पूर्व CJI डी.वाई. चंद्रचूड़ के सरकारी बंगले पर विवाद :

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पूर्व CJI डी.वाई. चंद्रचूड़ के सरकारी बंगले पर विवाद : सुप्रीम कोर्ट ने बंगला खाली कराने के लिए केंद्र सरकार को लिखा पत्र – 

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मुख्य बिंदु:

पूर्व CJI डी.वाई. चंद्रचूड़ ने रिटायरमेंट के आठ महीने बाद भी सुप्रीम कोर्ट द्वारा आवंटित सरकारी बंगला नहीं छोड़ा

सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने केंद्र सरकार से बंगला नंबर 5, कृष्ण मेनन मार्ग को तुरंत खाली कराने का आग्रह किया

पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने बेटियों की विशेष जरूरतों और वैकल्पिक आवास की अनुपलब्धता को इसका कारण बताया

—सुप्रीम कोर्ट प्रशासन का सख्त रुख

सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने 1 जुलाई, 2025 को एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्र सरकार को एक पत्र लिखकर आग्रह किया है कि बंगला नंबर 5, कृष्ण मेनन मार्ग, जो वर्तमान मुख्य न्यायाधीश (CJI) के लिए आरक्षित है, को तुरंत खाली कराया जाए। इस बंगले पर वर्तमान में पूर्व CJI डी.वाई. चंद्रचूड़ का कब्जा है। चंद्रचूड़ नवंबर 2024 में रिटायर होने के बावजूद बंगले में रह रहे हैं।

—नियमों की अनदेखी का मामला

सुप्रीम कोर्ट के जजों के लिए बनाए गए 2022 के संशोधित नियमों के अनुसार कोई भी रिटायर चीफ जस्टिस अधिकतम छह महीने तक बिना किराए के टाइप VII बंगले में रह सकता है। पूर्व CJI डी.वाई. चंद्रचूड़ को CJI रहते हुए टाइप VIII बंगला आवंटित किया गया था, जिसे नियम के अनुसार रिटायरमेंट के तुरंत बाद उन्हें खाली करना था। हालांकि उन्हें विशेष अनुमति के आधार पर 31 मई 2025 तक रहने की अनुमति थी, लेकिन अब वह समय भी समाप्त हो गया है।

— चार जजों को अभी तक नहीं मिला आवास

इस समय सुप्रीम कोर्ट में कुल 33 जज हैं, जो स्वीकृत संख्या 34 से एक कम है। इनमें से चार जजों को अभी तक सरकारी आवास नहीं मिला है, जिसके कारण तीन ट्रांजिट अपार्टमेंट और एक स्टेट गेस्ट हाउस में रह रहे हैं। कोर्ट प्रशासन के अनुसार, सीजेआई के बंगले का कोर्ट हाउसिंग पूल में वापस आना जरूरी है, ताकि नए जजों को उचित आवास मुहैया कराया जा सके।

—पूर्व सीजेआई डी.वाई. चंद्रचूड़ का स्पष्टीकरण

पूर्व सीजेआई डी.वाई. चंद्रचूड़ ने एनडीटीवी से बात करते हुए कहा कि उन्होंने जानबूझकर सरकारी आवास पर कब्जा नहीं किया है। उन्होंने बताया कि उनकी दो बेटियों को विशेष जरूरतें हैं और उनका एम्स में इलाज चल रहा है। उनके अनुसार:

  1.  “हमने दिल्ली में उपयुक्त आवास के लिए काफी खोजबीन की, लेकिन मेरी बेटियों की जरूरतों के अनुसार रैंप, चौड़े दरवाजे और व्हीलचेयर एक्सेस जैसी सुविधाओं वाले घर मिलना बेहद मुश्किल है।”

उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें सरकार ने तीन मूर्ति मार्ग पर एक अस्थायी सरकारी आवास दिया है, लेकिन उसमें मरम्मत का काम चल रहा है। उन्होंने इस स्थिति के बारे में सुप्रीम कोर्ट को पहले ही सूचित कर दिया था।

