दलाई लामा ने किया उत्तराधिकारी चयन प्रक्रिया का ऐलान :

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दलाई लामा ने किया उत्तराधिकारी चयन प्रक्रिया का ऐलान: चीन नहीं, गादेन फोडरंग ट्रस्ट चुनेगा अगला दलाई लामा, चीन तिलमिलाया – 

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धर्मशाला/बीजिंग: तिब्बती बौद्ध धर्म के सर्वोच्च धार्मिक नेता दलाई लामा ने ऐतिहासिक और साहसिक निर्णय लेते हुए अपने उत्तराधिकारी के चयन की प्रक्रिया की घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दलाई लामा की परंपरा उनके बाद भी जारी रहेगी और उनके उत्तराधिकारी की पहचान करने का अधिकार केवल “गादेन फोडरंग ट्रस्ट” को होगा। इस निर्णय के तुरंत बाद चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि “दलाई लामा का पुनर्जन्म चीनी सरकार की अनुमति से ही होगा।”

इस बयान के बाद तिब्बती समुदाय में उत्साह और उम्मीद की लहर है, जबकि बीजिंग सरकार इसे खुली चुनौती के रूप में देख रही है। आइए विस्तार से जानते हैं इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि और भविष्य पर इसके प्रभाव के बारे में।

—कौन हैं दलाई लामा ?

दलाई लामा तिब्बती बौद्ध धर्म की गेलुग परंपरा के आध्यात्मिक प्रमुख हैं। वर्तमान 14वें दलाई लामा का जन्म 1935 में तिब्बत के तक्सेर गांव में “ल्हामो थोंडुप” के रूप में हुआ था। उन्हें मात्र दो वर्ष की आयु में पिछले दलाई लामा का पुनर्जन्म घोषित किया गया और उनका नाम “तेनजिन ग्यात्सो” रखा गया।

जब चीन ने 1950 में तिब्बत पर आक्रमण कर उस पर कब्ज़ा कर लिया और 1959 में ल्हासा में विद्रोह हुआ, तो दलाई लामा को भारत में शरण लेनी पड़ी। तब से वे धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश) में रह रहे हैं, जहाँ निर्वासित तिब्बती सरकार का मुख्यालय भी है।

—उत्तराधिकारी चयन प्रक्रिया की घोषणा

अपने 90वें जन्मदिन (6 जुलाई 2025) से पहले दलाई लामा ने एक वीडियो संदेश में कहा:

  1.  “दलाई लामा की परंपरा मेरे बाद भी जारी रहेगी। उत्तराधिकारी की पहचान गादेन फोडरंग ट्रस्ट द्वारा की जाएगी, जिसमें किसी भी सरकार, संस्था या बाहरी शक्ति का हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं होगा।” उन्होंने यह निर्णय तिब्बत, मंगोलिया, रूस, हिमालयी क्षेत्र और चीन में रहने वाले तिब्बती बौद्ध अनुयायियों की अपील के बाद लिया। उन्होंने कहा कि गादेन फोडरंग ट्रस्ट तिब्बती बौद्ध परंपराओं और धार्मिक नेताओं के परामर्श से इस प्रक्रिया को पूरा करेगा।

—गादेन फोडरंग ट्रस्ट क्या है?

गादेन फोडरंग ट्रस्ट की स्थापना दलाई लामा ने स्वयं वर्ष 2015 में की थी। यह ट्रस्ट उनके कार्यालय से संबंधित सभी धार्मिक और प्रशासनिक कार्यों का संचालन करता है। अब इस ट्रस्ट के पास दलाई लामा के उत्तराधिकारी चयन प्रक्रिया का एकमात्र अधिकार है।

—चीन का तीखा विरोध

दलाई लामा की इस घोषणा पर चीन ने तुरंत तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने कहा:

  1.  “दलाई लामा, पंचेन लामा और अन्य उच्च बौद्ध गुरुओं का पुनर्जन्म केवल पारंपरिक ‘स्वर्ण कलश’ प्रणाली और चीनी सरकार की अनुमति के अनुसार ही मान्य होगा।”

