इजरायल मानचित्र विवाद: जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा दिखाने पर मचा बवाल

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सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया के बाद इजरायली सेना ने मांगी माफी, गहराया ‘इजरायल मानचित्र विवाद

नई दिल्ली:
इजरायल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) को उस समय भारी विरोध का सामना करना पड़ा, जब उसने 13 जून 2025 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक मानचित्र साझा किया, जिसमें जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा दिखाया गया था। यह मानचित्र ईरान की मिसाइल क्षमताओं को दर्शाने के उद्देश्य से पोस्ट किया गया था, लेकिन भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को गलत तरीके से दर्शाए जाने के कारण यह मामला तेजी से वायरल हुआ और सोशल मीडिया पर ‘इजरायल मानचित्र विवाद’ के रूप में सामने आया।

इजरायल मानचित्र विवाद

सोशल मीडिया पर भारी विरोध, फिर आईडीएफ ने मांगी माफी

भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स ने इस गंभीर गलती पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और आईडीएफ को तुरंत पोस्ट हटाने और माफी मांगने पर मजबूर किया। कई यूजर्स ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को टैग करते हुए कहा कि भारत को इस तरह की असंवेदनशीलता की उम्मीद नहीं थी, खासकर तब जब भारत-इजरायल के रिश्ते ऐतिहासिक रूप से मजबूत माने जाते हैं।

करीब 90 मिनट बाद इजरायली सेना ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करते हुए लिखा: “यह चित्रण केवल सांकेतिक उद्देश्य से साझा किया गया है और इसमें दर्शाई गई सीमाएं वास्तविक भौगोलिक स्थिति को सही रूप में प्रतिबिंबित नहीं करती हैं। यदि इस छवि से किसी की भावनाएं आहत हुई हों, तो हम उसके लिए खेद प्रकट करते हैं।” इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF), 13 जून, 2025

आईडीएफ की ओर से इजरायली सेना की यह माफी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, लेकिन विवाद यहीं नहीं रुका।

भारत सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं

जबकि भारतीय नागरिकों और राजनीतिक वर्ग ने इस मामले में अपनी आवाज उठाई है, लेकिन भारत सरकार की ओर से अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, भारत हमेशा से स्पष्ट रहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न अंग हैं, जिसमें पाकिस्तान और चीन द्वारा अवैध रूप से कब्जा किए गए क्षेत्र भी शामिल हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और पहलगाम आतंकी हमले के बाद देश की एकता और अखंडता पर अपने सख्त रुख को दोहराया था।

भारत-इजरायल संबंध: पुराने और मजबूत, फिर भी इतनी चूक?

यह विवाद इसलिए और भी चौंकाने वाला है क्योंकि पिछले कुछ सालों में भारत और इजराइल के बीच रिश्ते काफी बेहतर हुए हैं। 2017 में प्रधानमंत्री मोदी इजराइल की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने, जो भारत-इजराइल के रिश्तों में ऐतिहासिक मोड़ था। भारत इजराइल से हथियारों का बड़ा खरीदार है और दोनों देशों के बीच व्यापार और रक्षा साझेदारी लगातार बढ़ रही है। इसके बावजूद इजराइल की ओर से ऐसी लापरवाही भारत में कूटनीतिक असंवेदनशीलता के तौर पर देखी जा रही है।

कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोला

इस विवाद के बाद कांग्रेस पार्टी ने अपने ‘मित्र राष्ट्र’ की चूक पर केंद्र सरकार, खासकर प्रधानमंत्री मोदी को घेरते हुए उनकी विदेश नीति पर सवाल उठाए।

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने एक्स पर लिखा: “एक और दिन, विश्वगुरु की टोपी में एक और ‘विवाद’। उनके ‘मित्र’ ने ‘जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा’ दिखाया।”

इस टिप्पणी के ज़रिए कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी और नेतन्याहू के बीच बढ़ती नज़दीकियों की आलोचना की और सरकार की कूटनीतिक विफलताओं को उजागर करने की कोशिश की।