–समय-समय पर ली गई अनुमति

पूर्व सीजेआई डी.वाई. चंद्रचूड़ दिसंबर 2024 में सरकारी आवास में रहेंगे। चंद्रचूड़ ने तत्कालीन सीजेआई संजीव खन्ना को पत्र लिखकर 30 अप्रैल 2025 तक बंगले में रहने की अनुमति मांगी थी।

यह अनुमति 5,430 रुपये प्रतिमाह लाइसेंस शुल्क के साथ दी गई थी।

इसके बाद उन्होंने मौखिक रूप से 31 मई 2025 तक रहने की एक और मांग की, जिसे अंतिम विस्तार के रूप में मंजूरी दी गई।

इसके बाद अब सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि अब कोई विस्तार संभव नहीं है और नियमों के मुताबिक बंगले पर तत्काल कब्जा लिया जाना चाहिए।

— बेटियों की स्वास्थ्य स्थिति

पूर्व सीजेआई डी.वाई. चंद्रचूड़ ने अपनी बेटियों की स्वास्थ्य स्थिति पर पहली बार सार्वजनिक रूप से बात की। उन्होंने बताया कि उनकी बेटियां नेमालाइन मायोपैथी नामक एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित हैं। इस बीमारी के कारण मांसपेशियों में कमजोरी और सांस संबंधी समस्याएं होती हैं।

उन्होंने कहा कि उनकी बेटियां (16 और 14 वर्ष की) व्हीलचेयर का इस्तेमाल करती हैं और उन्हें ऐसा घर चाहिए जहां बाथरूम और कमरे व्हीलचेयर के अनुकूल हों। इसके चलते उन्हें सामान्य फ्लैट और होटलों में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

—दिल्ली में किराए का घर मिलना चुनौतीपूर्ण

पूर्व सीजेआई ने कहा कि दिल्ली में विशेष जरूरतों को पूरा करने वाला किराए का घर मिलना बहुत मुश्किल है। उन्होंने कहा:

  1.  “निजी मकान मालिक कम से कम 12 महीने का लीज चाहते हैं, जबकि हमें एक महीने से भी कम समय के लिए घर चाहिए। मैं यह अतिरिक्त खर्च वहन नहीं कर सकता।”

—क्या यह पहली बार हो रहा है?

सुप्रीम कोर्ट के सूत्रों के मुताबिक, इससे पहले भी कई पूर्व सीजेआई को कुछ महीनों का एक्सटेंशन दिया गया है, लेकिन इस बार औपचारिक पत्र के जरिए केंद्र से अनुरोध करना एक अभूतपूर्व घटना है। इससे यह साफ हो जाता है कि कोर्ट में आवास की समस्या गंभीर हो गई है।

—अब क्या होगा ?

अब सरकार पर दबाव है कि वह बंगला नंबर 5, कृष्ण मेनन मार्ग को सुप्रीम कोर्ट प्रशासन को सौंप दे, ताकि नए जजों को आवास दिया जा सके। पूर्व सीजेआई डी.वाई. चंद्रचूड़ ने स्पष्ट किया है कि वे अगले 10-15 दिनों में स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी कर लेंगे।

–निष्कर्ष :

यह विवाद एक ओर जहां सुप्रीम कोर्ट की आंतरिक आवास व्यवस्था की समस्या को उजागर करता है, वहीं दूसरी ओर पूर्व सीजेआई डी.वाई. चंद्रचूड़ की व्यक्तिगत परिस्थितियों को भी उजागर करता है। यह स्पष्ट है कि नियमों का पालन करना आवश्यक तो है ही, लेकिन साथ ही मानवीय दृष्टिकोण भी आवश्यक है, खासकर जब मामला विशेष आवश्यकता वाले परिवार की सुविधा से जुड़ा हो।

 

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Swatantra Vani
Author: Swatantra Vani

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