लाल सागर में अमेरिका पर हमले की धमकी :

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लाल सागर में अमेरिका पर हमले की धमकी: यमन के हूथी विद्रोहियों की चेतावनी से ईरान-इजराइल युद्ध और भड़का – 

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मध्य पूर्व में तनाव अब अपने चरम पर पहुंच गया है। एक तरफ ईरान-इजराइल युद्ध अपने सबसे भीषण रूप में जारी है, वहीं दूसरी तरफ यमन के हूथी विद्रोही भी इस संघर्ष में खुलकर कूदने की तैयारी कर रहे हैं। लाल सागर में स्थित अमेरिकी युद्धपोतों पर हमले की धमकी देकर हूथी विद्रोहियों ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर गहरी चिंताएं बढ़ा दी हैं।

🔹—हूथी विद्रोहियों ने कहा- “लाल सागर में अमेरिकी सेना को निशाना बनाएंगे”

यमन में ईरान समर्थित हूथी विद्रोही लंबे समय से पश्चिमी देशों और सऊदी अरब के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष में लगे हुए हैं। अब उन्होंने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि अगर अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर हमला किया तो वे लाल सागर में अमेरिकी जहाजों और युद्धपोतों को निशाना बनाएंगे।

हूथी विद्रोहियों के सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सारी ने कहा –

  1. “अगर अमेरिका ईरान के खिलाफ इजरायल का समर्थन करता है, तो यमनी सशस्त्र बल लाल सागर में अमेरिकी जहाजों और युद्धपोतों पर हमला करेंगे।”

यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ईरान-इजरायल युद्ध में संभावित हस्तक्षेप पर निर्णय लेने की प्रक्रिया में है।

🔹—डोनाल्ड ट्रंप का ईरान को कड़ा रुख और चेतावनी:

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम के बारे में पारदर्शिता दिखाने और अमेरिका को जवाब देने के लिए दो सप्ताह की समयसीमा स्पष्ट रूप से दी है। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान सहयोग नहीं करता है, तो अमेरिका के पास सैन्य हस्तक्षेप के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा।

हालांकि, हाल ही में दिए गए एक बयान में उन्होंने यह भी कहा –

  1.  “शायद ईरान पर सीधे सैन्य हमले की जरूरत नहीं होगी… ईरान अब यूरोप से बात नहीं करना चाहता, वह सीधे अमेरिका से बात करना चाहता है।”

इस बयान के बावजूद अमेरिका की आक्रामक कूटनीति जारी है और ट्रंप प्रशासन लगातार ईरान पर दबाव बना रहा है।

🔹—ईरान-इजराइल युद्ध के ताजा अपडेट :

इस बीच, ईरान-इजराइल युद्ध दिन-ब-दिन और भी भयंकर होता जा रहा है। इजरायली वायुसेना (IAF) ने ईरानी शहर इस्फ़हान में स्थित एक महत्वपूर्ण परमाणु केंद्र पर हमला किया है। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब ईरान पहले से ही अमेरिका और इजरायल के साथ तनावपूर्ण स्थिति में है।

ईरान की सरकारी मीडिया फ़ार्स के अनुसार, इस हमले में इस्फ़हान के परमाणु केंद्र को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की गई थी। हालाँकि, अधिकारियों ने कहा कि कोई रेडियोधर्मी रिसाव नहीं हुआ है और सुरक्षा पूरी तरह नियंत्रण में है।

इजराइल ने दावा किया है कि उसने सतह से सतह पर मार करने वाले तीन मिसाइल लॉन्चर नष्ट कर दिए हैं और ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड की एक इकाई जो 15 लॉन्चर तैयार कर रही थी, उसे भी खत्म कर दिया गया।

🔹—ईरान का पलटवार: इजरायल पर मिसाइलों की बौछार :

इजराइल की आक्रामकता का जवाब देते हुए ईरान ने भी इजरायली शहरों पर कई मिसाइलें दागीं। इन हमलों में हाइफ़ा शहर में 18वीं सदी की मशहूर अल ज़रीना ग्रैंड मस्जिद को भारी नुकसान पहुँचा है। यह मस्जिद एक ऐतिहासिक धरोहर है और इसका जीर्णोद्धार कार्य अभी चल रहा था। विस्फोट से पास की मस्जिद अल सगीर भी क्षतिग्रस्त हो गई है।

ईरान की ओर से यह स्पष्ट संदेश है कि अगर उसकी संप्रभुता और परमाणु सुविधाओं पर हमला किया गया तो वह जवाब देने में संकोच नहीं करेगा।

🔹—यमन में हूथी विद्रोही क्यों महत्वपूर्ण हैं ?

यमन में सालों से गृहयुद्ध चल रहा है और हूथी विद्रोही लगातार सऊदी अरब, यूएई और अमेरिका समर्थित गठबंधन से लड़ रहे हैं। इन विद्रोहियों को ईरान का सीधा समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कई बार ड्रोन और मिसाइल हमलों के जरिए लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों को भी निशाना बनाया है।

अब जबकि हूथी विद्रोही सीधे तौर पर “लाल सागर” में अमेरिका को चुनौती दे रहे हैं, तो इसका वैश्विक व्यापार मार्गों और समुद्री सुरक्षा पर भी गंभीर असर पड़ने की संभावना है।

🔹—अमेरिका की मुश्किलें और वैश्विक चिंताएँ :

अमेरिका के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक तरफ उसे ईरान-इजराइल युद्ध में अपनी रणनीति तय करनी है तो दूसरी तरफ उसे यमन जैसे अस्थिर देश से भी खतरा है। लाल सागर में अमेरिकी जहाजों पर संभावित हमले न केवल सैन्य दृष्टि से खतरनाक हैं, बल्कि इससे वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापार मार्ग भी प्रभावित हो सकते हैं।

यमन में बिगड़ती मानवीय स्थिति को लेकर संयुक्त राष्ट्र पहले ही अलर्ट जारी कर चुका है। यमन में करीब 50 लाख लोग भुखमरी का सामना कर रहे हैं। अब अगर युद्ध और बढ़ता है तो वहां की आबादी के लिए यह संकट और भी भयावह हो सकता है।

🔹—खामेनेई का बंकर में शरण लेना और उत्तराधिकारियों की नियुक्ति:

सूत्रों के अनुसार, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने खुद को बंकर में सुरक्षित कर लिया है और तीन वरिष्ठ अधिकारियों को उत्तराधिकारी नियुक्त किया है। इससे पता चलता है कि ईरान भी युद्ध के प्रभाव को लेकर गंभीर है और आपात स्थिति के लिए तैयार है।

निष्कर्ष :   विश्व युद्ध की आहट ?

यमन, हौथी विद्रोही, लाल सागर, अमेरिका, डोनाल्ड ट्रम्प और ईरान-इज़राइल युद्ध – ये सभी अब इतने गहरे रूप से एक दूसरे से जुड़े हुए हैं कि आने वाले दिनों में एक गलत कदम इस क्षेत्र को एक और बड़े वैश्विक युद्ध की ओर धकेल सकता है।

हौथी विद्रोहियों का ख़तरा और डोनाल्ड ट्रम्प की आक्रामकता वैश्विक शांति के लिए ख़तरे की घंटी है। अगर अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप करता है, तो यमन से हमले की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

यह देखना अभी बाकी है कि क्या वैश्विक कूटनीति इस संकट को शांतिपूर्ण ढंग से हल करने में सक्षम होगी या ईरान-इज़राइल युद्ध के बीच लाल सागर में तनाव और बढ़ेगा।

Swatantra Vani
Author: Swatantra Vani

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