पूर्व भारतीय स्पिनर दिलीप दोशी का निधन, 77 साल की उम्र में ली अंतिम सांस | क्रिकेट जगत में शोक की लहर :
भारतीय क्रिकेट को एक और बड़ा झटका लगा है। भारत के महान बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाज दिलीप दोशी का सोमवार को 77 साल की उम्र में लंदन में निधन हो गया। दिलीप दोशी पिछले कुछ समय से दिल की बीमारी से पीड़ित थे और आखिरकार कार्डियक अरेस्ट के कारण उन्होंने अंतिम सांस ली। बीसीसीआई, सौराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन और क्रिकेट जगत के तमाम दिग्गजों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
🔹दिलीप दोशी : एक विलक्षण क्रिकेटर की शुरुआत –
दिलीप दोशी ने भारतीय क्रिकेट टीम के लिए अपने करियर की शुरुआत 11 सितंबर 1979 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट मैच से की थी। खास बात यह थी कि उन्होंने 32 साल की उम्र में भारत के लिए डेब्यू किया था। आमतौर पर इस उम्र में खिलाड़ियों का करियर ढलान पर होता है, लेकिन दिलीप दोशी ने इसे नई शुरुआत में बदल दिया।
अपने पहले ही टेस्ट में उन्होंने 6 विकेट लेकर क्रिकेट प्रेमियों को चौंका दिया था। अपने पूरे करियर में दिलीप दोषी ने 33 टेस्ट मैच खेले, जिसमें उन्होंने कुल 114 विकेट लिए। इसके अलावा उन्होंने 15 वनडे मैचों में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए 22 विकेट भी लिए।
🔹दिलीप दोषी का करियर और आंकड़े :
टेस्ट मैच: 33
टेस्ट विकेट: 114
5 विकेट हॉल: 6
वनडे मैच: 15
वनडे विकेट: 22
इकॉनमी रेट (वनडे में): 3.96
प्रथम श्रेणी मैच: 238
विकेट (एफसी): 898
5 विकेट हॉल (एफसी): 43
इन आंकड़ों से साफ है कि दिलीप दोषी ने अपने खेल से अमिट छाप छोड़ी। उन्होंने घरेलू क्रिकेट में बंगाल और सौराष्ट्र का प्रतिनिधित्व किया। इसके अलावा उन्होंने लंबे समय तक इंग्लैंड के लिए नॉटिंघमशायर और वारविकशायर जैसी काउंटी टीमों के लिए भी खेला।
🔹1981 मेलबर्न टेस्ट: दिलीप दोषी की वीरता –
दिलीप दोषी का सबसे यादगार प्रदर्शन 1981 के मेलबर्न टेस्ट में देखने को मिला। इस मैच में उन्होंने पैर की हड्डी टूटने के बावजूद गेंदबाजी की और पांच विकेट लिए। इस मैच में भारत ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऐतिहासिक जीत दर्ज की। इस जीत में करसन घावरी और कपिल देव के साथ उन्होंने अहम भूमिका निभाई।
उनके जुनून से पता चलता है कि वे न केवल प्रतिभाशाली थे, बल्कि बेहद समर्पित और जुझारू क्रिकेटर भी थे। वे हमेशा कहते थे, “स्पिन गेंदबाजी दिमाग की लड़ाई है।”
🔹बिशन सिंह बेदी की छाया में, लेकिन अपना अलग मुकाम :
दिलीप दोषी का करियर ऐसे समय में शुरू हुआ जब भारत में स्पिन के चार बड़े नाम- बिशन सिंह बेदी, चंद्रशेखर, प्रसन्ना और वेंकटराघवन का दबदबा था। बेदी के रिटायरमेंट के बाद ही दिलीप दोषी को मौका मिला और उन्होंने इस मौके का पूरा फायदा उठाया।
वे गेंद को हवा में उड़ान देने में माहिर थे और उनकी लाइन-लेंथ बेहद सटीक होती थी। ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज जैसी टीमों के बल्लेबाज भी उनकी ‘आर्म बॉल’ से परेशान रहते थे।
