ईरान-इजराइल युद्ध में अमेरिकी हस्तक्षेप से बढ़ा संकट, इजरायल ने ट्रंप के फैसले की तारीफ की, संयुक्त राष्ट्र और कई देशों ने जताई चिंता :
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मध्य पूर्व में उभरते ईरान-इजराइल युद्ध ने वैश्विक चिंता का रूप तब ले लिया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों – नतांज, इस्फहान और फोर्डो पर हवाई हमले का आदेश दिया। रविवार को अमेरिका द्वारा ईरान के तीन परमाणु ठिकानों – नतांज, इस्फहान और फोर्डो पर हवाई हमले किए जाने के बाद वैश्विक मंच पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। यह कार्रवाई ईरान-इजराइल युद्ध के दूसरे सप्ताह में हुई है, जिसने मध्य पूर्व में शांति प्रयासों को गंभीर झटका दिया है।
इजराइल ने जहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले को “ऐतिहासिक” और “साहसिक” बताया, वहीं संयुक्त राष्ट्र – चीन, रूस, फ्रांस और भारत समेत कई वैश्विक शक्तियों ने इस कार्रवाई को क्षेत्रीय और वैश्विक शांति के लिए खतरा बताया है और तनाव को तत्काल कम करने की अपील की है। सभी ने शांतिपूर्ण समाधान के जरिए स्थिति को सुलझाने का आह्वान किया है।
🔹ट्रंप ने कहा- “ईरान को अब शांति स्थापित कर लेनी चाहिए” :
शनिवार रात को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस से राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा, “मध्य पूर्व का गुंडा बन चुके ईरान को अब शांतिपूर्ण रास्ता अपनाना होगा। हमने उसके प्रमुख परमाणु संवर्धन केंद्रों को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। अब ईरान के पास शांति का रास्ता अपनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।” डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिकी कार्रवाई ने ईरान को यह संदेश दिया है कि अब शांति केवल ताकत के जरिए ही लाई जा सकती है।
ट्रंप के मुताबिक, यह कार्रवाई
- “शांति स्थापित करने के लिए ताकत का इस्तेमाल” है। यह बयान ईरान-इजराइल युद्ध की भयावहता को और गहरा करता नजर आ रहा है।
यह हमला ऐसे समय हुआ है जब ईरान-इजराइल युद्ध पहले से ही तेजी से बढ़ रहा है और इसके कारण मध्य पूर्व क्षेत्र में अस्थिरता अपने चरम पर है।
🔹इजराइल का समर्थन, कहा- यह फैसला इतिहास बदल देगा :
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा, “यह ऐसा फैसला है जो इतिहास बदल देगा। आपने ईरान जैसी खतरनाक सरकार को दुनिया के सबसे खतरनाक हथियारों से वंचित करने का साहसिक फैसला लिया है। यह इतिहास में दर्ज होगा। ट्रंप ने दिखा दिया है कि शांति के लिए पहले ताकत दिखानी पड़ती है।” नेतन्याहू ने कहा कि यह कदम ईरान की परमाणु हथियार बनाने की महत्वाकांक्षा को रोकने में मील का पत्थर साबित होगा। “डोनाल्ड ट्रंप और मैंने हमेशा कहा है, ‘शांति ताकत से आती है।’ और आज रात अमेरिका ने ऐसा ही किया है।” उन्होंने कहा, “पहले ताकत आती है, फिर शांति।”
🔹ईरान ने कड़ा विरोध जताया, “हमले के गंभीर परिणाम होंगे” :
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य होने के बावजूद अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय कानून, यूएन चार्टर और परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) का घोर उल्लंघन किया है। “ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम पर यह हमला अवैध, खतरनाक और आपराधिक है। संयुक्त राष्ट्र के हर सदस्य को इस बारे में चिंतित होना चाहिए।”
अराकची ने चेतावनी दी, “यह हमला न केवल खतरनाक है, बल्कि एक अपराध है। ईरान अब आत्मरक्षा के सभी वैध विकल्पों को अपनाने के लिए स्वतंत्र है।”
🔹संयुक्त राष्ट्र महासचिव की चेतावनी: “स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है” –
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस घटना को “बेहद खतरनाक” बताया और कहा कि “क्षेत्र में तनाव पहले से ही चरम पर है और यह हमला शांति और सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है। स्थिति जल्द ही नियंत्रण से बाहर हो सकती है, जिससे नागरिकों और पूरी दुनिया को भारी नुकसान हो सकता है।
