पाकिस्तान का झूठ बेनकाब : राफेल को बदनाम करने की साजिश नाकाम

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पाकिस्तान का झूठ बेनकाब : राफेल को बदनाम करने की साजिश नाकाम, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में पाक हमले का शिकार नहीं हुआ राफेल,दसॉल्ट एविएशन के सीईओ ने चीन-पाक के झूठ को किया बेनकाब – 

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नई दिल्ली – मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिवसीय सैन्य संघर्ष ऑपरेशन सिंदूर के बाद एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया। पाकिस्तान ने दावा किया कि उसने इस संघर्ष में भारतीय वायुसेना के तीन राफेल लड़ाकू विमानों को मार गिराया था। लेकिन अब फ्रांसीसी विमान निर्माता कंपनी दसॉल्ट एविएशन के सीईओ एरिक ट्रैपियर ने इस दावे को पूरी तरह झूठा और निराधार बताया है।

दसॉल्ट एविएशन ने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने केवल एक राफेल विमान खोया, और वह भी दुश्मन के हमले के कारण नहीं, बल्कि उच्च ऊंचाई पर उड़ान के दौरान तकनीकी खराबी के कारण हुआ।

—ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान का दुष्प्रचार

7 मई 2025 को भारत की ओर से पाकिस्तान के खिलाफ आतंकवाद के खिलाफ बड़ी सैन्य कार्रवाई की गई, जिसे ऑपरेशन सिंदूर नाम दिया गया। इस ऑपरेशन का लक्ष्य पाकिस्तानी सीमा में स्थित आतंकी ठिकानों को निशाना बनाना था। इस दौरान पाकिस्तान वायुसेना ने दावा किया कि उसने तीन राफेल समेत पांच भारतीय लड़ाकू विमानों को मार गिराया है।

पाकिस्तान ने दावा किया कि उसके जे-10सी विमानों ने पीएल-15ई मिसाइलों से इन विमानों को निशाना बनाया। लेकिन न तो पाकिस्तान कोई ठोस सबूत पेश कर सका और न ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके दावे की पुष्टि हो सकी।

—दसॉल्ट एविएशन का स्पष्टीकरण

दसॉल्ट एविएशन के सीईओ एरिक ट्रैपियर ने फ्रांसीसी मीडिया से बातचीत में कहा कि,

  1.  “भारत ने एक राफेल विमान जरूर खोया है, लेकिन ऐसा तकनीकी कारणों से हुआ है, किसी पाकिस्तानी हमले की वजह से नहीं।”

उन्होंने यह भी कहा कि राफेल में लगा स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली किसी भी तरह के दुश्मन के रडार या मिसाइल लॉन्चिंग का संकेत नहीं दे रहा था। इसके अलावा दसॉल्ट को मिले फ्लाइट लॉग में किसी भी तरह के युद्ध नुकसान का संकेत नहीं मिला।

—झूठे दावे का असर :  शेयर बाजार में उथल-पुथल

पाकिस्तान के झूठे दावे के बाद दसॉल्ट एविएशन के शेयरों में गिरावट आई। एक महीने में कंपनी के शेयरों में 3% की गिरावट आई। हालांकि, जैसे ही भारत सरकार और दसॉल्ट डसॉल्ट एविएशन ने सच्चाई उजागर की, राफेल में निवेशकों का भरोसा फिर से लौट आया।

8 जुलाई को दसॉल्ट का शेयर €297.40 पर खुला, जो पिछले बंद के मुकाबले हरे रंग में था। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर शेयर €306 से ऊपर बंद होता है, तो एक नई तेजी शुरू हो सकती है।

—भारत सरकार ने पाक के दावे को खारिज किया

भारतीय रक्षा सचिव आर.के. सिंह ने भी सीएनबीसी टीवी-18 को दिए इंटरव्यू में साफ तौर पर कहा कि,

  1.  “आपने राफेल कहा, लेकिन मैं निश्चित रूप से कहता हूं कि यह गलत है। भारत ने केवल एक राफेल खोया और वह किसी दुश्मन के हमले के कारण नहीं बल्कि तकनीकी कारणों से हुआ।”