🔹अचानक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से विदाई :
1983 में पाकिस्तान दौरे के दौरान जब जावेद मियांदाद ने उनसे मैदान पर बार-बार मजाकिया अंदाज में पूछा, “अरे दिलीप, तुम्हारा कमरा नंबर क्या है?”, तो दिलीप दोषी को अहसास हुआ कि अब क्रिकेट बदल रहा है। इसके बाद उन्होंने खुद को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से अलग कर लिया।
बाद में उन्होंने अपने जीवन पर आधारित एक आत्मकथा स्पिन पंच भी लिखी, जिसमें उन्होंने भारतीय क्रिकेट की आंतरिक राजनीति, चयन प्रक्रिया और अपने अनुभवों का खुलासा किया।
🔹क्रिकेट के बाद का जीवन
क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद दिलीप दोषी लंदन में व्यापार जगत में उतरे और एक सफल व्यवसायी बन गए। वह अपना समय लंदन, मुंबई और राजकोट के बीच बिताते थे। वह सुनील गावस्कर के करीबी दोस्तों में से एक थे और उन्होंने ही गावस्कर की पत्नी मर्शनील से उनकी पहली मुलाकात कराई थी।
🔹दिलीप दोषी को श्रद्धांजलि :
उनके निधन के बाद क्रिकेट जगत की कई बड़ी हस्तियों ने शोक जताया:
अनिल कुंबले ने एक्स पर लिखा:
- “दिलीप भाई के निधन की खबर सुनकर बहुत दुख हुआ। भगवान उनके परिवार को इस दुख को सहने की शक्ति दे। नयन, मैं आपके बारे में सोच रहा हूँ।”
विवियास लक्ष्मण ने लिखा:
- “दिलीप दोषी सर के साथ क्रिकेट पर बात करना हमेशा एक खास अनुभव रहा। उनके परिवार के प्रति मेरी संवेदनाएँ।”
रवि शास्त्री ने लिखा:
- “दिलीप दोषी एक बेहतरीन इंसान और बेहतरीन गेंदबाज़ थे। वे हमेशा अनुशासित रहते थे। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे।”
बीसीसीआई अध्यक्ष रोजर बिन्नी ने कहा:
- “दिलीप दोषी स्पिन बॉलिंग के सच्चे मास्टर थे। उन्होंने भारतीय क्रिकेट को एक नई दिशा दी। उनका योगदान अमूल्य है।”
सौराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन ने एक बयान जारी कर कहा:
- “दिलीप दोषी के निधन से हमें गहरा दुख हुआ है। उन्होंने क्रिकेट में अनुशासन, समर्पण और उत्कृष्टता की मिसाल कायम की।”
🔹शोक में डूबा परिवार :
दिलीप दोशी के परिवार में उनकी पत्नी कालिंदी, बेटा नयन (जो सौराष्ट्र और सरे के लिए क्रिकेट खेल चुका है) और बेटी विशाखा हैं। बेटे नयन दोशी ने भी अपने पिता की तरह बाएं हाथ की स्पिन को अपनी ताकत बनाया।
🔹निष्कर्ष :
दिलीप दोशी सिर्फ एक क्रिकेटर नहीं थे, वे एक विरासत थे – खेल के प्रति समर्पण, अनुशासन और सम्मान की। 32 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में प्रवेश करने वाले दिलीप दोशी ने दिखाया कि उम्र सिर्फ एक संख्या है, जुनून और कड़ी मेहनत मायने रखती है।
उनका जाना क्रिकेट की एक स्वर्णिम विरासत का अंत है, लेकिन उनकी यादें, उनका प्रदर्शन और उनके आदर्श हमेशा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेंगे।
ओम शांति 🙏
Author: Swatantra Vani
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