गुटेरेस ने दो टूक कहा, “अब समय आ गया है जब कूटनीति ही समाधान है। सैन्य कार्रवाई इस संकट को और बढ़ाएगी।” उन्होंने चेतावनी दी, “अगर यह संघर्ष जल्द नहीं रुका, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने दोहराया कि इस संकट को हल करने के लिए केवल कूटनीतिक प्रयास ही संभव हैं।
गुटेरेस ने सभी सदस्य देशों से तनाव कम करने और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार काम करने की अपील की।
🔹वैश्विक प्रतिक्रियाएँ – दो गुटों में बंटी दुनिया :
डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले पर दुनिया दो खेमों में बंट गई है। एक तरफ इजरायल, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश अमेरिका के साथ खड़े हैं, वहीं दूसरी तरफ संयुक्त राष्ट्र, रूस, चीन, फ्रांस, क्यूबा, मैक्सिको और पाकिस्तान जैसे देशों ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है।
जापान, इटली और न्यूजीलैंड जैसे देशों ने भी कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया है।
🔹यूरोप की प्रतिक्रिया, कहा ईरान को बातचीत की मेज पर लौटना चाहिए :
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा, “ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकता। मौजूदा तनाव को देखते हुए स्थिरता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा, “अब ईरान को बातचीत की ओर लौटने की जरूरत है, क्योंकि संकट को खत्म करने का यही एकमात्र तरीका है।”
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने डोनाल्ड ट्रंप की कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा, “ईरान का परमाणु कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि वह कभी भी परमाणु हथियार विकसित न करे। “हालांकि, हम ईरान से बातचीत की ओर लौटने का आग्रह करते हैं। हमें अब स्थिरता की ओर बढ़ना चाहिए।”
फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने कहा, “इस समस्या का स्थायी समाधान एनपीटी के ढांचे के भीतर कूटनीतिक बातचीत के जरिए ही संभव है।
🔹एशियाई देशों की मिली-जुली प्रतिक्रिया, रूस और चीन की आलोचना :
जापानी प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “स्थिति बेहद गंभीर है और हम घटनाक्रम पर करीबी नजर रख रहे हैं।”
रूसी सुरक्षा परिषद के उप सचिव दिमित्री मेदवेदेव ने ट्रंप की आलोचना करते हुए कहा, “नोबेल शांति पुरस्कार जीतने आए राष्ट्रपति ने एक नया युद्ध शुरू कर दिया है।”
चीन के यूएन प्रतिनिधि फू कांग ने भी चेतावनी दी कि “मध्य पूर्व में शांति बल से नहीं लाई जा सकती। कूटनीतिक प्रयास अभी भी संभव हैं और उनका इस्तेमाल किया जाना चाहिए। यह हमला क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक नया खतरा बन सकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह की सैन्य कार्रवाई ईरान-इजराइल युद्ध को और हिंसक बना सकती है और पूरे क्षेत्र की स्थिरता को खतरे में डाल सकती है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा, “ईरान पर हमले ने क्षेत्र में तनाव और हिंसा के स्तर को खतरनाक रूप से बढ़ा दिया है। इस तरह की आक्रामकता पूरी दुनिया के लिए खतरा है। हम सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील करते हैं।”
भारत की ओर से फिलहाल कोई औपचारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार भारत भी क्षेत्रीय शांति बनाए रखने के पक्ष में है।
मेक्सिको और न्यूजीलैंड ने भी स्थिति को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के लिए तत्काल कूटनीतिक बातचीत की अपील की है।
🔹क्षेत्रीय देशों की चिंता और विरोध :
कतर, यूएई, पाकिस्तान और सऊदी अरब जैसे मध्य-पूर्वी देशों ने भी क्षेत्रीय अस्थिरता पर चिंता जताई है।
संयुक्त अरब अमीरात ने कहा, “हम क्षेत्रीय तनाव और ईरान पर हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हैं। यह स्थिति नई अस्थिरता को जन्म दे सकती है। हम संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद से इस संकट को हल करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील करते हैं।”