इज़राइल मानचित्र विवाद की पृष्ठभूमि: ईरान-इज़राइल युद्ध का बढ़ता तनाव

यह मानचित्र उस पोस्ट का हिस्सा था जिसमें IDF ने ईरान को वैश्विक ख़तरा बताया था। उस पोस्ट में कहा गया था: “ईरान आज की दुनिया के लिए एक गंभीर वैश्विक चुनौती बन चुका है। इज़राइल उसका अंतिम लक्ष्य नहीं है—यह तो केवल उसकी आक्रामक रणनीति की शुरुआत है। वर्तमान हालातों में हमारे पास जवाबी कार्रवाई के अलावा और कोई रास्ता शेष नहीं था।”

इस संदेश के साथ शेयर किए गए मानचित्र में ईरान से निकलने वाले लाल घेरे थे, जो उसकी मिसाइलों की सीमा को दर्शाते थे। इनमें भारत, चीन, रूस, तुर्की, यूरोप और अफ्रीका के कुछ देश शामिल थे। इस मानचित्र में भारत की सीमाओं को गलत तरीके से दिखाया गया था। इज़राइल मानचित्र विवाद ने भारत में लोगों की भावनाओं को ठेस पहुँचाई और कूटनीतिक संकट पैदा किया।

इज़राइली राजदूत का स्पष्टीकरण

भारत में इज़राइली राजदूत रूवेन अज़ार ने भी विवाद पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि यह मानचित्र “आकस्मिक और अनजाने में” बनाया गया था। उन्होंने आश्वासन दिया कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों से नक्शे को हटाने और सही करने की अपील की है।

ईरान-इजराइल युद्ध: संकट की गंभीरता बढ़ती जा रही है

आईडीएफ पोस्ट में जिस ‘ऑपरेशन राइजिंग लॉयन’ का जिक्र किया गया है, वह दरअसल इजरायल की सैन्य कार्रवाई का नाम है, जिसमें उन्होंने ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। इस हमले के जवाब में ईरान ने भी इजरायल के उत्तरी इलाकों में मिसाइल हमले किए थे।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल ने दावा किया है कि ईरान की तरफ से 100 से ज्यादा ड्रोन लॉन्च किए गए, जिनमें से कई को अमेरिका की मदद से बेअसर कर दिया गया।

ईरान और इजरायल के बीच यह तनाव अब पूरी तरह युद्ध की ओर बढ़ता दिख रहा है। दोनों देशों के नेता – बेंजामिन नेतन्याहू और अयातुल्ला अली खामेनेई – लगातार एक-दूसरे को चेतावनी और धमकी दे रहे हैं।

निष्कर्ष: इजरायली सेना की माफी के बावजूद विवाद बरकरार

हालांकि इजरायली सेना ने माफी मांगकर मामले को शांत करने की कोशिश की है, लेकिन इजरायली नक्शा विवाद ने भारत में गहरा असंतोष पैदा कर दिया है। भारत का राजनीतिक वर्ग सवाल उठा रहा है कि क्या यह वाकई ‘अनजाने में हुई गलती’ थी या कूटनीतिक लापरवाही? इस पूरे प्रकरण ने यह साफ कर दिया है कि भले ही भारत-इजराइल के रिश्ते मजबूत हों, लेकिन क्षेत्रीय संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि भारत सरकार इस मसले को लेकर क्या रुख अपनाती है—क्या वह इज़राइल की सार्वजनिक माफी को स्वीकार करके इसे समाप्त मान लेगी, या फिर आगे कोई कड़ा कूटनीतिक कदम उठाएगी?”

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Author: kamalkant

कमल कांत सिंह एक उत्साही पत्रकार और लेखक हैं, जिन्हें समाचार और कहानी कहने का गहरा जुनून है। कई वर्षों के अनुभव के साथ, वे सामाजिक मुद्दों, संस्कृति और समसामयिक घटनाओं पर गहन विश्लेषण और आकर्षक लेखन के लिए जाने जाते हैं। कमल का उद्देश्य अपने लेखन के माध्यम से सच्चाई को उजागर करना और पाठकों को प्रेरित करना है। उनकी लेखनी में स्पष्टता, विश्वसनीयता और मानवीय संवेदनाओं का समावेश होता है, जो उन्हें एक विशिष्ट आवाज प्रदान करता है।