पूर्व महासचिव Suravaram Sudhakar Reddy का 83 वर्ष की आयु में निधन

पूर्व महासचिव सुरवरम सुधाकर रेड्डी का 83 वर्ष की आयु में निधन

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वामपंथी आंदोलन के स्तंभ: सीपीआई के पूर्व महासचिव Suravaram Sudhakar Reddy का 83 वर्ष की आयु में निधन

हैदराबाद: वामपंथी राजनीति की मज़बूत आवाज़ और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के पूर्व महासचिव रहे वरिष्ठ नेता Suravaram Sudhakar Reddy का शुक्रवार देर रात (22 अगस्त 2025) 83 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह दो बार लोकसभा के सांसद भी रह चुके थे और लंबे समय तक पार्टी की नीतियों व जन आंदोलनों से जुड़े रहे। वे लंबे समय से बीमार थे और हैदराबाद के गाचीबोवली स्थित केयर अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। परिवार के अनुसार, सांस लेने में तकलीफ और उम्र संबंधी बीमारियों के कारण उन्होंने अंतिम सांस ली।

रेड्डी के परिवार में उनकी पत्नी डॉ. बी.वी. विजयलक्ष्मी (वरिष्ठ एटक नेता) और दो बेटे – निखिल रेड्डी और कपिल रेड्डी हैं।

Suravaram Sudhakar Reddy का जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि

Suravaram Sudhakar Reddy का जन्म 25 मार्च 1942 को तेलंगाना के महबूबनगर ज़िले के कोंद्रवपल्ली गांव में हुआ था। उनके पिता सुरवरम वेंकटराम रेड्डी स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े थे, जबकि उनके चाचा सुरवरम प्रताप रेड्डी कवि होने के साथ-साथ आज़ादी की लड़ाई में सक्रिय रहे और निज़ाम के ज़मींदारी शासन के ख़िलाफ़ संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस पारिवारिक पृष्ठभूमि ने सुधाकर रेड्डी को समाज सेवा और वामपंथी विचारधारा की ओर प्रेरित किया।

पूर्व महासचिव Suravaram Sudhakar Reddy का 83 वर्ष की आयु में निधन

शिक्षा और छात्र राजनीति से शुरुआत

Suravaram Sudhakar Reddy छात्र जीवन से ही सामाजिक आंदोलनों में सक्रिय हो गए थे। मात्र 15 वर्ष की आयु में, उन्होंने कुरनूल के स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं के लिए एक आंदोलन का नेतृत्व किया।

  • 1960 में, वे अखिल भारतीय छात्र संघ (AISF) के कुरनूल ज़िला सचिव बने।
  • 1962 में, उन्होंने वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय की स्थापना के आंदोलन में समिति सचिव की भूमिका निभाई।
  • 1964 में, उन्होंने बी.ए. की पढ़ाई पूरी की और छात्र संघ अध्यक्ष बने।
  • 1967 में, उन्होंने उस्मानिया विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री प्राप्त की और वहाँ छात्र संघ महासचिव चुने गए।
  • 1970 में, वे एआईएसएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए। दो साल बाद, वे अखिल भारतीय युवा महासंघ (एआईवाईएफ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने।

संसदीय जीवन और जनता की आवाज़

Suravaram Sudhakar Reddy का संसदीय जीवन 1988 में शुरू हुआ, जब वे पहली बार नलगोंडा से सांसद चुने गए। बाद में वे दो बार लोकसभा पहुँचे:

  • 12वीं लोकसभा (1998-1999)
  • 14वीं लोकसभा (2004-2009)

संसद में, वे किसानों, मजदूरों और वंचित वर्गों के मुद्दों के एक सशक्त प्रवक्ता बने। उन्होंने सरकारी भ्रष्टाचार को उजागर करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

भाकपा महासचिव के रूप में नेतृत्व

2012 में पटना में आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन में, Suravaram Sudhakar Reddy भाकपा के महासचिव चुने गए। इसके बाद, वे 2015 (पुडुचेरी) और 2018 (कोल्लम) में इस पद पर पुनः निर्वाचित हुए।

यद्यपि उनका कार्यकाल 2021 तक था, फिर भी उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से 24 जुलाई 2019 को महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया।

