“मानव जीवन सर्वोपरि”: Axiom-4 मिशन में देरी पर इसरो प्रमुख ने कहा- लॉन्च लक्ष्य एक सही निर्णय

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“मानव जीवन सर्वोपरि”: Axiom-4 मिशन में देरी पर इसरो प्रमुख ने कहा- लॉन्च लक्ष्य एक सही निर्णय

भारत के दूसरे अंतरिक्ष यात्रियों को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर तैनात करने की ऐतिहासिक योजना को शामिल किया गया है। स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट में तरल पदार्थ ऑक्सीजन (एलओएक्स) की वजह से एक्सिओम-4 मिशन को लॉन्च किया गया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने एनडीटीवी से बात करते हुए कहा, “जब मानव जीवन दांव पर हो, तो लॉन्च को एक अच्छा निर्णय लेना है।”

इसरो की भूमिका और चिंता

Axiom-4 मिशन एक निजी कंपनी Axiom Space द्वारा संचालित एक वाणिज्यिक अंतरिक्ष मिशन है, जिसमें भारत की एक सीट पर 550 करोड़ रुपये का निवेश है। इस मिशन में भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला शामिल हैं, जो अमेरिका, हंगरी और पोलैंड के अंतरिक्ष यात्रियों के साथ 14 दिवसीय मिशन के तहत अंतरिक्ष स्टेशन जाएंगे।

इसरो ने इस मिशन में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दो विशेषज्ञ दल को अमेरिका भेजा है। ये रिकॉर्ड किए गए कैनेडी स्पेस सेंटर, फ्लोरिडा में स्थित हैं और एक्सिओम और स्पेसएक्स की टीम के साथ मिलकर लॉन्च किए गए लोगों की निगरानी कर रहे हैं।

फाल्कन-9 रॉकेट के ‘स्थैतिक अग्नि परीक्षण’ के बाद तरल पदार्थ ऑक्सीजन लाइकेज का पता चला, जिसके बाद स्पेसएक्स ने कहा, “लोक्स पिक्चर्स की भर्ती के लिए अतिरिक्त समय की भर्ती की शुरुआत की गई है। भर्ती पूर्ण होने के बाद और रेंज दस्तावेजों के अनुसार नई शुरुआत की तारीख साझा की जाएगी।”

इसरो विशेषज्ञ की चेतावनी

एनडीटीवी से बातचीत में इसरो के विशेषज्ञ ने चिंता व्यक्त की कि स्पेसएक्स जैसे प्रतिष्ठित संगठन द्वारा मानव मिशन के लिए लाइब्रेरी की शुरुआत पैड पर ही करना एक बड़ा जोखिम है। उन्होंने कहा, ”भारत में हम कभी भी ऐसी स्थिति में लॉन्च की पेशकश नहीं करते, खासकर जब मानव जीवन खत्म हो गया हो।”

इसरो के डॉ. नारायणन ने कहा, “इसरो की टीम ने एक्सिओम और स्पेसएक्स के विशेषज्ञों के साथ मिलकर इस मुद्दे पर गहन चर्चा की। इसके बाद यह निर्णय लिया गया कि शिक्षा को ठीक करने के लिए सभी आवश्यकताओं और सिद्धांतों को पूरा किया जाएगा। इसरो की संस्कृति में सबसे पहले सुरक्षा की जांच को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।”

क्रेयोजेनिक तकनीक के विशेषज्ञ डॉ. नारायणन

डॉ. वी. नारायणन क्राय जेनेटिक इंजनों के क्षेत्र में भारत के सबसे बड़े विशेषज्ञ से एक माने जाते हैं। उन्होंने भारत के स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजनों के विकास में अहम भूमिका निभाई है, जिसमें तरल ऑक्सीजन और तरल पदार्थ के रूप में उपयोग होता है।

इसरो प्रमुखों के साथ वे मिशन के दौरान अमेरिका में ही मौजूद हैं और फाल्कन-9 की लॉन्चिंग की प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं।

