Prem Sagar का 84 साल की उम्र में निधन

Prem Sagar का 84 साल की उम्र में निधन

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रामानंद सागर के बेटे Prem Sagar का 84 साल की उम्र में निधन, फिल्म और टीवी जगत में शोक की लहर

भारतीय टेलीविजन और फिल्म जगत से जुड़ी एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। दिग्गज निर्देशक रामानंद सागर के बेटे और मशहूर निर्माता व छायाकार Prem Sagar का 84 साल की उम्र में मुंबई में निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार थे और रविवार सुबह 10 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार मुंबई के जुहू स्थित पवन हंस श्मशान घाट पर किया गया।

Prem Sagar का 84 साल की उम्र में निधन

Prem Sagar का सफर और रामानंद सागर की विरासत

Prem Sagar न केवल रामानंद सागर के बेटे थे, बल्कि उन्होंने भारतीय टेलीविजन की दुनिया में एक नया इतिहास रचा। 1987 में दूरदर्शन पर प्रसारित ‘रामायण‘ जैसे ऐतिहासिक धारावाहिकों की सफलता में Prem Sagar का बड़ा योगदान था। उन्होंने अपने पिता रामानंद सागर की प्रोडक्शन कंपनी सागर आर्ट्स के बैनर तले कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम किया और सिनेमा और टीवी की दुनिया में परिवार की विरासत को आगे बढ़ाया।

Prem Sagar की शिक्षा और फ़िल्मी करियर

रामानंद सागर के पुत्र Prem Sagar ने 1968 बैच में पुणे स्थित भारतीय फ़िल्म एवं टेलीविज़न संस्थान (FTII) से सिनेमैटोग्राफी और फ़ोटोग्राफ़ी की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने फ़ोटोग्राफ़र और सिनेमैटोग्राफ़र के रूप में फ़िल्म जगत में कदम रखा।

दृश्य प्रस्तुतिकरण के अपने कौशल ने ही रामानंद सागर द्वारा निर्देशित धारावाहिक ‘रामायण’ को ऐतिहासिक ऊँचाइयों तक पहुँचाया। इसके अलावा, प्रेम सागर ने ‘आँखें’, ‘ललकार’, ‘चरस’, ‘अलिफ़ लैला’ और ‘विक्रम-बेताल’ जैसी कई सफल फ़िल्मों का निर्माण और निर्देशन किया।

अरुण गोविल ने Prem Sagar को श्रद्धांजलि दी

रामायण‘ में भगवान राम की भूमिका निभाने वाले अभिनेता अरुण गोविल ने सोशल मीडिया पर Prem Sagar के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने लिखा कि रामानंद सागर के पुत्र और स्वयं एक महान निर्माता प्रेम सागर ने ‘रामायण‘ के माध्यम से भगवान श्री राम के आदर्शों और मर्यादा को घर-घर पहुँचाया।

Prem Sagar का 84 साल की उम्र में निधन

अरुण गोविल ने प्रार्थना की कि प्रभु श्री राम प्रेम सागर की आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें और रामानंद सागर के परिवार को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।

सुनील लहरी ने भी जताया शोक

रामायण‘ में लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले अभिनेता सुनील लहरी ने भी Prem Sagar के निधन को एक बड़ी क्षति बताया। उन्होंने लिखा कि रामानंद सागर के पुत्र प्रेम सागर का जाना बेहद स्तब्ध करने वाला है। वह न केवल एक निर्माता थे, बल्कि भारतीय टेलीविजन के एक महत्वपूर्ण स्तंभ भी थे।

सागर परिवार की विरासत और योगदान

रामानंद सागर को भारतीय टेलीविजन पर ‘रामायण‘ के लिए हमेशा याद किया जाएगा। इस शो ने 1987 में भारत के हर घर में अपनी छाप छोड़ी थी। उस दौर में इसके प्रसारण के दौरान सड़कों पर सन्नाटा छा जाता था।

इस विरासत को आगे बढ़ाते हुए प्रेम सागर ने सिनेमा और टेलीविजन दोनों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने अपने पिता रामानंद सागर की आत्मकथा ‘एन एपिक लाइफ: रामानंद सागर, फ्रॉम बरसात टू रामायण’ भी लिखी, जो उनके जीवन और संघर्षों का एक दस्तावेज है।

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अंतिम संस्कार में उमड़ा जनसैलाब

Prem Sagar का अंतिम संस्कार आज दोपहर मुंबई के जुहू स्थित पवन हंस श्मशान घाट पर किया गया। उनकी अंतिम यात्रा में उनके परिवार, रिश्तेदार और उद्योग जगत के कई दिग्गज मौजूद थे। सागर वर्ल्ड की इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा था:

“बेहद दुख के साथ सूचित किया जा रहा है कि श्री प्रेम सागर अब हमारे बीच नहीं रहे। उनकी अंतिम यात्रा दोपहर 2:30 बजे पवन हंस जुहू से रवाना हुई। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे। ओम शांति।”

यह क्षण सागर परिवार के लिए बेहद भावुक था। प्रेम सागर ने जीवन भर रामानंद सागर द्वारा बनाई गई पहचान को संजोकर रखा और आगे बढ़ाया।

भारतीय टेलीविजन पर रामायण का प्रभाव

जब 1987 में रामानंद सागर के निर्देशन में ‘रामायण’ का प्रसारण हुआ, तो करोड़ों लोग इसे देखने के लिए टीवी सेट के सामने जमा हुए थे। उस दौर की यादें आज भी लोगों के दिलों में ताज़ा हैं।

Prem Sagar ने इस शो के निर्माण में एक छायाकार और निर्माता के रूप में अहम भूमिका निभाई। यही वजह है कि रामानंद सागर और प्रेम सागर, दोनों का नाम इस ऐतिहासिक धारावाहिक के साथ हमेशा जुड़ा रहेगा।

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उद्योग जगत से श्रद्धांजलि

फिल्म और टीवी जगत के कई कलाकारों और निर्माताओं ने सोशल मीडिया पर Prem Sagar को श्रद्धांजलि दी। सभी इस बात पर सहमत थे कि रामानंद सागर के बाद जिस तरह प्रेम सागर ने पारिवारिक विरासत संभाली और भारतीय टेलीविजन को एक नई दिशा दी, उसे हमेशा याद रखा जाएगा।

रामानंद सागर के पुत्र Prem Sagar का निधन न केवल परिवार के लिए, बल्कि पूरे भारतीय फिल्म और टेलीविजन जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपने पिता द्वारा बनाई गई विरासत को आगे बढ़ाया और नए प्रोजेक्ट्स के साथ उसे और मज़बूत किया।

आज जब लोग रामानंद सागर की ‘रामायण’ की चर्चा करेंगे, तो उसमें Prem Sagar का योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाएगा। उनकी यादें और उनका काम भारतीय टेलीविजन के इतिहास में हमेशा ज़िंदा रहेगा।

ॐ शांति।

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Author: kamalkant

कमल कांत सिंह एक उत्साही पत्रकार और लेखक हैं, जिन्हें समाचार और कहानी कहने का गहरा जुनून है। कई वर्षों के अनुभव के साथ, वे सामाजिक मुद्दों, संस्कृति और समसामयिक घटनाओं पर गहन विश्लेषण और आकर्षक लेखन के लिए जाने जाते हैं। कमल का उद्देश्य अपने लेखन के माध्यम से सच्चाई को उजागर करना और पाठकों को प्रेरित करना है। उनकी लेखनी में स्पष्टता, विश्वसनीयता और मानवीय संवेदनाओं का समावेश होता है, जो उन्हें एक विशिष्ट आवाज प्रदान करता है।