पांच राज्यों में हुए उपचुनाव के नतीजे : उपचुनाव में विपक्ष की लहर

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

पांच राज्यों में हुए उपचुनाव के नतीजे : उपचुनाव में विपक्ष की लहर, AAP और कांग्रेस की बड़ी जीत, BJP को करारा झटका – 

______

नई दिल्ली:
भारत के पांच राज्यों में हाल ही में संपन्न हुए उपचुनावों ने देश की राजनीति में नए समीकरण बनाए हैं। जहां एक तरफ आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस ने इन उपचुनावों में शानदार प्रदर्शन किया है, वहीं सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बड़ा झटका लगा है। इन उपचुनावों के नतीजे बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों की दिशा तय कर सकते हैं।

गुजरात, केरल, पंजाब, पश्चिम बंगाल और एक बार फिर गुजरात की कड़ी सीट पर हुए इन पांच उपचुनावों के नतीजों ने साफ कर दिया है कि विपक्षी भारतीय गठबंधन को जनता का समर्थन मिल रहा है।

🔹गुजरात के विसावदर उपचुनाव में आप की वापसी

गुजरात की विसावदर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में आम आदमी पार्टी ने बड़ी जीत दर्ज की है। गोपाल इटालिया ने भाजपा के किरीट पटेल को 17,500 वोटों से हराकर इस सीट को आप के पक्ष में वापस ला दिया है। यह वही सीट है जिसे 2022 में आप के भूपेंद्र भयानी ने जीता था, लेकिन बाद में वह भाजपा में शामिल हो गए। गोपाल इटालिया की जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए आप के प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने कहा, “अगर गुजरात में भाजपा को कोई हरा सकता है तो वह आम आदमी पार्टी है। हम 2027 में सरकार बनाएंगे।” यह उपचुनाव आप के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी दिल्ली विधानसभा चुनाव में हार के बाद पहली बार बड़े चुनावी मंच पर लौटी है। केरल के नीलांबुर उपचुनाव में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन किया केरल की नीलांबुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने जीत हासिल की है। कांग्रेस उम्मीदवार आर्यदान शौकत ने सीपीआई(एम) के एम. स्वराज को 11,000 से अधिक मतों से हराया। आर्यदान शौकत कांग्रेस के पूर्व दिग्गज नेता आर्यदान मोहम्मद के बेटे हैं और एक लोकप्रिय फिल्म निर्माता भी हैं। नीलांबुर सीट की खास बात यह है कि यह वायनाड लोकसभा क्षेत्र में स्थित है, जिसका प्रतिनिधित्व प्रियंका गांधी वाड्रा करती हैं। इस जीत को कांग्रेस के लिए मनोबल बढ़ाने वाला माना जा रहा है, खासकर अगले साल केरल विधानसभा चुनाव से पहले। इस उपचुनाव ने राज्य में कांग्रेस की पकड़ को और मजबूत किया है। पश्चिम बंगाल के कालीगंज उपचुनाव में टीएमसी का दबदबा पश्चिम बंगाल के नदिया जिले की कालीगंज सीट पर हुए उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की उम्मीदवार अलीफा अहमद ने भाजपा उम्मीदवार आशीष घोष को 50,000 से अधिक मतों से हराकर बड़ी जीत हासिल की। यह उपचुनाव टीएमसी विधायक नसीरुद्दीन अहमद के निधन के बाद हुआ था। अलीफा अहमद उनकी बेटी हैं। कालीगंज मुस्लिम बहुल इलाका है जहां मुस्लिम आबादी 54% है और यह जीत 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी की पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। हालांकि, इस उपचुनाव के दौरान एक बच्चे की मौत हो गई, जो राज्य में चुनावी हिंसा की गंभीरता को दर्शाता है।

🔹पंजाब में लुधियाना पश्चिम उपचुनाव में AAP ने जीत दर्ज की :

पंजाब में लुधियाना पश्चिम सीट पर भी आम आदमी पार्टी ने कब्ज़ा कर लिया। AAP उम्मीदवार संजय अरोड़ा ने कांग्रेस के भरत आशु को 10,000 वोटों से हराया। AAP विधायक गुरप्रीत गोगी के निधन के बाद यह सीट खाली हुई थी।