भारत के लिए अहम है Axiom-4 मिशन

एक्सिओम-4 मिशन में केवल निजी अंतरिक्ष शेयरों में भारत की भागीदारी को शामिल किया गया है, बल्कि यह भारत के अंतरिक्ष इतिहास में भी एक नया अध्याय शामिल है। ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला भारत के दूसरे अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष स्टेशन के रूप में रहेंगे। इससे पहले राकेश शर्मा ने 1984 में सोवियत संघ के मिशन के तहत अंतरिक्ष की यात्रा की थी।

भारत ने इस मिशन में अपनी सुरक्षा जांच को शामिल कर लिया है और इसी वजह से इसरो के विशेषज्ञ भर्ती से पहले पूरी तरह से तकनीकी और सुरक्षा जांच में शामिल हो गए हैं।

स्पेसएक्स की प्रतिक्रिया

स्पेसएक्स ने यह भी सोचा कि मिशन को टालना जरूरी था। उन्होंने कहा कि स्टॉल के बाद कोई निर्णय नहीं लिया गया और आवश्यकता पर विचार नहीं किया गया। हालाँकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि अगली लॉन्च तिथि क्या होगी।

क्या?

Axiom-4 मिशन को 30 जून 2025 तक कई उदहारण उपलब्ध हैं। इसके बाद जुलाई के मध्य में भी कुछ अवसर मिल सकते हैं। हालाँकि, इसके बाद अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की ओर से आवाजाही काफी बाधित हो जाएगी।

अब इसरो और अन्य संबंधित एसोसिएट्स की परतें, परीक्षण और सभी सुरक्षा सहायकों को संतुष्टि पूर्ण होने का इंतजार है।

निष्कर्ष

Axiom-4 मिशन को लॉन्च करने के लिए केवल एक तकनीकी निर्णय नहीं है, बल्कि यह बताया गया है कि जब मानव जीवन पर दांव लगाया जाता है, तो सुरक्षा सर्वोपरि हो जाती है। इसरो की भूमिका न केवल प्रौद्योगिकी के रूप में महत्वपूर्ण रही, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय मिशनों में भारत की जिम्मेदारी और विशेषज्ञता को भी साबित किया गया है।

डॉ. नारायणन के शब्दों में, “सभी आवश्यक परीक्षण और आवेदन प्रक्रिया के बाद ही लॉन्च को मंजूरी देना इसरो की संस्कृति का हिस्सा है।” यह सोच ही है कि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को विश्वसनीय और सुरक्षित बनाया जाए।

समाचार सारांश (त्वरित पुनर्कथन):

एक्सिओम-4 मिशन को फाल्कन-9 में ऑक्सीजन उपकरण का कारण बताया गया।

इसरो प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने इसे “मानव जीवन को ध्यान में रखते हुए सही निर्णय लिया” बताया।

भारत के मिशन में 550 करोड़ रुपये की एक सीट है।

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला इस मिशन में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

इसरो के दो रिकॉर्ड अमेरिका में मिशन की निगरानी कर रहे हैं।

लॉन्च की नई तारीख अब तक घोषित नहीं की गई है।

 

क्या भारत का यह अंतरिक्ष मिशन तय समय पर आगे बढ़ सकता है? यह भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए नए अवसर भंडारगी में देरी क्यों करता है? ऐसे पेजों के जवाब अगले कुछ दिनों में सामने आएंगे, लेकिन एक बात तय है- भारत अब अंतरिक्ष की दुनिया में सिर्फ दर्शक नहीं, एक सक्रिय साथी बन गया है।

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Author: kamalkant

कमल कांत सिंह एक उत्साही पत्रकार और लेखक हैं, जिन्हें समाचार और कहानी कहने का गहरा जुनून है। कई वर्षों के अनुभव के साथ, वे सामाजिक मुद्दों, संस्कृति और समसामयिक घटनाओं पर गहन विश्लेषण और आकर्षक लेखन के लिए जाने जाते हैं। कमल का उद्देश्य अपने लेखन के माध्यम से सच्चाई को उजागर करना और पाठकों को प्रेरित करना है। उनकी लेखनी में स्पष्टता, विश्वसनीयता और मानवीय संवेदनाओं का समावेश होता है, जो उन्हें एक विशिष्ट आवाज प्रदान करता है।