हम दशहरा क्यों मनाते हैं? इस हिंदू त्योहार का अर्थ, इतिहास और परंपराएं
हर पतझड़ में, भारत की सड़कों और दुनिया भर के घरों में, लाखों लोग दशहरा या विजयादशमी मनाने के लिए एक साथ आते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है, “हम दशहरा क्यों मनाते हैं?” इसका जवाब साहस, रोशनी और धर्म के एक महान किस्से में है – ऐसे मूल्य जो आज भी लोगों के दिलों में गहरे बसते हैं।
आइए दशहरा के असली अर्थ, इसकी समृद्ध परंपराओं और इस त्योहार के महत्व को जानें, जो दुनिया भर के हिंदुओं के दिलों में एक खास जगह रखता है।
हम दशहरा क्यों मनाते हैं?
दशहरा का त्योहार भगवान राम की दस सिर वाले राक्षस राजा रावण पर जीत का प्रतीक है – यह अच्छाई की बुराई पर और रोशनी की अंधेरे पर जीत का प्रतीक है।
दशहरा शब्द ‘दस’ जिसका मतलब दस और ‘हरा’ जिसका मतलब हार है, से बना है। रावण के दस सिर दस नकारात्मक मानवीय गुणों का प्रतीक हैं – क्रोध, लालच, वासना, अहंकार, घमंड, ईर्ष्या, आदि। जब राम ने रावण को हराया, तो यह सत्य की असत्य पर जीत का प्रतीक था – यह संदेश आज भी लाखों लोगों को प्रेरित करता है।

मोदी टूॉयज की सह-संस्थापक अवनी मोदी सरकार कहती हैं, “राक्षस रावण के रूप में जीवन की चुनौतियों और डरावनी परिस्थितियों के बीच भी, हमेशा उम्मीद और जीत होती है।”
दशहरा की कहानी
दशहरा की जड़ें हिंदू धर्म के सबसे महान महाकाव्यों में से एक रामायण में हैं। जब रावण सीता का अपहरण कर लेता है, तो भगवान राम उसे बचाने के लिए लंबी लड़ाई लड़ते हैं। अपने भाई लक्ष्मण, हनुमान और वानरों की सेना की मदद से, राम अंततः रावण को हरा देते हैं – सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि नैतिक साहस और दिव्य शक्ति से।
दशहरा के दिन, हिंदू याद दिलाते हैं कि सत्य, धर्म और भक्ति हमेशा जीतते हैं, चाहे रास्ता कितना भी कठिन क्यों न हो।
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लोग दशहरा कैसे मनाते हैं?
भारत में:
बड़े पैमाने पर रामलीला में खुले मंच पर राम की कहानी दिखाई जाती है।
राक्षस की हार का प्रतीक बनाने के लिए, आतिशबाजी से भरे रावण के विशाल पुतले जलाए जाते हैं। सड़कें परेड, संगीत, रोशनी और समुदायिक समारोहों से गुलजार हो जाती हैं।

अमेरिका और दुनिया भर में:
- भारतीय समुदाय सांस्कृतिक कार्यक्रमों, पारंपरिक संगीत और रंग-बिरंगे कपड़ों के साथ दशहरा मनाते हैं।
- परिवार प्रार्थना और स्वादिष्ट भोजन के लिए इकट्ठा होते हैं और खीर, जलेबी और लड्डू जैसी पारंपरिक मिठाइयाँ बांटते हैं।
- बच्चे कभी-कभी अपनी गलत आदतों या डर को लिखकर छोटी आग्निकांडी में जलाते हैं – यह पुरानी परंपरा का आधुनिक रूप है।
सरकार कहते हैं, “अपने डर को आग में जलते देखना एक तरह से ताकत देता है।” उनके बच्चे अपने परिवार के दशहरे की आग्निकांडी में जलाने के लिए अपने डरों की तस्वीरें बनाते हैं।
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दशहरा कब मनाया जाता है?
दशहरा हिंदू महीने अश्विन के दसवें दिन मनाया जाता है, जो आमतौर पर सितंबर या अक्टूबर में, नवरात्रि के नौ दिनों के तुरंत बाद आता है।
आगे की तारीखें:
- 2 अक्टूबर, 2025
- 20 अक्टूबर, 2026
दशहरा से 9 दिन पहले: Navratri
दशहरा से पहले हिंदू Navratri मनाते हैं, जो देवी दुर्गा को समर्पित नौ दिवसीय त्योहार है। कुछ क्षेत्रों में, यह महिषासुर राक्षस के खिलाफ उनकी लड़ाई का प्रतीक है। दसवें दिन – विजयादशमी (दशहरा) – देवी दुर्गा विजयी होती हैं।
यह भी माना जाता है कि रावण से युद्ध से पहले दुर्गा ने भगवान राम को आशीर्वाद दिया था, जिससे उन्हें अंत में विजय मिली।
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Author: kamalkant
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