यमन में भुखमरी का संकट गहराया :

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

यमन में भुखमरी का संकट गहराया: संयुक्त राष्ट्र ने दी चेतावनी, 50 लाख से ज़्यादा लोग भुखमरी की कगार पर – 

______

🔹युद्ध, आर्थिक संकट और जलवायु परिवर्तन ने देश को गंभीर मानवीय आपदा की ओर धकेल दिया

यमन इस समय इतिहास के सबसे बुरे मानवीय संकट का सामना कर रहा है। युद्ध से त्रस्त इस देश में भुखमरी की स्थिति अब भयावह होती जा रही है। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की तीन प्रमुख एजेंसियों – खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ), विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) ने एक संयुक्त बयान में चेतावनी दी कि अगर यमन में तत्काल और निरंतर मानवीय सहायता प्रदान नहीं की गई, तो सितंबर 2025 और फरवरी 2026 के बीच लगभग 4.2 लाख अतिरिक्त लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का शिकार हो सकते हैं। इससे प्रभावित लोगों की कुल संख्या बढ़कर 53.8 लाख हो जाएगी।

यह संख्या यमन के दक्षिणी प्रांतों की आधी से ज़्यादा आबादी का प्रतिनिधित्व करती है, जो साबित करती है कि संकट किस हद तक गंभीर हो गया है।

📌 यमन में अकाल क्यों पड़ा ?

यमन में अकाल के कई कारण हैं, जिनमें से सबसे प्रमुख हैं :

चल रहा गृह युद्ध (2014 से)

देश की अर्थव्यवस्था का पतन

मुद्रा रियाल में ऐतिहासिक गिरावट

चरम मौसम की घटनाओं में वृद्धि

और सबसे चिंताजनक बात है – अंतर्राष्ट्रीय सहायता की भारी कमी

इन सभी ने मिलकर लाखों यमनी परिवारों को भूख, कुपोषण और बीमारी की गहराई में धकेल दिया है।

📉 यमन की आर्थिक स्थिति और रियाल में गिरावट :

यमन की मुद्रा रियाल हाल के महीनों में ऐतिहासिक रूप से कमज़ोर हुई है। दक्षिणी बंदरगाह शहर अदन और अन्य सरकारी नियंत्रण वाले क्षेत्रों में रियाल की कीमत गिरकर लगभग 2,750 अमेरिकी डॉलर हो गई है। इसका सीधा असर बाज़ारों पर पड़ा है, जिससे खाद्य पदार्थों और ज़रूरी वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं। आम लोगों के लिए दो वक्त का खाना जुटाना भी चुनौती बन गया है।

⚠️ संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में क्या कहा गया ?

संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मई से अगस्त 2025 के बीच, अनुमानित 49.5 लाख लोग IPC चरण 3 (संकट) या उससे भी बदतर स्थिति में होंगे, जिनमें से 1.5 मिलियन लोग IPC चरण 4 (आपातकाल) श्रेणी में होंगे।

सबसे अधिक प्रभावित होने वालों में:

आंतरिक रूप से विस्थापित परिवार

ग्रामीण समुदाय

पांच वर्ष से कम आयु के बच्चे

गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं

यमन में भुखमरी से प्रभावित बच्चों की संख्या लगभग 2.4 मिलियन है, जबकि 1.5 मिलियन महिलाएं कुपोषण की शिकार हैं। ये आंकड़े न केवल डरावने हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक गंभीर चेतावनी भी हैं।

💸 सहायता की कमी: भुखमरी का सबसे बड़ा कारण :

संयुक्त राष्ट्र ने इस वर्ष (2025) के लिए यमन मानवीय प्रतिक्रिया योजना बनाई थी, लेकिन मई तक योजना को 10 प्रतिशत से भी कम वित्त पोषित किया गया था। इससे पता चलता है कि यमन को समय पर आवश्यक अंतर्राष्ट्रीय सहायता नहीं मिल पा रही है।

OCHA (मानवीय मामलों के समन्वय के लिए कार्यालय) ने सोशल मीडिया पर एक बयान में लिखा:

“यमन में खाद्य असुरक्षा खतरनाक स्तर पर है। अगर अभी मदद नहीं की गई, तो कुछ इलाकों में भुखमरी फैल सकती है। हमें तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।”

🤝 यमन सरकार और संयुक्त राष्ट्र की बैठक :

यमन के विदेश मंत्री शाया जिंदानी ने हाल ही में यमन में संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर जूलियन हरनिस से मुलाकात की। बैठक में यमन में भुखमरी और मानवीय संकट से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय संसाधन जुटाने पर चर्चा हुई।

यमन के विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक में इस बात पर ध्यान केंद्रित किया गया कि लाखों यमन नागरिकों को भूख, बीमारी और गरीबी से बचाने के लिए वैश्विक मंच पर और अधिक सहायता कैसे लाई जा सकती है।

⚔️ युद्ध की आग में जल रहा यमन –

यमन में संकट की जड़ें 2014 से चल रहे संघर्ष में हैं, जब ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों ने उत्तरी इलाकों पर कब्जा कर लिया था और सरकार को राजधानी सना छोड़नी पड़ी थी। 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने हस्तक्षेप करके युद्ध को और गहरा कर दिया।

इस समय तक युद्ध अपने दूसरे दशक में प्रवेश कर चुका है, लेकिन अभी भी स्थायी शांति की कोई संभावना नहीं है। इस लंबे संघर्ष ने यमन को भूख, गरीबी और बीमारी के दलदल में धकेल दिया है।

🛑 अब क्या किया जाना चाहिए ?

संयुक्त राष्ट्र और उसके सहयोगी संगठनों ने तीन महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं:

1. तत्काल खाद्य सहायता: जरूरतमंद परिवारों को तुरंत खाद्य और पोषण सामग्री पहुंचाई जानी चाहिए।

2. आजीविका सहायता और आर्थिक अवसर: कृषि और कुटीर उद्योगों के माध्यम से आजीविका के अवसर प्रदान करें।

3. स्वास्थ्य और बुनियादी सेवाएं: स्वच्छ पानी, टीकाकरण और चिकित्सा सुविधाओं तक त्वरित पहुंच प्रदान करें।

ये उपाय लाखों लोगों की जान बचा सकते हैं और यमन में भूख के कारण होने वाली मानवीय आपदा को रोक सकते हैं।

🔚 निष्कर्ष :   मदद करने के लिए अभी भी समय है

यमन एक ऐसा देश बन गया है जहाँ हर दूसरा व्यक्ति भूख के साये में जी रहा है। यह सिर्फ़ भू-राजनीतिक संकट नहीं है, बल्कि मानवता की सबसे बड़ी परीक्षा है।

अगर संयुक्त राष्ट्र, दानदाता देश और वैश्विक संगठन अभी कार्रवाई नहीं करते हैं, तो आने वाले महीनों में यमन में हज़ारों लोग भुखमरी के कारण अपनी जान गंवा सकते हैं।

अभी भी समय है कि दुनिया यमन को अकेला न छोड़े। दुनिया के एकजुट प्रयासों और मज़बूत समर्थन के ज़रिए हम यमन के लाखों बच्चों, महिलाओं और परिवारों के भविष्य को बचा सकते हैं।

Swatantra Vani
Author: Swatantra Vani

“स्वतंत्र वाणी” – जहाँ सच की आवाज़ कभी दबती नहीं। स्वतंत्र वाणी एक स्वतंत्र ऑनलाइन समाचार और ब्लॉग मंच है, जिसका उद्देश्य है पाठकों तक सही, निष्पक्ष और ताज़ा जानकारी पहुँचाना। यहाँ राजनीति, शिक्षा, तकनीक, स्वास्थ्य, मनोरंजन, खेल और लाइफ़स्टाइल से जुड़ी हर महत्वपूर्ण ख़बर और जानकारी आसान भाषा में प्रस्तुत की जाती है। हम मानते हैं कि सच्चाई कभी दबाई नहीं जा सकती, इसलिए हमारा हर लेख और ख़बर तथ्यों पर आधारित होती है, ताकि पाठकों तक भरोसेमंद और निष्पक्ष पत्रकारिता पहुँच सके।