इस उपचुनाव में AAP ने पूरी ताकत झोंक दी थी। अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने खुद यहां प्रचार किया था। संजय अरोड़ा की जीत इस बात का संकेत है कि पंजाब में AAP की पकड़ अभी भी मजबूत है।

🔹गुजरात की कड़ी सीट पर बीजेपी का कब्ज़ा बरकरार :

इन पांच उपचुनावों में से सिर्फ़ एक सीट बीजेपी के खाते में आई- गुजरात की कड़ी विधानसभा सीट। यहां बीजेपी के राजेंद्र चावड़ा ने कांग्रेस के रमेश चावड़ा को 40,000 वोटों से हराया। यह सीट 2017 से बीजेपी के पास है और हाल ही में विधायक करशन सोलंकी के निधन के बाद खाली हुई थी।

🔹नेताओं की प्रतिक्रियाएँ :

अरविंद केजरीवाल (आप): “देश में बदलाव की लहर है। ये उपचुनाव उस लहर की शुरुआत है।”

इसुदान गढ़वी (आप गुजरात प्रमुख): “2027 में गुजरात में आप की सरकार बनेगी। लोग बदलाव चाहते हैं।”

प्रियंका गांधी (कांग्रेस): “नीलांबुर की जीत जनता के विश्वास की जीत है। कांग्रेस फिर से लोगों के दिलों में जगह बना रही है।”

ममता बनर्जी (टीएमसी): “कालीगंज की जीत तृणमूल की नीतियों और जनसेवा की जीत है।”

जेपी नड्डा (भाजपा): “हमें आत्ममंथन की जरूरत है। उपचुनावों के नतीजे हमें और मेहनत करने के लिए प्रेरित करते हैं।”

🔹चुनाव आयोग की नई पहल :

चुनाव आयोग ने इन उपचुनावों में कई अहम बदलाव किए। पहली बार सभी मतदान केंद्रों पर 100% वेबकास्टिंग की व्यवस्था की गई, मोबाइल डिपॉज़िट सुविधा भी उपलब्ध कराई गई और मतदान प्रतिशत को जल्दी अपडेट करने की प्रक्रिया अपनाई गई।

हालांकि, कुछ संवेदनशील बूथों पर आखिरी समय में भारी मतदान को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं। खास तौर पर पश्चिम बंगाल में बम विस्फोट जैसी घटनाओं ने आयोग की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।

निष्कर्ष :   उपचुनावों ने राजनीतिक माहौल बदला

इन उपचुनावों के नतीजों ने साफ कर दिया है कि विपक्षी दल फिर से सक्रिय हो रहे हैं। दिल्ली में हार के बाद आदमी पार्टी ने फिर खुद को साबित किया है, वहीं केरल में कांग्रेस ने वापसी की है। वहीं, भाजपा के लिए यह चेतावनी है कि जनता अब विकल्प तलाश रही है। यह उपचुनाव आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सेमीफाइनल साबित हुआ है और इससे साफ है कि देश की राजनीति नए मोड़ पर खड़ी है।

Swatantra Vani
Author: Swatantra Vani

“स्वतंत्र वाणी” – जहाँ सच की आवाज़ कभी दबती नहीं। स्वतंत्र वाणी एक स्वतंत्र ऑनलाइन समाचार और ब्लॉग मंच है, जिसका उद्देश्य है पाठकों तक सही, निष्पक्ष और ताज़ा जानकारी पहुँचाना। यहाँ राजनीति, शिक्षा, तकनीक, स्वास्थ्य, मनोरंजन, खेल और लाइफ़स्टाइल से जुड़ी हर महत्वपूर्ण ख़बर और जानकारी आसान भाषा में प्रस्तुत की जाती है। हम मानते हैं कि सच्चाई कभी दबाई नहीं जा सकती, इसलिए हमारा हर लेख और ख़बर तथ्यों पर आधारित होती है, ताकि पाठकों तक भरोसेमंद और निष्पक्ष पत्रकारिता पहुँच सके।