भाकपा महासचिव के रूप में, उन्होंने किसानों और मजदूरों के जनांदोलनों को एक नई दिशा दी और वामपंथी राजनीति को मजबूत करने का काम किया।

Suravaram Sudhakar Reddy का राजनीतिक सफर

  • वे 1974 से 1984 तक भाकपा आंध्र प्रदेश राज्य कार्यकारिणी के सदस्य रहे।
  • 2000 में आंध्र प्रदेश राज्य सचिव बने और पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल हुए।
  • नलगोंडा, मेडक, महबूबनगर और कुरनूल जिलों में खेतिहर मजदूरों के संघर्षों का नेतृत्व किया।
  • अपनी सादी जीवनशैली और ईमानदार छवि के कारण, वे हमेशा मजदूरों के बीच एक आदर्श बने रहे।

प्रखर वक्ता और जननेता

Suravaram Sudhakar Reddy अपने ओजस्वी भाषणों और स्पष्ट वैचारिक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते थे। उन्होंने हमेशा गरीबों, किसानों, मजदूरों और हाशिए पर पड़े समुदायों की आवाज उठाई।

उनकी सादगी और जनता से जुड़ाव उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाता था। यही कारण है कि वामपंथी राजनीति में उन्हें एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व माना जाता है।

श्रद्धांजलि और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

विभिन्न दलों और नेताओं ने Suravaram Sudhakar Reddy के निधन पर शोक व्यक्त किया:

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने कहा – “रेड्डी महबूबनगर से राष्ट्रीय राजनीति तक एक लंबा सफर तय करके वामपंथी आंदोलनों के माध्यम से गरीबों और मजदूरों की आवाज बने।

बीआरएस अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने उन्हें “तेलंगाना का सपूत” बताया और कहा कि उन्हें हमेशा उत्पीड़ित वर्गों के लिए लड़ने के लिए याद किया जाएगा।

कांग्रेस नेता एन. उत्तम कुमार रेड्डी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बी. महेश कुमार गौड़ ने भी गहरा शोक व्यक्त किया।

भाकपा की आंध्र प्रदेश इकाई के महासचिव के. रामकृष्ण और तेलंगाना इकाई के अध्यक्ष के. संबाशिव राव ने उनके निधन को पार्टी के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया।

अंतिम यात्रा और देहदान

परिवार के अनुसार, Suravaram Sudhakar Reddy का पार्थिव शरीर शनिवार सुबह 10 बजे हैदराबाद स्थित भाकपा के राज्य कार्यालय लाया जाएगा ताकि पार्टी कार्यकर्ता उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दे सकें। इसके बाद उनका पार्थिव शरीर गांधी मेडिकल कॉलेज को दान कर दिया जाएगा।

निष्कर्ष

Suravaram Sudhakar Reddy का जीवन भारतीय राजनीति में वामपंथ की जुझारू और सिद्धांतवादी परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने एक छात्र नेता से लेकर सांसद और भाकपा महासचिव बनने तक का लंबा सफर तय किया।

उनकी आवाज किसानों, मजदूरों और समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के लिए हमेशा गूंजती रहेगी। रेड्डी का निधन, उनकी सादगी, निष्पक्षता, ईमानदारी और वैचारिक दृढ़ता ने भारतीय राजनीति और वामपंथी आंदोलन को गहरी क्षति पहुँचाई है।

वे आज भी प्रेरणा के स्रोत हैं और आने वाली पीढ़ियाँ उन्हें एक सच्चे जननेता के रूप में याद रखेंगी।

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Author: kamalkant

कमल कांत सिंह एक उत्साही पत्रकार और लेखक हैं, जिन्हें समाचार और कहानी कहने का गहरा जुनून है। कई वर्षों के अनुभव के साथ, वे सामाजिक मुद्दों, संस्कृति और समसामयिक घटनाओं पर गहन विश्लेषण और आकर्षक लेखन के लिए जाने जाते हैं। कमल का उद्देश्य अपने लेखन के माध्यम से सच्चाई को उजागर करना और पाठकों को प्रेरित करना है। उनकी लेखनी में स्पष्टता, विश्वसनीयता और मानवीय संवेदनाओं का समावेश होता है, जो उन्हें एक विशिष्ट आवाज प्रदान करता है।