भारत में टेक्नोलॉजी और इनोवेशन की तीन बड़ी कहानियाँ: रापिडो की नई फ़ार्म स्टोरिज़, भारत का अंतरिक्ष मिशन और आईटी कंपनियों की इकाइयाँ
प्रकाशित तिथि: 10 जून 2025 : भारत में टेक्नोलॉजी और मूर्तिकला की दुनिया में हर दिन कुछ नया रच रही है। मुंबई के कुछ नए वास्तुशिल्प संस्थापकों ने एकजुट होकर देश के नवप्रवर्तन को नई दिशा देने का बीड़ा उठाया है। वहीं, रापिडो नाम की कंपनी अब फ़ार्म स्टॉक क्रांति में शामिल होने जा रही है, और ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला भारत के रास्ते फिर से अंतरिक्ष की ऊंचाइयों को छूने जा रहे हैं। इस लेख में हम आपको टेक्नोलॉजी और इनोवेशन की ये तीन बड़ी फिल्में बना रहे हैं।

1. रापिडो ओनली: ‘भारत’ के लिए एक सस्ता और सस्ता स्टॉक
आज के समय में जब ज़ोमैटो और स्विगी ने प्लेटफ़ॉर्म पर खाना ऑर्डर करने के लिए कई लोगों के लिए महंगा सौदा बन चुका है, तो रैपिडो ने एक नया समाधान पेश किया है – खुद का। इस सेवा का उद्देश्य भारत के सामान्य उपभोक्ता तक पिकनिक मनाना है।
क्या है खुद की खास बात?
रेडो के नए प्रोजेक्ट के खुलासे के अनुसार, ओनली प्लेटफॉर्म निम्नलिखित बातों पर आधारित होगा:
- ‘भारत’ को ध्यान में रखते हुए बनाया गया मंच: हर रेस्तरां को कम से कम 4 भोजन विकल्प ₹150 से कम कीमत में दिए जाएंगे।
- रेस्तरां से कोई कमीशन नहीं लिया जाएगा: इसके बजाय, रैपिडो सब्स रेवेन्यू चार्ज और अर्निंग चार्ज के माध्यम से चार्ज चार्ज।
- ऑफ़लाइन और यूक्रेन में ज़ोमैटो और स्विगी जैसी कंपनियों की कीमत में 30-40% की वृद्धि नहीं होगी।
राडो का दृश्य
- “हर व्यक्ति को पसंद की गुणवत्ता और उचित कीमत पर भोजन का विकल्प चुनना चाहिए।” यही है राडो की प्रेरणा।
- गैजेट में कैसे उतरेगा रैपिडो?
- ज़ोमैटो और स्विगी जहां हर दिन 4.5 मिलियन से ज्यादा ऑर्डर डिलीवर करते हैं, वहीं रैपिडो का भी बड़ा ठिकाना है:
- प्रतिदिन 4 मिलियन राइड्स, 500 शहरों में
- 30 मिलियन मासिक सक्रिय उपयोगकर्ता
रेडो अतिरिक्त शुल्क जैसे सबसे सस्ता फ़ोर्स, प्लेटफ़ॉर्म फ़ेस आदि दूर रहने के लिए, जिससे ग्राहक को कम कीमत मिलती है।
रेस्तरां का संस्थान का विवरण
रेस्टोरेंट मालिक तीसरे बड़े खिलाड़ी के आने से खुश हैं। हालाँकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि रैपिडो क्विंट फ़ास्ट से स्कैन करता है और यह ज़ोमैटो और स्विगी जैसे प्रतिस्पर्धियों पर क्या असर करता है। विशेष रूप से स्विगी, जो रैपिडो में 10% स्टॉक है, अब खुद एक चुनौती के रूप में रैपिडो को देखेगा।
2. एक पायलट जो भारत को फिर से अंतरिक्ष में ले जा रहा है
करीब चार दशक बाद भारत एक बार फिर अंतरिक्ष में अपने मानवयुक्त अभियान को सत्य बना रहा है। 11 जून 2025 को, इतिहास एक नया परिवर्तनशील हमला होगा जब भारतीय स्टेशन के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) की ओर प्रस्थान होगा।
शुभांशु शुक्ला कौन हैं?
