पुणे ब्रिज हादसा: इंद्रायणी नदी पर पुल ढहने से 4 की मौत, 50 से ज्यादा घायल

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पुणे ब्रिज हादसा: इंद्रायणी नदी पर पुल ढहने से 4 की मौत, 50 से ज्यादा घायल, पीएम मोदी ने साइप्रस से सीएम फडणवीस को किया फोन, सीएम फडणवीस ने किया मुआवजे का ऐलान – 

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पुणे जिले की मावल तहसील के कुंदमाला गांव के पास रविवार दोपहर एक बड़ा हादसा हुआ, जिसे पुणे ब्रिज हादसे के तौर पर देखा जा रहा है। करीब 30 साल पुराना लोहे का पुल भारी बारिश और पर्यटकों की भीड़ का दबाव नहीं झेल सका और इंद्रायणी नदी पर बना यह पुल अचानक ढह गया। इस हादसे में अब तक 4 लोगों की मौत हो गई है और 50 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं।

हादसे के बाद देश के प्रधानमंत्री पीएम मोदी ने साइप्रस से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री सीएम फडणवीस को फोन कर राहत और बचाव कार्यों की जानकारी ली और हालात का जायजा लिया।

—दुर्घटना की पूरी घटना :

यह हादसा रविवार दोपहर करीब 2 बजे हुआ, जब भारी बारिश के कारण इंद्रायणी नदी उफान पर थी और पुल पर पर्यटकों की भारी भीड़ जमा थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुल कुछ मिनटों तक हिलता रहा और फिर अचानक टूटकर नदी में गिर गया। इस पुल की चौड़ाई मात्र चार फीट थी और उस समय इस पर करीब 7-8 बाइक और 100 से अधिक लोग मौजूद थे। गंभीर बात यह है कि पुल के पास चेतावनी बोर्ड भी लगाए गए थे, फिर भी पर्यटकों ने इसे नजरअंदाज कर दिया। — पीएम मोदी और सीएम फडणवीस की प्रतिक्रिया पुणे पुल हादसे की खबर मिलते ही पीएम मोदी, जो उस समय विदेश दौरे पर साइप्रस में थे, ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और सीएम फडणवीस को फोन कर स्थिति की जानकारी ली। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के अनुसार मोदी ने घायलों को तत्काल उपचार मुहैया कराने और बचाव अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए। वहीं सीएम फडणवीस ने भी हादसे पर दुख जताते हुए कहा, “यह बेहद दुखद घटना है। मैं प्रभावित परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं।” उन्होंने आगे कहा कि वे पुणे के संभागीय आयुक्त, जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और तहसीलदार के लगातार संपर्क में हैं। उन्होंने राहत कार्यों को प्राथमिकता देने के भी आदेश दिए।

—मुआवजे की घोषणा :

सीएम फडणवीस ने घोषणा की कि पुणे पुल हादसे में जान गंवाने वालों के परिजनों को राज्य सरकार की ओर से 5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी। साथ ही घायलों का पूरा इलाज राज्य सरकार अपने खर्च पर करवाएगी।

सीएमओ महाराष्ट्र ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों को 5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। घायलों के इलाज का खर्च भी सरकार उठाएगी।”

—बचाव कार्य और एनडीआरएफ की भूमिका :

पुल ढहने की सूचना मिलते ही राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की टीमें मौके पर पहुंच गईं और युद्धस्तर पर बचाव कार्य शुरू हो गया। अब तक 55 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि 6 लोग गंभीर रूप से घायल हैं।

जिला कलेक्टर जितेंद्र डूडी ने बताया कि हादसा दोपहर 3:15 बजे हुआ और 3:30 बजे सूचना मिलते ही 250 लोगों की बचाव टीम मौके पर पहुंच गई। 15 घंटे चले इस ऑपरेशन के बाद सभी लापता लोगों की पहचान कर ली गई है।

दुर्घटना के क्या कारण थे ?

1. ओवरलोडिंग और पर्यटकों की भीड़: पुल पर एक बार में सिर्फ एक बाइक और दो पैदल यात्रियों के ले जाने की क्षमता थी, लेकिन हादसे के वक्त वहां 100 से ज्यादा लोग मौजूद थे।

2. पुराना और जर्जर पुल: यह पुल करीब 30 साल पुराना था, जिसमें दो लोहे के हिस्से और एक सीमेंट का हिस्सा था। स्थानीय विधायक सुनील शेलके ने बताया कि पुल का निर्माण सिर्फ किसानों के इस्तेमाल के लिए किया गया था, लेकिन हाल के महीनों में पर्यटकों की भारी आवाजाही के कारण इस पर दबाव बढ़ गया था।

3. स्ट्रक्चरल ऑडिट का अभाव: पिछले कई सालों से इस पुल का स्ट्रक्चरल ऑडिट नहीं हुआ था। पुल की मरम्मत और पर्यटकों के प्रवेश पर रोक लगाने के लिए दो साल पहले स्थानीय ग्राम पंचायत और लोक निर्माण विभाग को पत्र भेजा गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

—राजनीतिक प्रतिक्रियाएं :

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस दुर्घटना को “टाली जा सकने वाली त्रासदी” करार देते हुए कहा कि लोगों की सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

वहीं, राहुल गांधी ने भी मृतकों के प्रति संवेदना व्यक्त की और प्रशासन से राहत कार्य में तेजी लाने की अपील की।

पवन खेड़ा ने कहा, “हर जान का जाना लापरवाही की कीमत दिखाता है। इस दुर्घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को सख्त सजा मिलनी चाहिए।”

—सोनू सूद ने भी जताया दुख :

बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद ने सोशल मीडिया पर लिखा, “पुणे में इंद्रायणी नदी पर हुए पुल हादसे की खबर से मैं बहुत दुखी हूं। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदना है। मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।”

—पहले भी उठी थी पुल के पुनर्निर्माण की मांग :

पूर्व विधायक दिगंबरदा भेगड़े ने 2017 में ही पुल के पुनर्निर्माण की मांग की थी। उन्होंने पत्र लिखकर कहा था कि पुल से केवल एक ही व्यक्ति गुजर सकता है और यह किसानों और छात्रों के लिए खतरनाक है। इसके बावजूद पुल का जीर्णोद्धार नहीं हो पाया ,सरकार ने इसे नज़रअंदाज़ कर दिया।

निष्कर्ष :

पुणे पुल हादसे ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बुनियादी ढांचे की अनदेखी कितनी भारी पड़ सकती है। इस हादसे ने न सिर्फ़ कई लोगों की जान ले ली, बल्कि प्रशासन की लापरवाही को भी उजागर किया।

अब देखना यह है कि क्या वाकई इस हादसे के बाद कोई सख्त कदम उठाए जाते हैं या यह भी एक और “अनदेखी त्रासदी” बनकर रह जाएगी।

Swatantra Vani
Author: Swatantra Vani

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