केरल एयरपोर्ट पर खड़ा एफ-35बी फाइटर जेट बना रहस्य का विषय, ब्रिटेन ने मरम्मत की जानकारी रखी गोपनीय रखी, जल्द सेवा में लौटने का जताया भरोसा :
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🔹अपडेट: यूके-इजराइल F-35 डील पर लंदन हाईकोर्ट का फैसला भी आया
ब्रिटेन का अत्याधुनिक F-35B फाइटर जेट पिछले कई दिनों से तिरुवनंतपुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर खड़ा है और इसके आसपास रहस्यमयी माहौल है। यह फाइटर एयरक्राफ्ट रॉयल एयर फोर्स का हिस्सा है और इसे दुनिया का सबसे एडवांस मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट माना जाता है। अब ब्रिटेन ने इस F-35B फाइटर जेट की मरम्मत और रखरखाव से जुड़ी जानकारी को पूरी तरह गोपनीय रखने का फैसला किया है।
ब्रिटेन सरकार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, यह F-35B फाइटर जेट जल्द ही तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर मरम्मत के बाद रॉयल एयर फोर्स की सक्रिय सेवा में लौट आएगा। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया का ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया जाएगा और न ही भारत सरकार के साथ हुई बातचीत की जानकारी साझा की जाएगी।
🔹F-35B फाइटर जेट तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर क्यों खड़ा है ?
14 जून की रात को इस F-35B फाइटर जेट ने अरब सागर के पश्चिमी तट के पास तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग की। फ्लाइट रडार वेबसाइट के अनुसार, विमान ने “SQUAWK 7700” कोड प्रसारित किया, जो दर्शाता है कि विमान मुश्किल में है और उसे एयर ट्रैफिक कंट्रोल से विशेष प्राथमिकता की आवश्यकता है। यह कोड केवल 43 सेकंड के लिए सक्रिय रहा, लेकिन उसके बाद संबंधित डेटा को वेबसाइट से हटा दिया गया।
भारतीय रक्षा सूत्रों का मानना है कि यह F-35B फाइटर जेट 1 जून को भारतीय और यूके की नौसेनाओं द्वारा संयुक्त रूप से किए गए समुद्री अभ्यास का हिस्सा था, जिसमें यूके का कैरियर स्ट्राइक ग्रुप (UK CSG25) भी शामिल था।
🔹मरम्मत पर रहस्य, अभी तक नहीं पहुंची विशेषज्ञ टीम :
ब्रिटिश उच्चायोग के प्रवक्ता ने पुष्टि की है कि यह F-35B फाइटर जेट “इंजीनियरिंग समस्या” के कारण तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर फंसा हुआ है। इसे जल्द ही एयरपोर्ट की रिपेयर एंड ओवरहाल (एमआरओ) सुविधा में ले जाया जाएगा, लेकिन इसके लिए ब्रिटेन से विशेष उपकरण और विशेषज्ञ इंजीनियरों की टीम लाना जरूरी है।
अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि यह विशेषज्ञ टीम भारत कब पहुंचेगी और मरम्मत की प्रक्रिया कब तक चलेगी। विमान को लेकर सुरक्षा भी काफी कड़ी है। सीआईएसएफ के सुरक्षाकर्मी हर समय विमान की निगरानी कर रहे हैं और किसी भी बाहरी व्यक्ति को विमान के पास जाने की इजाजत नहीं है।
🔹एचएमएस प्रिंस ऑफ वेल्स के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं :
यह भी माना जा रहा है कि यह एफ-35बी लड़ाकू विमान ब्रिटेन के विमानवाहक पोत एचएमएस प्रिंस ऑफ वेल्स से उड़ान भरकर आया है, जो फिलहाल हिंद-प्रशांत क्षेत्र में तैनात है। हालांकि, ब्रिटेन की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि मरम्मत का काम पूरा होने तक एचएमएस प्रिंस ऑफ वेल्स उसी क्षेत्र में रहेगा या नहीं।
🔹एफ-35बी लड़ाकू विमान इतना महत्वपूर्ण क्यों है ?
एफ-35बी लड़ाकू विमान दुनिया के सबसे उन्नत युद्धक विमानों में से एक माना जाता है। यह एक STOVL (शॉर्ट टेक-ऑफ और वर्टिकल लैंडिंग) सक्षम विमान है, जो सीमित रनवे वाले युद्धक्षेत्रों में भी आसानी से उड़ान भर सकता है और उतर सकता है।
इस विमान की सबसे खास बात इसकी नेटवर्किंग क्षमता है, जो इसे अन्य सैन्य उपकरणों के साथ वास्तविक समय में डेटा साझा करने की अनुमति देती है। यही कारण है कि इसे “कनेक्टेड कॉम्बैट एयरक्राफ्ट” कहा जाता है।
भारत जैसे रणनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह के विमान की लैंडिंग और फिर यहां मरम्मत कार्य करना दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग की गंभीरता को दर्शाता है।
🔹लंदन हाई कोर्ट का फैसला: इजरायल को F-35 के पुर्जों का निर्यात वैध –
इस बीच, ब्रिटेन से जुड़ी एक और बड़ी खबर सामने आई है। लंदन हाई कोर्ट ने ब्रिटिश सरकार के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें उसने F-35B फाइटर जेट के पुर्जों को इजरायल को निर्यात करने की अनुमति दी थी, भले ही इन पुर्जों का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए गाजा में किया जा सकता हो।
वेस्ट बैंक में सक्रिय मानवाधिकार संगठन अल-हक ने ब्रिटिश डिपार्टमेंट फॉर बिजनेस एंड ट्रेड के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। उन्होंने तर्क दिया कि इजरायल की मानवीय पहुंच और कैदियों के साथ व्यवहार के बारे में सवाल उठाए जाने के बावजूद एफ-35बी लड़ाकू विमान के पुर्जों के निर्यात की अनुमति देना अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है।
लेकिन अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि एफ-35बी लड़ाकू विमान वैश्विक रक्षा कार्यक्रम का हिस्सा है और इसके निर्यात को रोकने से अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इस तरह के फैसले से ब्रिटेन के अमेरिका और नाटो के साथ संबंध कमजोर हो सकते हैं।
🔹निष्कर्ष : सामरिक और कूटनीतिक मायने
भारत में एफ-35बी लड़ाकू विमान की मौजूदगी न केवल सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह भारत-ब्रिटेन संबंधों में एक नया मोड़ भी है। भारत में किए जा रहे मरम्मत कार्य से संकेत मिलता है कि वैश्विक शक्तियां अब भारत की रक्षा मरम्मत सेवाओं पर भरोसा करने लगी हैं।
साथ ही, एफ-35बी लड़ाकू विमान के पुर्जों का इजरायल को निर्यात और इस पर लंदन की अदालत का समर्थन दर्शाता है कि वैश्विक स्तर पर यह विमान किस हद तक प्रभावशाली है।
जबकि केरल एयरपोर्ट पर खड़ा एफ-35बी लड़ाकू विमान गोपनीयता की परतों में तो लिपटा ही है, यह वैश्विक राजनीति, कूटनीति और सामरिक संतुलन का केंद्र भी बन रहा है। आने वाले दिनों में जब यह विमान फिर से उड़ान भरेगा तो यह न केवल मरम्मत की सफलता होगी, बल्कि यह वैश्विक रक्षा सहयोग का प्रतीक भी होगा।
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Author: Swatantra Vani
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