- उम्र: 40 वर्ष
- मूल निवासी: लखनऊ
- शिक्षा: एनडीए और आईआईएससी से स्नातक
- 2,000 घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव
- हवाई जहाज़: Su-30 MKI और MiG-29 जैसे फ़्रांसीसी परीक्षण उड़ान
प्रशिक्षण का सफर
2019 में रूस के यूरी गगारिन कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण शुरू हुआ बाद में अमेरिका के नासा जॉनसन अंतरिक्ष केंद्र में भी विशेष प्रशिक्षण लिया गया
- मिशन की भूमिका
- डिज़ाइन: स्पेसएक्स फाल्कन 9
- मिशन: एक्सिओम मिशन 4
- भूमिका: अंतरिक्ष यान के ऑपरेशन में सहायक, लॉन्च, डॉकिंग और रि-एंट्री में सहायता
- 14 दिन की अंतरिक्ष यात्रा
शुक्ला इस मिशन में कुल 60 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोगों का संचालन करेंगे। इनमें से कुछ प्रमुख भारत-नेतृत्व वाले प्रयोग हैं:
- साइनोबैक्टीरिया अध्ययन: माइक्रोग्रेविटी में कमी की वृद्धि का परीक्षण, ताकि अंतरिक्ष यान के जीवन समर्थन को बेहतर बनाया जा सके।
- अंतरिक्ष मैकएल्गी: अंतरिक्ष में एल्गी के उपयोग को बढ़ावा – भोजन, जल और जीवन समर्थन प्रणाली के लिए।
आगे की योजना
मिशन पूरा होने के बाद शुभांशु शुक्ला इसरो के गगनयान मिशन में शामिल होंगे। उनके साथ प्रशांत बालकृष्णन नायर भी भारत के बहु-क्रू स्पेसफ्लाइट और स्पेस स्टेशन की मंजूरी में मुख्य भूमिका निभाएंगे।
3. भारतीय आईटी कंपनियां $1 प्लास्टिक क्लब के करीब
अब भारत के आर्थिक परिदृश्य में फैक्ट्रल्स और टेक्नोलॉजी कंपनियां प्रमुख भूमिका निभा रही हैं। हाल ही में सात और भारतीय आईटी कंपनियों के $1 ब्रांड (लगभग ₹8300 करोड़) का वार्षिक राजस्व क्लब के बेहद करीब पहुंच गया है।
यह दिखाया गया है कि भारत का डिजिटल और तकनीकी क्षेत्र बहुत तेजी से वैश्विक स्तर पर शेयर किया जा रहा है।
गैजेट अद्यतन
आप टेक और पाठ्यपुस्तकों की इन सभी रोचक कहानियों को अब Tech3 पॉडकास्ट पर भी सुन सकते हैं। यह सोमवार से शुक्रवार तक Spotify और Apple पॉडकास्ट उपलब्ध है।
निष्कर्ष:
भारत आज न सिर्फ टेक्नोलॉजी को ऑपटेशंस वाला देश है, बल्कि इनोवेशन और साइंस में नया इतिहास रचने वाला भी बन गया है। जहां भारत के आम स्टूडियोज के लिए शानदार सेवाएं लेकर आ रहे हैं, वहीं शुभांशु शुक्ला जैसे टैलेंटेड शख्सियत भारत को फिर से अंतरिक्ष में प्रतिष्ठित कर रहे हैं। साथ ही, भारतीय आईटी कंपनियां अब $1 रेलवे क्लब में वैश्विक पहचान बना रही हैं।
यह समय है जब भारत प्रौद्योगिकी, विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में नई अर्थव्यवस्था की ओर है।
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Author: kamalkant
कमल कांत सिंह एक उत्साही पत्रकार और लेखक हैं, जिन्हें समाचार और कहानी कहने का गहरा जुनून है। कई वर्षों के अनुभव के साथ, वे सामाजिक मुद्दों, संस्कृति और समसामयिक घटनाओं पर गहन विश्लेषण और आकर्षक लेखन के लिए जाने जाते हैं। कमल का उद्देश्य अपने लेखन के माध्यम से सच्चाई को उजागर करना और पाठकों को प्रेरित करना है। उनकी लेखनी में स्पष्टता, विश्वसनीयता और मानवीय संवेदनाओं का समावेश होता है, जो उन्हें एक विशिष्ट आवाज प्रदान करता है।










