पूजन” की परंपरा निभाते हैं, जो नई संभावनाओं और दिशाओं को स्वीकारने का प्रतीक है।
4. मेलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रौनक:
Varanasi में दशहरे के दिन मेलों का आयोजन होता है। रावण दहन स्थलों पर आतिशबाजी, झूले, और चाट-पकवान के साथ पूरा माहौल उत्सवमय हो उठता है।
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वाराणसी में कहां-कहां होगा रावण दहन?
- केंद्रीय खेलकूद मैदान (BAREKA क्षेत्र): यहां हर साल विशाल रावण पुतले का दहन किया जाता है।
- मलदहिया चौराहा: स्थानीय स्तर पर रावण दहन और मेले का आयोजन।
- बरेका: यहां पहले 75 फीट ऊंचा रावण पुतला जलाया गया था, इस बार भी खास आकर्षण रहेगा।
- परिवार और बच्चे शाम को मेले का आनंद लेने के लिए निकलते हैं और आतिशबाजी का शानदार नजारा देखते हैं।
Vijayadashami 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
- तारीख: 2 अक्टूबर 2025
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:09 बजे से 02:56 बजे तक
- यह दिन न केवल रावण और महिषासुर पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, बल्कि नवरात्रि उत्सव का समापन भी है।
सांस्कृतिक रंग और ऐतिहासिक झलक
दशहरा पर Varanasi के पंडालों और मंदिरों में देवी प्रतिमाओं की भव्य शोभा यात्रा निकाली जाती है। रावण दहन के साथ आतिशबाजी होती है और लोककथाएं व इतिहास से जुड़े प्रसंग भी जीवित किए जाते हैं।
उदाहरण के तौर पर, मदनपुरा प्रतिमा का न विसर्जित होना आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय है।
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Vijayadashami 2025 पर स्वतंत्र वाणी का विचार
Vijayadashami हमें यह सिखाती है कि बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः जीत सत्य और धर्म की ही होती है। Varanasi में इस पर्व का महत्व केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक भी है।
यहां Vijayadashami का मतलब है
- भगवान राम की धर्म पर विजय,
- मां दुर्गा की शक्ति का उत्सव,
- और समाज में सद्भाव और एकता का संदेश।
इस तरह Vijayadashami 2025 पर वाराणसी की गलियां, घाट और पंडाल श्रद्धा, भक्ति और उत्सव की रौनक से भर उठेंगी।
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Author: kamalkant
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