पेटीएम स्टॉक में 10% की भारी गिरावट

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पेटीएम स्टॉक में 10% की भारी गिरावट: वित्त मंत्रालय के यूपीआई पर एमडीआर से इनकार के बाद सदस्यता में चिंता

की अगुवाई डिजिटल कंपनी पेटीएम (वन 97 कम्युनिकेशंस) के स्टॉक में गुरुवार को भारी गिरावट देखने को मिली। दिन के दौरान इस शेयर में ₹864.40 के पैकेज स्तर तक गिरावट आई, जिसमें करीब 10% की गिरावट बताई गई है। इस भारी गिरावट का मुख्य कारण वित्त मंत्रालय द्वारा यूनीपेरिएंट पैलेमेंट्स ऑफर (UPI) पर मर्चेंट सोलो रेट (MDR) लागू करने की खबर का खंड था।

पेटीएम स्टॉक में 10% की भारी गिरावट

सुबह 10 बजे तक पेटीएम के शेयर में करीब 6% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि व्यापक शेयर बाजार एनएसई निफ्टी 50 में केवल 0.14% की गिरावट दर्ज की गई। यह Paytm के लिए फरवरी 2024 के बाद से अब तक की सबसे बड़ी एक दिवसीय गिरावट रही है।

वित्त मंत्रालय ने क्या कहा?

वित्त मंत्रालय ने बुधवार को स्पष्ट रूप से कहा कि सरकार की ओर से यूपीआई पर एमडीआर लागू करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। मंत्रालय ने एक्स (पूर्व में) पर बयान जारी कर कहा:  “UPI घोटाले पर MDR आरोप लगाने को लेकर चल रही है खुलासा और दावा पूरी तरह से गलत, आधारहीन और चरित्र हैं। इस प्रकार की अफवाहें देश के नागरिकों में अंधविश्वास असमंजस, भय और संदेह पैदा करती हैं। सरकार डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा देने के लिए UPI के माध्यम से पूरी तरह से गलत है।”

यह बयान ऐसे समय में आया है जब कुछ मीडिया में यह दावा किया गया था कि सरकार बड़ी संख्या में बैंकों के लिए यूपीआई निवेशकों के लिए एमडीआर लागू करने की संभावना पर विचार कर रही है ताकि बैंक और पैलेंट प्रोवाइडर्स को सपोर्ट मिल सके।

Paytm पर असर क्यों हुआ?

पेटीएम की मूल कंपनी वन 97 कम्युनिकेशंस के शेयर में यह गिरावट का कारण नकारात्मक प्रभाव पड़ा। कंपनी ने माना कि अगर सरकार एमडीआर को बिक्री जारी करती है, तो इससे पेटीएम जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म को राजस्व का नया स्रोत मिल सकता है। लेकिन सरकार के इस असहमति के बाद यह लाभ खत्म हो गया।

इसलिए जैसे ही वित्त मंत्रालय का बयान आया, अज्ञात ने शेयर शेयर में बड़ी संख्या में चिंता जताई, जिससे पेटीएम के स्टॉक में तेजी से गिरावट दर्ज की गई।

पीसीआई ने क्या कहा था?

इससे पहले मार्च 2025 में डिजिटल पैट्रोल इंडस्ट्री के लिए काम करने वाली संस्था पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) ने सरकार से यूपीआई और रुपे डेबिट कार्ड पर एमडीआर लागू करने का प्रस्ताव रखा था।

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पीसीआई ने यह भी चेतावनी दी थी कि यदि भुगतान कंपनियों में राजस्व शामिल नहीं है, तो लंबे समय तक डिजिटल पैमाइश का प्रदर्शन नहीं किया जाएगा। इससे नवप्रवर्तन, साइबर सुरक्षा और ग्राहक सहायता सेवा प्रभावित हो सकते हैं।

पीसीआई का दावा है कि जनवरी 2020 से लागू एमडीआर-मुक्त नीति से डिजिटल भुगतान सेवा प्रदाताओं को भारी वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है। पीसीआई के अनुसार, इस पूरी व्यवस्था के लिए हर साल लगभग ₹10,000 करोड़ की आवश्यकता होती है, जबकि सरकार केवल ₹1,500 करोड़ की प्रोत्साहन राशि देती है, जो कि आवश्यक है।

पीसीआई के प्रमुख सदस्य कौन-कौन हैं?

पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया के देश के सदस्यों की कुछ सबसे बड़ी डिजिटल भुगतान कंपनियां हैं, जैसे:

Paytm

phonepe

अमेज़न पे

रेज़रपे

इन एजेंसियों का कहना है कि सरकार की ओर से डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए एक व्यावसायिक मॉडल भी जरूरी है, लेकिन वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए एक व्यावसायिक मॉडल भी जरूरी है।

माता-पिता की चिंताएँ

पेटीएम के शेयर में गिरावट यह है कि ग्राहक अब कंपनी के रेवेन्यू मॉडल को लेकर आशंकित हैं। यदि सरकार एमडीआर लागू नहीं करती है, तो पेटीएम जैसी कंपनी को भुगतान सेवाओं से सीधे कमाई का अवसर नहीं मिलेगा। ऐसे में उन्हें अन्य यूनिवर्स से रिवाइवल रीचेंज करने का वेरिएबल रीचेंज होगा, जो कि कठिन अनुभव होता है। मानकों के अनुसार, यह लघु अवधि में आवेदकों की भावनाओं को प्रभावित कर सकता है, लेकिन यदि पेटीएम अपनी अन्य सेवाओं जैसे ऋण संवितरण, बीमा और वित्तीय सेवाओं को सुरक्षित रखता है, तो लंबी अवधि में कंपनी की स्थिति मजबूत हो सकती है।

क्या सलाह दी जानी चाहिए?

बाजार विशेषज्ञ की राय है कि पेटीएम की खोज स्थिति में कोई अप्रत्याशित बदलाव नहीं हुआ है। कंपनी के पास अभी भी करोड़ों का आधार है और उसकी ब्रांड कीमत तय है। हालाँकि, UPI से जुड़े रेवेन्यू मॉडल को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, जो आवेदक के लिए चिंता का विषय है।

अगर आप लंबे समय के लिए निवेश कर रहे हैं तो आपको डरने की कोई जरूरत नहीं है। लेकिन अगर आप हाल ही में ट्रेडिंग के मकसद से शेयर बाजार में हैं, तो आपको जोखिम प्रबंधन उपकरण का उपयोग करना चाहिए।

निष्कर्ष:

Paytm के स्टॉक में यह 10% की गिरावट भारत के डिजिटल पैनल इकोसिस्टम की समानता को दर्शाता है। एक ओर सरकारी डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए यूपीआई को मुफ्त में रखना चाहता है, तो दूसरी ओर पैवेलियन कंपनी को सपोर्ट बनाने के लिए एक मजबूत रेवेन्यू मॉडल की जरूरत है।

यह संतुलन बनाना सरकार और उद्योग दोनों के लिए एक चुनौती है। आने वाले समय में यह देखने में दिलचस्प होगा कि क्या कोई नया समाधान सामने आया है जिससे स्टार्स को भी सुविधा मिलेगी और कंपनी को भी आर्थिक सुविधाएं मिल सकेंगी।

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Author: kamalkant

कमल कांत सिंह एक उत्साही पत्रकार और लेखक हैं, जिन्हें समाचार और कहानी कहने का गहरा जुनून है। कई वर्षों के अनुभव के साथ, वे सामाजिक मुद्दों, संस्कृति और समसामयिक घटनाओं पर गहन विश्लेषण और आकर्षक लेखन के लिए जाने जाते हैं। कमल का उद्देश्य अपने लेखन के माध्यम से सच्चाई को उजागर करना और पाठकों को प्रेरित करना है। उनकी लेखनी में स्पष्टता, विश्वसनीयता और मानवीय संवेदनाओं का समावेश होता है, जो उन्हें एक विशिष्ट आवाज प्रदान करता है।