उन्होंने यह भी कहा कि इस संघर्ष में पाकिस्तान को मानव और सैन्य संसाधनों में कई गुना अधिक नुकसान हुआ और 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए।

—फ्रांसीसी खुफिया एजेंसी का बड़ा खुलासा

दसॉल्ट एविएशन के विमान की छवि खराब करने के लिए दुष्प्रचार अभियान चलाया गया, जिसे चीनी दूतावासों के रक्षा अधिकारियों ने चलाया। फ्रांसीसी खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, यह अभियान इस उद्देश्य से चलाया गया कि जिन देशों ने राफेल खरीदा है या खरीदने की योजना बना रहे हैं, वे इसे रद्द कर दें और चीनी विमानों की ओर आकर्षित हों।

फ्रांसीसी रक्षा मंत्रालय ने कहा :

  1.  “यह न केवल राफेल विमान पर हमला है, बल्कि फ्रांस की सामरिक, तकनीकी और औद्योगिक साख पर भी आघात है।”

—सोशल मीडिया पर फर्जी प्रचार

इस फर्जी समाचार अभियान में एआई द्वारा जनित छवियों, नकली राफेल मलबे की तस्वीरों और हजारों फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट का इस्तेमाल किया गया। इनका उद्देश्य ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राफेल की विफलता को दिखाकर अन्य देशों को इसे न खरीदने के लिए प्रभावित करना था।

हालांकि फ्रांसीसी अधिकारियों ने कहा कि अभी तक चीनी सरकार से कोई सीधा संबंध नहीं मिला है, लेकिन डिजिटल साक्ष्य बताते हैं कि दुष्प्रचार योजनाबद्ध था।

—राफेल की वैश्विक बिक्री और भारत की भूमिका

अब तक दसॉल्ट एविएशन ने 533 राफेल जेट बेचे हैं, जिनमें से 323 मिस्र, भारत, कतर, ग्रीस, यूएई, इंडोनेशिया, सर्बिया और क्रोएशिया जैसे देशों को निर्यात किए गए हैं। भारत ने हाल ही में ₹63,000 करोड़ के सौदे में 26 राफेल विमान खरीदे हैं, जिन्हें नौसेना के आईएनएस विक्रांत पर तैनात किया जाएगा।

—फ्रांस का बयान :  राफेल कोई साधारण विमान नहीं है

फ्रांसीसी रक्षा मंत्रालय ने कहा:

  1.  “राफेल को निशाना बनाना कोई संयोग नहीं है। यह एक रणनीतिक फ्रांसीसी मंच है जो कई देशों की सुरक्षा रणनीति का हिस्सा बन गया है।”

राफेल की विश्वसनीयता को चुनौती देना फ्रांस की रक्षा तकनीक और साझेदारी पर हमला करने जैसा है।

—विशेषज्ञों की राय

रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट (लंदन) के विशेषज्ञ जस्टिन ब्रोंक ने कहा:

  1.  “यह दुष्प्रचार अभियान इंडो-पैसिफिक में फ्रांस और पश्चिमी देशों के बढ़ते प्रभाव को कम करने के लिए चीन का रणनीतिक कदम हो सकता है।”

उनका मानना है कि चीन जानबूझकर राफेल की छवि को कमजोर करके भारत और फ्रांस के बीच रक्षा संबंधों को चुनौती देना चाहता है।

निष्कर्ष :  सत्य ने दुष्प्रचार को हराया

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने केवल एक राफेल विमान खोया, वह भी किसी युद्ध का शिकार नहीं था बल्कि तकनीकी खराबी का नतीजा था। दसॉल्ट एविएशन और भारत सरकार ने मिलकर पाकिस्तान के झूठे प्रचार अभियान को बेनकाब किया।

इस पूरे प्रकरण से यह स्पष्ट हो जाता है कि आने वाले समय में सैन्य शक्ति ही नहीं, बल्कि सूचना युद्ध भी देश की सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा बनता जा रहा है। राफेल को बदनाम करने की कोशिश नाकाम हो गई है और दसॉल्ट एविएशन की साख मजबूत हुई है।

 

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Swatantra Vani
Author: Swatantra Vani

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