कतर ने यह भी कहा,
- “ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला खेदजनक है। इसका क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर विनाशकारी प्रभाव हो सकता है।”
पाकिस्तान ने अपने बयान में कहा:
- “यह असाधारण आक्रमण क्षेत्र के लिए बेहद घातक है। हम सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील करते हैं।”
संयुक्त अरब अमीरात, कतर, पाकिस्तान, मैक्सिको, जापान, इटली, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया ने स्थिति को तनावपूर्ण बताया है और त्वरित गति से तनाव कम करने की अपील की है।
🔹अमेरिका की आलोचना करने वाले देश :
वेनेजुएला, क्यूबा, मैक्सिको, उत्तर कोरिया और पाकिस्तान ने अमेरिका की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। अमेरिका की कड़ी आलोचना करते हुए इस हमले को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया गया है।
क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल ने कहा, “हम अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए बम हमलों की कड़ी निंदा करते हैं। यह हमला मानवता के लिए संकट का संकेत है।”
उत्तर कोरिया ने भी अमेरिका और इजरायल की निंदा करते हुए इसे “सार्वभौमिकता का उल्लंघन” बताया।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा:
- “ईरान पर हमले ने क्षेत्र में तनाव और हिंसा के स्तर को खतरनाक रूप से बढ़ा दिया है। इस तरह की आक्रामकता पूरी दुनिया के लिए खतरा है।”
🔹ईरान की विपक्षी नेता मरियम राजवी का समर्थन :
हालांकि, कुछ अप्रत्याशित प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। पेरिस में रहने वाली ईरानी विपक्षी नेता मरियम राजवी ने इस हमले का समर्थन करते हुए कहा कि अब ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई को जाना होगा। उन्होंने कहा, “यह परियोजना देश के लिए देशद्रोह साबित हुई, जिसमें दो ट्रिलियन डॉलर और अनगिनत जानें चली गईं। अब सब कुछ राख हो गया है। ईरानी लोग अब शांति और स्वतंत्रता चाहते हैं।”
🔹अमेरिका की घरेलू प्रतिक्रिया :
हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर अमेरिका के भीतर मतभेद देखने को मिले। विपक्ष ने डोनाल्ड ट्रंप पर एक बार फिर क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंकने का आरोप लगाया। दूसरी ओर, राष्ट्रपति ट्रंप के समर्थकों ने इसे “शक्ति प्रदर्शन” बताकर ईरान-इजराइल युद्ध में अमेरिका की निर्णायक भूमिका को उचित ठहराया।
निष्कर्ष : दुनिया कह रही है कि अब कूटनीति ही एकमात्र रास्ता
ईरान-इजराइल युद्ध पहले से ही बहुत संवेदनशील स्थिति में था और अब अमेरिका के हस्तक्षेप ने इस संकट को वैश्विक संघर्ष की ओर मोड़ दिया है। डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले ने उन्हें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना और प्रशंसा दोनों के बीच में ला खड़ा किया है।
अभी तक ईरान ने संकेत दिया है कि वह जवाबी कार्रवाई कर सकता है। इससे यह साफ है कि अगर जल्द ही इसका समाधान नहीं निकाला गया तो ईरान-इजराइल युद्ध वैश्विक संकट में बदल सकता है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस संकट का समाधान केवल बातचीत और शांति से ही संभव है। संयुक्त राष्ट्र और कई देशों ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते यह संघर्ष नहीं रुका तो इसके परिणाम न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक हो सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक संस्थाएं इस बात पर जोर दे रही हैं कि अब समय आ गया है कि ईरान और अमेरिका दोनों ही कूटनीति की ओर लौटें।
संयुक्त राष्ट्र और दुनिया की सभी ताकतें अब केवल एक ही समाधान की ओर इशारा कर रही हैं – “कूटनीति”। सवाल यह है कि क्या सभी पक्ष बातचीत की मेज पर लौटेंगे या दुनिया विश्व युद्ध की ओर बढ़ेगी?
Author: Swatantra Vani
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