बीजिंग ने भारत में एक बयान भी जारी किया जिसमें कहा गया कि दलाई लामा का पुनर्जन्म चीन के कानूनों और परंपराओं के अनुसार होगा, न कि किसी ट्रस्ट के निर्णय से। 2007 में पारित राज्य धार्मिक मामलों के ब्यूरो के आदेश संख्या 5 के तहत, चीन का दावा है कि किसी भी तिब्बती आध्यात्मिक नेता का पुनर्जन्म सरकारी मंजूरी के बिना अमान्य होगा।

—दलाई लामा की चेतावनी: “कोई हस्तक्षेप स्वीकार नहीं”

दलाई लामा ने यह स्पष्ट किया कि उनके उत्तराधिकारी की खोज तिब्बती बौद्ध परंपराओं, “शपथ-बुद्ध धर्म संरक्षकों” और गंडेन फोडरंग ट्रस्ट के मार्गदर्शन में की जाएगी। उन्होंने कहा:

  1.  “जो लोग पुनर्जन्म और कर्म के सिद्धांत में विश्वास नहीं करते हैं, उन्हें इसमें हस्तक्षेप करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।”

दलाई लामा ने पहले भी चेतावनी दी है कि पुनर्जन्म की प्रक्रिया राजनीतिक हितों से प्रेरित हस्तक्षेप की संभावना है, और इस बार भी उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से चीन पर निशाना साधा।

—भविष्य में दो दलाई लामा?

विशेषज्ञों का मानना है कि दलाई लामा की मृत्यु के बाद चीन अपना खुद का “आधिकारिक” दलाई लामा नियुक्त कर सकता है। साथ ही, गादेन फोडरंग ट्रस्ट द्वारा चुने गए व्यक्ति को दुनिया भर के तिब्बती समुदाय का समर्थन प्राप्त होगा। इससे पहले पंचेन लामा के चयन में भी ऐसा हुआ है, जहां चीन द्वारा दो पंचेन लामा और दलाई लामा का चयन किया गया था।

ऐसी स्थिति में भविष्य में दो दलाई लामा हो सकते हैं – एक चीन द्वारा समर्थित और दूसरा धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चुना गया।

—भारत की भूमिका

हालांकि भारत सरकार ने इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन भारत ने हमेशा दलाई लामा को “आध्यात्मिक अतिथि” माना है। प्रधानमंत्री मोदी हर साल उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं भेजते हैं।

इस साल उनके 90वें जन्मदिन पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और हिमाचल प्रदेश और सिक्किम के मुख्यमंत्री धर्मशाला में उनके साथ मौजूद रहेंगे।

—अमेरिकी समर्थन

अमेरिका ने 2020 में पारित “तिब्बती नीति और समर्थन अधिनियम” के ज़रिए यह स्पष्ट कर दिया था कि दलाई लामा का उत्तराधिकारी चुनना एक धार्मिक प्रक्रिया है और इसमें किसी भी तरह का सरकारी हस्तक्षेप अस्वीकार्य है। अमेरिका ने यह भी कहा कि अगर चीन जबरन किसी को दलाई लामा नियुक्त करता है, तो अमेरिका उसे मान्यता नहीं देगा।

—निष्कर्ष :  परंपरा बनाम राजनीति

दलाई लामा के इस साहसिक कदम ने न केवल तिब्बती परंपरा को मजबूत किया है, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता के लिए वैश्विक उदाहरण भी स्थापित किया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है:

  1.  “दलाई लामा की परंपरा मेरे बाद भी जारी रहेगी। किसी भी बाहरी ताकत को इसमें हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।”

यह घोषणा चीन के लंबे समय से चले आ रहे उस दावे को चुनौती देती है कि वह तिब्बती धार्मिक प्रक्रिया को राजनीतिक नियंत्रण में लाना चाहता है।

इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि दलाई लामा का उत्तराधिकारी कौन होगा, यह अब केवल तिब्बती बौद्ध धर्म के लिए चिंता का विषय है और इसका फैसला तिब्बती बौद्ध धर्म की परंपरा द्वारा किया जाएगा, न कि चीन की शक्ति द्वारा।

 

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Swatantra Vani
Author: Swatantra Vani

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